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दिल्ली मेट्रो ने पहली बार स्वदेशी रूप से विकसित ट्रेन नियंत्रण और पर्यवेक्षण प्रणाली की शुरुआत की

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दिल्ली मेट्रो की रेड लाइन पर पहली बार देश में स्वदेशी रूप से विकसित सिग्नलिंग तकनीक की शुरूआत हो गई है। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) के अध्यक्ष मनोज जोशी के द्वारा शास्त्री पार्क में संचालन नियंत्रण केंद्र (ओसीसी) से रेड लाइन पर ट्रेन पर्यवेक्षण प्रणाली आई-एटीएस प्रणाली को औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया। इस दौरान डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक विकास कुमार और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भानु प्रकाश श्रीवास्तव भी मौजूद थे।

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मेट्रो रेल के लिए भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत डीएमआरसी और बीईएल की संयुक्त टीम द्वारा भारत की पहली स्वदेशी स्वचालित आई-एटीएस विकसित की गई है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष मार्च महीने में रेड लाइन पर सिग्नलिंग तकनीक के अंतिम क्षेत्र परीक्षणों का वस्तुतः उद्घाटन किया गया था।

 

प्रमुख बिंदु

  • स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली, पूरी तरह से भारत में निर्मित, DMRC और BEL द्वारा संयुक्त रूप से भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत विकसित की गई थी।
  • i-ATS एक कंप्यूटर-आधारित प्रणाली है जो चलने और रुकने जैसी बुनियादी कार्यप्रणाली सहित ट्रेन संचालन का प्रबंधन करेगी। यह मेट्रो संचालन के लिए विदेशी विक्रेताओं पर मेट्रो की निर्भरता को कम करेगा।
  • मेट्रो रेलवे के लिए सीबीटीसी (संचार आधारित ट्रेन नियंत्रण) आधारित सिग्नलिंग प्रणाली में आई-एटीएस का विकास एक बड़ा कदम है क्योंकि एटीएस (स्वचालित ट्रेन पर्यवेक्षण) सीबीटीसी सिग्नलिंग प्रणाली का एक अनिवार्य घटक है।
  • आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों के हिस्से के रूप में भारत में CBTC तकनीक का निर्माण करने का निर्णय लिया है।
  • आई-एटीएस तकनीक का लचीलापन ही इसे भारतीय रेलवे जैसे अन्य रेल-आधारित प्रणालियों के संचालन के लिए उपयोगी बनाता है। उपयुक्त परिवर्तनों के साथ विभिन्न सिग्नलिंग विक्रेताओं के सिस्टम के साथ काम करने के लिए पर्याप्त रूप से लचीला होने के लिए तकनीक विकसित की गई है।

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FAQs

दिल्ली मेट्रो रेल की शुरुआत कब हुई थी?

24 दिसंबर 2002

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