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सरकार ने चुनावी बॉन्ड की 30वीं किस्त को दी मंजूरी

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सरकार ने चुनावी बांड की 30वीं किस्त को मंजूरी दे दी है। राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाने के प्रयासों के तहत राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले नकद चंदे के विकल्प के रूप में चुनावी बांड की व्यवस्था की गई है। चुनावी बांड की की पहली किस्त की बिक्री मार्च 2018 में हुई थी।

वित्त मंत्रालय ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि चुनावी बांड की 30वीं किस्त की बिक्री दो जनवरी से 11 जनवरी तक होगी। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) को अपनी 29 अधिकृत शाखाओं के माध्यम से चुनावी बांड जारी करने और उन्हें भुनाने के लिए अधिकृत किया गया है।

चुनावी बांड एसबीआई जारी करता है

चुनावी बांड को पात्र राजनीतिक दल द्वारा केवल अधिकृत बैंक के बैंक खाते के माध्यम से भुनाया जाता है। एसबीआइ चुनावी बांड जारी करने वाला एकमात्र अधिकृत बैंक है। अधिकृत एसबीआइ शाखाओं में बेंगलुरु, लखनऊ, शिमला, देहरादून, कोलकाता, गुवाहाटी, चेन्नई, पटना, नई दिल्ली, चंडीगढ़, श्रीनगर, गांधीनगर, भोपाल, रायपुर और मुंबई शामिल हैं।

 

समय सीमा ये है

वित्त मंत्रालय ने कहा कि चुनावी बांड जारी होने की तारीख से 15 दिनों के लिए वैध होंगे। यदि वैधता अवधि समाप्त होने के बाद बांड जमा किया जाता है, तो राजनीतिक दल को कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।

 

एक प्रतिशत वोट

मंत्रालय ने कहा कि पंजीकृत राजनीतिक दल जिन्होंने पिछले लोकसभा या विधानसभा चुनावों में कम से कम एक प्रतिशत वोट हासिल किए हैं, वे चुनावी बांड के माध्यम से धन प्राप्त करने के पात्र हैं। चुनावी बांड भारतीय नागरिकों या देश में स्थापित संस्थाओं द्वारा खरीदे जा सकते हैं।

 

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FAQs

चुनावी बांड क्या होता है?

इलेक्टोरल बॉन्ड राजनीतिक दलों को चंदा देने का एक वित्तीय ज़रिया है. यह एक वचन पत्र की तरह है जिसे भारत का कोई भी नागरिक या कंपनी भारतीय स्टेट बैंक की चुनिंदा शाखाओं से ख़रीद सकता है और अपनी पसंद के किसी भी राजनीतिक दल को गुमनाम तरीक़े से दान कर सकता है.