हरियाणा के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री नायब सिंह सैनी ने ₹2,23,658 करोड़ के खर्च के साथ हरियाणा बजट 2026-27 पेश किया। यह 2025-26 के लिए ₹2,02,816 करोड़ के रिवाइज़्ड अनुमान से 10.28% ज़्यादा है। बजट में ₹40,293 करोड़ (GSDP का 2.65%) का फिस्कल डेफिसिट प्रोजेक्ट किया गया है। साथ ही AI, एग्रीकल्चर, महिला एम्पावरमेंट, इंडस्ट्रियल ग्रोथ और एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी पर फोकस करने वाला एक बड़ा रोडमैप भी दिया गया है।
वर्ष 2026-27 के लिए कुल ₹2,23,658.17 करोड़ का बजट पेश किया, जो कि 2025-26 के मुकाबले ₹2,02,816.66 करोड़ यानी 10.28% अधिक रहा। इस बजट में राजकोषीय घाटा ₹40,293.17 करोड़ जो GDP का 2.65%, राजस्व घाटा 0.87%, प्रभावी राजस्व घाटा 0.41%, पूंजीगत व्यय 1.86%, प्रभावी पूंजीगत व्यय 2.32% है।
बजट के मुख्य नंबर
सरकार ने 2047 तक हरियाणा को एक ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने के अपने लक्ष्य को दोहराया।
हरियाणा AI मिशन 2026 का मकसद राज्य को टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इकॉनमी के तौर पर बनाना है।
हरियाणा बजट 2026-27 में महिलाओं के स्वास्थ्य और रोजगार को विशेष प्राथमिकता दी गई है। कार्यस्थल पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ₹5 करोड़ का वर्कप्लेस सेफ्टी फंड स्थापित किया गया है। 14–15 वर्ष आयु वर्ग की 3 लाख बालिकाओं के लिए एचपीवी (HPV) टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। प्रत्येक जिला और उप-मंडल अस्पताल में “स्वस्थ महिला सशक्त परिवार” क्लीनिक स्थापित किए जाएंगे, ताकि महिलाओं को समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें। स्थानीय युवाओं को रोजगार देने पर नियोक्ताओं को दी जाने वाली सब्सिडी ₹48,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष कर दी गई है।
कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए दलहन, तिलहन और कपास (धान को छोड़कर) पर ₹2,000 प्रति एकड़ का बोनस दिया जाएगा। देशी कपास पर प्रोत्साहन राशि ₹3,000 से बढ़ाकर ₹4,000 प्रति एकड़ कर दी गई है। प्रमाणित जैविक किसानों को ₹10,000 प्रति एकड़ वार्षिक अनुदान मिलेगा। 8 लाख ट्यूबवेल की गुणवत्ता जांच के लिए तीन वर्षीय योजना लागू की जाएगी। साथ ही किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और ग्रामीण हाट मंडियों को मजबूत किया जाएगा तथा बागवानी बीमा योजना के तहत मुआवजा बढ़ाया जाएगा।
हरियाणा सरकार ने बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तीसरी विद्युत वितरण कंपनी – हरियाणा एग्री डिस्कॉम – के गठन की घोषणा की है। यह नई कंपनी 5,084 कृषि फीडरों और लगभग 7.12 लाख कृषि उपभोक्ताओं को सेवा प्रदान करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना तथा कृषि क्षेत्र के लिए विशेष दक्षता विकसित करना है। यह सुधार कृषि बिजली वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के पुनरुद्धार के लिए ₹500 करोड़ का सशक्तिकरण कोष स्थापित किया जाएगा। “मेक इन हरियाणा” नीति के अंतर्गत ब्लॉक आधारित वर्गीकरण को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है, जिससे उद्योगों को अधिक लचीलापन मिलेगा। न्यूनतम वेतन को ₹11,257 से बढ़ाकर ₹15,200 प्रति माह करने पर निर्णय लंबित है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में मॉडल परीक्षा केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनमें पहला केंद्र कुरुक्षेत्र में 25 दिसंबर 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य है।
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