वैश्विक अनुसंधान और विकास (R&D) व्यय ने एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) द्वारा जारी ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2025 के अनुसार, वर्ष 2024 में कुल वैश्विक R&D खर्च बढ़कर 2.87 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें लगभग 3% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि चीन ने संयुक्त राज्य अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा R&D खर्च करने वाला देश बन गया है। वहीं, भारत ने भी अपनी स्थिति मजबूत करते हुए R&D खर्च के मामले में शीर्ष 10 देशों में स्थान हासिल किया है, जो नवाचार, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में देश की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
वैश्विक R&D खर्च का दीर्घकालिक रुझान
वर्ष 2000 के बाद से वैश्विक अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर होने वाला खर्च लगभग तीन गुना हो चुका है, जो नवाचार-आधारित विकास के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। वर्तमान में एशिया वैश्विक R&D व्यय का लगभग 45% हिस्सा वहन करता है, जो पारंपरिक पश्चिमी प्रभुत्व से हटकर एक बड़े संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। उभरती अर्थव्यवस्थाएं विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में लगातार निवेश बढ़ा रही हैं। यह वैश्विक रुझान दिखाता है कि अब देश केवल प्राकृतिक संसाधनों या विनिर्माण क्षमता के आधार पर नहीं, बल्कि अनुसंधान क्षमताओं के जरिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
R&D खर्च में चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ा
वर्ष 2024 में चीन दुनिया का सबसे बड़ा R&D खर्च करने वाला देश बनकर उभरा, जिसने अनुसंधान एवं विकास पर 785.9 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए। यह आंकड़ा वर्ष 2000 की तुलना में लगभग 20 गुना वृद्धि को दर्शाता है, जिससे चीन वैश्विक R&D हिस्सेदारी में 23 प्रतिशत अंक से अधिक की बढ़त के साथ सबसे बड़ा लाभार्थी बन गया है। यह उछाल उन्नत विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों पर चीन के निरंतर फोकस को दर्शाता है, जिसने उसे एक वैश्विक नवाचार महाशक्ति के रूप में स्थापित किया है।
संयुक्त राज्य अमेरिका दूसरे स्थान पर फिसला
वर्ष 2024 में अनुसंधान एवं विकास (R&D) खर्च के मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका 781.8 अरब अमेरिकी डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहा। हालांकि पिछले 24 वर्षों में अमेरिका का R&D खर्च दोगुना हुआ है, लेकिन वैश्विक R&D में उसकी हिस्सेदारी 9.7 प्रतिशत अंक घट गई है। अत्याधुनिक शोध में अमेरिका अब भी अग्रणी बना हुआ है, परंतु यह सापेक्ष धीमापन एशिया और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से बढ़ती प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है, जो नवाचार और प्रौद्योगिकी नेतृत्व को लेकर वैश्विक परिदृश्य को तेजी से बदल रही हैं।
जापान, यूरोप और उभरती अर्थव्यवस्थाएं
R&D खर्च के मामले में जापान तीसरे स्थान पर रहा, हालांकि उसकी भी वैश्विक हिस्सेदारी में गिरावट देखी गई। जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस जैसे यूरोपीय देश अब भी प्रमुख R&D निवेशक हैं, लेकिन वैश्विक कुल खर्च में उनका अनुपात घटा है। इसके विपरीत भारत, तुर्किये, सऊदी अरब और थाईलैंड जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की हिस्सेदारी बढ़ी है। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि नवाचार क्षमता अब कुछ गिने-चुने विकसित देशों तक सीमित न रहकर विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक रूप से फैल रही है।
वैश्विक R&D खर्च में भारत की स्थिति
वर्ष 2024 में भारत वैश्विक अनुसंधान एवं विकास (R&D) खर्च में सातवें स्थान पर रहा, जहां कुल 75.7 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया गया। भले ही यह चीन के R&D खर्च का लगभग दसवां हिस्सा हो, लेकिन वर्ष 2000 के 20.8 अरब डॉलर की तुलना में यह तीन गुना से अधिक वृद्धि को दर्शाता है। भारत में यह निरंतर बढ़ोतरी नवाचार, स्टार्टअप इकोसिस्टम, उच्च शिक्षा और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों पर बढ़ते फोकस का परिणाम है। हालांकि भारत अभी शीर्ष R&D खर्च करने वाले देशों से पीछे है, लेकिन निवेश की यह मजबूत प्रवृत्ति विज्ञान और प्रौद्योगिकी में दीर्घकालिक संभावनाओं का संकेत देती है।
R&D खर्च के आधार पर शीर्ष 10 देश (2024–25)
| रैंक | देश | R&D खर्च (अमेरिकी डॉलर) |
| 1 | चीन | 785.9 अरब डॉलर |
| 2 | संयुक्त राज्य अमेरिका | 781.8 अरब डॉलर |
| 3 | जापान | 186.0 अरब डॉलर |
| 4 | जर्मनी | 132.2 अरब डॉलर |
| 5 | दक्षिण कोरिया (कोरिया गणराज्य) | 126.4 अरब डॉलर |
| 6 | यूनाइटेड किंगडम | 86.5 अरब डॉलर |
| 7 | भारत | 75.7 अरब डॉलर |
| 8 | फ्रांस | 65.8 अरब डॉलर |
| 9 | तुर्किये | 43.2 अरब डॉलर |
| 10 | ब्राज़ील | 38.4 अरब डॉलर |
ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII) क्या है?
ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII) विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (World Intellectual Property Organization – WIPO) द्वारा प्रकाशित की जाने वाली एक वार्षिक रैंकिंग है। यह देशों के नवाचार प्रदर्शन का आकलन करता है।
इस सूचकांक में नवाचार इनपुट्स जैसे अनुसंधान एवं विकास (R&D) खर्च, शिक्षा व्यवस्था, संस्थागत ढांचा और नीति वातावरण, तथा नवाचार आउटपुट्स जैसे पेटेंट, वैज्ञानिक प्रकाशन और उच्च-प्रौद्योगिकी उत्पादन को शामिल किया जाता है।
GII का व्यापक रूप से उपयोग सरकारों, नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं द्वारा किसी देश की नवाचार क्षमता, तकनीकी प्रगति और नीतिगत प्रभावशीलता को समझने के लिए किया जाता है।


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