भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के लिए राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) के अनुपातों में संशोधन किया है। यह बदलाव सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की नई श्रृंखला लागू होने के बाद किया गया है, जिसमें 2022-23 को नया आधार वर्ष बनाया गया है। संशोधित आंकड़े संसद में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा साझा किए गए। नए आंकड़ों के अनुसार FY23 के लिए राजकोषीय घाटा GDP का 6.7%, FY24 के लिए 5.7% और FY25 के लिए 4.9% निर्धारित किया गया है।
सरकार ने GDP के अनुमान की नई श्रृंखला जारी की है, जिसमें 2011-12 के पुराने आधार वर्ष की जगह अब 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है। आधार वर्ष को अपडेट करने से अर्थव्यवस्था की संरचना, उत्पादन पैटर्न और उपभोग प्रवृत्तियों में आए बदलावों को बेहतर तरीके से दर्शाया जा सकता है।
नया आधार वर्ष भारत की आर्थिक गतिविधियों का अधिक सटीक चित्र प्रस्तुत करता है और इससे नीति निर्माताओं को विकास दर तथा राजकोषीय संकेतकों का बेहतर आकलन करने में मदद मिलती है। राष्ट्रीय आय के आंकड़ों को अद्यतन बनाए रखने के लिए इस प्रकार के संशोधन समय-समय पर किए जाते हैं।
GDP के आधार वर्ष में बदलाव के बाद राजकोषीय घाटा अनुपातों में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। संशोधित GDP आंकड़ों के आधार पर इन अनुपातों की पुनर्गणना की गई है।
नए आंकड़े इस प्रकार हैं:
पहले के अनुमान के अनुसार FY23 के लिए 6.4%, FY24 के लिए 5.63% और FY25 के लिए 4.8% का अनुमान लगाया गया था, जो पुनर्गणना के बाद थोड़ा बढ़ गया है।
सरकार ने तीनों वित्त वर्षों के लिए राजकोषीय घाटे की कुल राशि भी साझा की है। यह राशि सरकार के कुल व्यय और कुल प्राप्तियों (उधार को छोड़कर) के बीच का अंतर दर्शाती है।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकार समय के साथ राजकोषीय घाटे को धीरे-धीरे कम करने का प्रयास कर रही है।
नए आधार वर्ष 2022-23 के साथ सरकार ने नाममात्र GDP के अनुमान भी अपडेट किए हैं। नाममात्र GDP अर्थव्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मौजूदा कीमतों पर कुल मूल्य को दर्शाता है।
नई श्रृंखला के अनुसार:
ये अपडेटेड आंकड़े राजकोषीय घाटे जैसे आर्थिक संकेतकों की गणना के लिए अधिक सटीक आधार प्रदान करते हैं।
राजकोषीय घाटा वह स्थिति होती है जब किसी सरकार का कुल व्यय उसकी कुल आय (उधार को छोड़कर) से अधिक हो जाता है। यह दर्शाता है कि सरकार को अपने खर्चों को पूरा करने के लिए एक वित्तीय वर्ष में कितना उधार लेना पड़ता है। राजकोषीय घाटा सरकार की वित्तीय स्थिति और राजकोषीय अनुशासन का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।
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