देशभर में आज यानी 21 मार्च को ईद मनाई जा रही है। ईद‑उल‑फितर इस्लाम धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस पर्व को मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार रमजान के पाक महीने के खत्म होने पर मनाया जाता है। आज खुशी और भाईचारे का पर्व ईद-उल-फितर बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। आज लोग मस्जिदों में नमाज़ अदा करते हैं, गले मिलते हैं और एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हैं।
ईद के दिन की शुरुआत
ईद के दिन की शुरुआत खास नमाज़ से होती है, जिसे ‘ईद की नमाज़’ कहा जाता है। इसके साथ ही आज के दिन जकात और फितरा देना भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ईद-उल-फितर इस्लाम धर्म का बेहद खास त्योहार माना जाता है। पूरे महीने रोजे रखने के बाद जब नया चांद दिखाई देता है, तब शव्वाल महीने की शुरुआत होती है और उसी के पहले दिन ईद मनाई जाती है। इस दिन सुबह लोग ईद की नमाज अदा करते हैं और इसके साथ ही रोजों का सिलसिला समाप्त हो जाता है।
इस्लाम धर्म का बेहद खास त्योहार
ईद-उल-फितर इस्लाम धर्म का बेहद खास त्योहार माना जाता है। पूरे महीने रोजे रखने के बाद जब नया चांद दिखाई देता है, तब शव्वाल महीने की शुरुआत होती है और उसी के पहले दिन ईद मनाई जाती है। इस दिन सुबह लोग ईद की नमाज अदा करते हैं और इसके साथ ही रोजों का सिलसिला समाप्त हो जाता है।
ईद-उल-फितर का खास महत्व
ईद के मौके पर घरों में तरह-तरह के मीठे पकवान बनाए जाते हैं, खासकर सेवइयां। मेहमानों का स्वागत मिठाई से किया जाता है और बच्चों व अपनों को ईदी दी जाती है। लोग एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की बधाई देते हैं। इस दिन दान का भी खास महत्व होता है, इसलिए जरूरतमंदों की मदद करना बेहद शुभ माना जाता है।
इस्लाम धर्म में ईद-उल-फितर का खास महत्व होता है। रमजान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद लोग अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने उन्हें इबादत करने की ताकत दी। मान्यता है कि सच्चे मन से रखे गए रोजों से अल्लाह खुश होते हैं और अपनी रहमत बरसाते हैं। इसी खुशी और आशीर्वाद को ईद-उल-फितर के रूप में मनाया जाता है।
ईद-उल-फितर कैसे मनाई जाती है?
ईद के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर साफ-सुथरे और नए कपड़े पहनते हैं और मस्जिद या ईदगाह में जाकर नमाज अदा करते हैं। इसके बाद परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर खुशियां बांटते हैं। घरों में सेवइयां और शीर खुरमा जैसे स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं और एक-दूसरे को मिठाई व तोहफे देकर ईद की मुबारकबाद दी जाती है। यह त्योहार प्यार, भाईचारे और खुशी का संदेश देता है।
ईद-उल-फितर का महत्व
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, रमजान का महीना बहुत पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान पहली बार कुरान शरीफ आई थी। माना जाता है कि इसी दिन से पैगंबर हजरत मुहम्मद के मक्का से मदीना आने के बाद ईद-उल-फितर मनाने की परंपरा शुरू हुई थी। तभी से यह दिन खुशियों के त्योहार के रूप में मनाया जाने लगा।
जकात और फितरा क्या है?
ईद का दिन मुस्लिम समुदाय के लिए बेहद खास होता है। यह दिन जरूरतमंदों के प्रति सहानुभूति और सहायता का संदेश भी देता है। जकात इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक अनिवार्य दान है, जो साहिब-ए-निसाब यानी निर्धारित संपत्ति वाले मुसलमानों द्वारा वर्ष में एक बार अपनी कुल संपत्ति का गरीबों को दिया जाता है। फितरा (Fitra/Zakat-ul-Fitr) रमजान के अंत में ईद की नमाज से पहले दिया जाने वाला एक निश्चित अनिवार्य दान है, ताकि गरीब भी ईद मना सकें।


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