नए सुधारों से ऑटोमोबाइल क्षेत्र को बड़ा लाभ मिला है। छोटे पेट्रोल और डीज़ल कारें, हाइब्रिड वाहन, 350 सीसी तक की मोटरसाइकिलें, तिपहिया वाहन तथा ट्रक और एम्बुलेंस जैसे वाणिज्यिक वाहन, जिन पर पहले 28% कर लगता था, अब केवल 18% जीएसटी के दायरे में आएंगे। इससे वाहनों की कीमतें घटने और ऑटो सेक्टर में माँग बढ़ने की उम्मीद है। इसी तरह, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएँ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे एयर कंडीशनर, सभी आकार के टेलीविज़न, डिशवॉशिंग मशीन, मॉनिटर और प्रोजेक्टर को भी 28% से घटाकर 18% स्लैब में लाया गया है। यह निर्णय घरेलू माँग को बढ़ावा देने और विनिर्माण उद्योग को समर्थन देने के उद्देश्य से लिया गया है।
आवश्यक वस्तुओं पर दरों में कटौती से होने वाले राजस्व घाटे को संतुलित करने के लिए जीएसटी परिषद ने पाप और विलासिता वस्तुओं पर 40% का नया स्लैब बनाया। इस श्रेणी में पान मसाला, गुटखा, सिगरेट, बीड़ी, शीतल पेय, कैफीन युक्त ड्रिंक्स, कार्बोनेटेड फ्रूट जूस, छोटे वाहनों की सीमा से ऊपर की लग्ज़री कारें, 350 सीसी से ऊपर की मोटरसाइकिलें, नौकाएँ, निजी उपयोग के लिए विमान और रिवॉल्वर-पिस्तौल जैसे हथियार शामिल हैं। इसके अलावा कैसीनो, सट्टेबाज़ी, जुआ, रेस क्लब, ऑनलाइन गेमिंग और बुकमेकर के लाइसेंस पर भी 40% जीएसटी लगेगा। यह उच्च दर सुनिश्चित करती है कि विलासिता और हानिकारक वस्तुएँ राजस्व का प्रमुख स्रोत बनी रहें, जबकि आम परिवार प्रभावित न हों।
कुछ क्षेत्रों में जीएसटी दरें बढ़ाई गईं। उदाहरण के लिए, कोयला, लिग्नाइट और पीट, जिन पर पहले 5% कर लगता था, अब 18% के स्लैब में लाए गए हैं, जिससे कोयले पर आधारित उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। कागज़ क्षेत्र में केमिकल वुड पल्प और विभिन्न पेपरबोर्ड को 12% से बढ़ाकर 18% कर दायरे में लाया गया। इसी तरह वस्त्र क्षेत्र में ₹2,500 से अधिक कीमत वाले परिधानों और रजाइयों को 12% से बढ़ाकर 18% किया गया। ये बदलाव उद्योग-विशिष्ट लागत तो बढ़ा सकते हैं, लेकिन विसंगतियाँ दूर करने और सरकारी राजस्व बढ़ाने के लिए आवश्यक माने गए हैं।
दर संशोधनों से आगे बढ़ते हुए, परिषद ने कई अनुपालन सुधारों की घोषणा की। अब कम जोखिम वाले आवेदकों को मात्र तीन दिनों में स्वचालित जीएसटी पंजीकरण मिलेगा, जिससे लगभग 96% नए व्यवसायों को लाभ होगा। रिफंड प्रक्रिया भी सरल की गई है, जिसके तहत नवंबर 2025 से स्वचालित डेटा विश्लेषण के आधार पर 90% प्रावधिक रिफंड दिए जाएंगे। निर्यातकों को भी कर वापसी के लिए सीमा समाप्त कर दी गई है, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए अनुपालन आसान होगा।
परिषद ने पुष्टि की कि वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) वर्ष 2025 के अंत तक काम करना शुरू कर देगा। जीएसटीएटी की प्रधान पीठ राष्ट्रीय अग्रिम निर्णय अपीलीय प्राधिकरण के रूप में भी कार्य करेगी। अपीलें 30 सितंबर 2025 तक दाखिल करनी होंगी, सुनवाई 31 दिसंबर 2025 से शुरू होगी और लंबित अपीलें 30 जून 2026 तक दाखिल करनी होंगी। परिषद ने सीजीएसटी की धारा 15 और 34 में छूट और क्रेडिट नोट से संबंधित संशोधन भी किए, ताकि अधिक स्पष्टता लाई जा सके और विवाद कम हों।
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