केंद्र सरकार ने पीएफ खाताधारकों के लिए ऑटो-सेटलमेंट की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया

केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार, 25 जून 2025 को घोषणा की कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने एडवांस क्लेम की ऑटो-सेटलमेंट सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी है। अब EPFO सदस्य पूर्व-स्वीकृत कारणों के तहत ₹5 लाख तक की राशि तीन कार्यदिवसों के भीतर, बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के, प्राप्त कर सकते हैं।

उद्देश्य: आपात स्थिति में तेज फंड वितरण

मांडविया ने कहा, “EPFO ने एडवांस क्लेम की ऑटो-सेटलमेंट सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी है ताकि आपातकालीन या अनपेक्षित वित्तीय ज़रूरतों में तेज़ फंड उपलब्ध हो सके।”

यह निर्णय कर्मचारी लाभ और सामाजिक सुरक्षा के डिजिटलीकरण तथा पारदर्शिता को बढ़ावा देने के सरकार के बड़े लक्ष्य का हिस्सा है।

पृष्ठभूमि: ऑटो-सेटलमेंट सुविधा का विकास

EPFO ने COVID-19 महामारी के दौरान यह ऑनलाइन ऑटो-सेटलमेंट प्रणाली शुरू की थी, जिससे सदस्यों को मेडिकल इमरजेंसी के लिए तुरंत पैसा मिल सके।

बाद में इसमें अन्य ज़रूरतें भी जोड़ी गईं:

  • बीमारी

  • शिक्षा

  • विवाह

  • आवास

सभी क्लेम पूरी तरह डिजिटल माध्यम से प्रोसेस किए जाते हैं, जिससे पारदर्शिता, तेज़ प्रक्रिया और मानवीय पक्षपात की संभावना समाप्त होती है।

ऑटो-सेटल्ड क्लेम में भारी वृद्धि

मांडविया द्वारा साझा किए गए आंकड़े इस डिजिटल बदलाव को दर्शाते हैं:

  • FY 2024-25 में 2.34 करोड़ एडवांस क्लेम ऑटो-सेटल हुए, जो FY 2023-24 के 89.52 लाख से 161% अधिक हैं।

  • FY 2025-26 के पहले 2.5 महीनों में ही 76.52 लाख क्लेम ऑटो-सेटल हो चुके हैं — यह अब तक प्रोसेस हुए कुल एडवांस क्लेम का 70% हिस्सा है।

  • ऑटो-सेटल क्लेम का हिस्सा FY24 में 31% था, जो FY25 में बढ़कर 59% हो गया।

यह प्रगति EPFO की डिजिटल गवर्नेंस, सदस्य-केन्द्रित सुधारों और तेज़ भुगतान प्रणाली की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

प्रभाव: बेहतर पहुंच और सदस्य विश्वास में वृद्धि

₹5 लाख की नई सीमा लाखों EPFO सदस्यों को लाभ पहुंचाएगी, खासकर मेडिकल इमरजेंसी, उच्च शिक्षा जैसे हालातों में।

यह कदम सरकार के इन लक्ष्यों के अनुरूप है:

  • सेवायुक्त और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सशक्त बनाना

  • भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करना

  • लोक सेवाओं की डिलीवरी को आधुनिक बनाना

EPFO का यह ऑटोमेशन मॉडल अब अन्य वित्तीय और सामाजिक संस्थानों के लिए एक मानक (बेंचमार्क) बन गया है, जो प्रक्रिया में देरी और मैनुअल निर्भरता को कम करना चाहते हैं।

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vikash

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