HDFC बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने 19 मार्च 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इसके पीछे ‘वैल्यू और एथिक्स’ (मूल्य और नैतिकता) से जुड़े मतभेदों को कारण बताया। उनका यह इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब बैंक HDFC लिमिटेड के साथ अपने बड़े विलय (Merger) के बाद एकीकरण की प्रक्रिया से गुजर रहा है।
अतनु चक्रवर्ती का इस्तीफा: कारण
अतनु चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे में कहा कि पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर कुछ ऐसी प्रक्रियाएं और फैसले हुए, जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थे। हालांकि उन्होंने इन मतभेदों के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी।उनका अचानक इस्तीफा बैंक की आंतरिक कार्यप्रणाली और गवर्नेंस को लेकर सवाल खड़े करता है।
कार्यकाल के दौरान प्रमुख उपलब्धियां
- अतनु चक्रवर्ती के कार्यकाल में HDFC बैंक ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं।
- HDFC बैंक और HDFC लिमिटेड के बीच लगभग $40 बिलियन का विलय
- इस विलय के बाद बैंक देश के सबसे बड़े वित्तीय समूहों में शामिल हुआ
- भारत का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बना
अंतरिम व्यवस्था: केकी मिस्त्री बने चेयरमैन
अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने केकी मिस्त्री को अंतरिम (पार्ट-टाइम) चेयरमैन नियुक्त किया है।
- उनका कार्यकाल 3 महीने (19 मार्च 2026 से) के लिए होगा
- यह व्यवस्था तब तक रहेगी, जब तक बैंक स्थायी चेयरमैन की नियुक्ति नहीं कर लेता
यह घटनाक्रम भारत के बैंकिंग सेक्टर में नेतृत्व और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गया है।


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