केंद्र सरकार ने ईरान में जारी संकट को देखते हुए स्थिति पर करीब से नजर रखने एवं संभावित प्रभावों से निपटने के लिए तीन सदस्यीय मंत्री समूह का गठन किया है। इस उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। हालांकि सरकार का कहना है कि अभी देश पर इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा है। बता दें कि सरकार कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रही है और पहले ही तैयारी के मूड में दिख रही है।
कमेटी में कौन कौन शामिल?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलावा इस मंत्री समूह में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी शामिल हैं। विदेश मंत्रालय जहां कूटनीतिक स्तर पर हालात की समीक्षा करेगा, वहीं पेट्रोलियम मंत्रालय वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ने वाले असर का विश्लेषण करेगा। बता दें कि एलपीजी की संभावित कमी या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक स्रोतों और आपूर्ति प्रबंधन पर भी विचार किया जा रहा है।
क्या है कमेटी का मुख्य एजेंडा?
यह कमेटी संकट से निपटने के लिए समन्वय करेगी। इस कमेटी का मुख्य उद्देश्य ईरान संकट के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौती से तुरंत निपटना है। खाड़ी देशों में इस वक्त लाखों भारतीय नागरिक काम कर रहे हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित निकासी की रूपरेखा तैयार करना इस कमेटी की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
ये कमेटी क्यों खास है?
कई इलाकों में एलपीजी सिलेंडरों (LPG Cylinder) की कमी देखने को मिल रही है और लोगों को इस कमी के चलते कठिनाइयों का का सामना भी करना पड़ रहा है। सरकार ने साफ-साफ संकेत दिए हैं कि घरेलू उपभोक्ताओं को किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए अग्रिम तैयारियां की जा रही हैं। तेल कंपनियों को पर्याप्त भंडारण बनाए रखने और वितरण व्यवस्था को सुचारु रखने के निर्देश दिए गए हैं।
भारत के जहाज होर्मुज स्ट्रेट से निकलेंगे
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के अनुसार ईरान ने भारतीय जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की परमिशन दी है। भारत में तेल की बढ़ती किल्लत के बीच ये बड़ी राहत है क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से ज्यादातर जहाज वहां फंसे हुए हैं और ट्रैफिक लगभग बंद हो गया है। इन दोनों जहाजों के निकलने से भारत में तेल की किल्लत कुछ हद तक समाप्त हो जाएगी।


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