भारत और जर्मनी ने डाक, एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक्स सेवाओं में सहयोग बढ़ाकर द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इन समझौतों का उद्देश्य डिलीवरी प्रणालियों का आधुनिकीकरण करना, सीमा-पार व्यापार को सुगम बनाना और भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों से बेहतर रूप से जोड़ना है। यह साझेदारी भारत और जर्मनी के बीच कुशल, टिकाऊ और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित करने की साझा सोच को दर्शाती है।
क्यों चर्चा में?
12 जनवरी 2026 को अहमदाबाद में भारत और जर्मनी के बीच दो प्रमुख सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। ये समझौते विशेष रूप से डाक, एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक्स सेवाओं, खासकर सीमा-पार ई-कॉमर्स और अंतरराष्ट्रीय डिलीवरी से जुड़े हैं।
प्रमुख समझौते
- जर्मनी के संघीय चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा के दौरान दो महत्वपूर्ण दस्तावेजों का आदान-प्रदान हुआ।
- भारत के डाक विभाग और जर्मनी के संघीय आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्रालय के बीच संयुक्त आशय घोषणा (Joint Declaration of Intent – JDoI)
- डाक विभाग और डॉयचे पोस्ट एजी (Deutsche Post AG) के बीच लेटर ऑफ इंटेंट (LoI)
- ये समझौते लॉजिस्टिक्स सेवाओं में एक संरचित और दीर्घकालिक साझेदारी को औपचारिक रूप देते हैं।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
इस साझेदारी में डाक, एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक्स सेवाओं को शामिल किया गया है, जिसमें सीमा-पार ई-कॉमर्स और समय-निश्चित अंतरराष्ट्रीय डिलीवरी पर विशेष जोर है।
- संयुक्त उत्पादों का विकास
- नेटवर्क कनेक्टिविटी को मजबूत करना
- अंतिम छोर (लास्ट माइल) डिलीवरी में सुधार
- पत्रों और पार्सलों के लिए द्विपक्षीय दर व्यवस्थाओं की संभावनाओं की खोज
इसके साथ ही डिजिटलीकरण, दक्षता, स्थिरता और ग्रीन लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय एक्सप्रेस सेवाएं
- इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण परिणाम संयुक्त प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय एक्सप्रेस सेवाओं की शुरुआत होगी।
- इन सेवाओं में इंडिया पोस्ट की व्यापक लास्ट-माइल पहुंच और डॉयचे पोस्ट–डीएचएल समूह की वैश्विक लॉजिस्टिक्स क्षमता को जोड़ा जाएगा।
- इससे अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट का ट्रांजिट समय कम होगा, विश्वसनीयता बढ़ेगी और एंड-टू-एंड ट्रैकिंग संभव होगी।
निर्यात और MSME को बढ़ावा
- यह पहल भारत के निर्यात बढ़ाने के लक्ष्य के अनुरूप है, विशेष रूप से MSME, स्टार्टअप, कारीगरों और छोटे उत्पादकों के लिए।
- विश्वसनीय और किफायती वैश्विक लॉजिस्टिक्स समाधान मिलने से भारतीय व्यवसायों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान होगी।
- बेहतर लॉजिस्टिक्स ढांचा निर्यात मात्रा बढ़ाने, सेवा गुणवत्ता सुधारने और भारतीय उद्यमों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ने में सहायक होगा।


EU ने ईरान के IRGC को आतंकवादी ग्रुप क्य...
भारत 10 साल बाद अरब देशों के विदेश मंत्र...
ताइवान अपने स्वयं के पनडुब्बियाँ क्यों ब...

