आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एक हृदयस्पर्शी और सामाजिक रूप से अत्यंत सार्थक घटना देखने को मिली, जब आंध्र विश्वविद्यालय में सड़कों की सफाई करने वाली महिला स्वच्छता कर्मी लक्ष्मम्मा के हाथों राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जीवन पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक विमोचन अपने आप में एक साधारण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समानता, श्रम की गरिमा और समावेशिता का सशक्त संदेश लेकर सामने आया।
इस घटना को भारतीय समाज के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि हर कार्य सम्मान के योग्य है और हर नागरिक समान गरिमा का हकदार है।
इस पुस्तक का शीर्षक “अग्नि सरस्सुलो विकसितिंचिना कमलम् द्रौपदी मुर्मू” है। इस पुस्तक के लेखक यारलगड्डा लक्ष्मी प्रसाद हैं, जो पूर्व सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में विश्व हिंदी परिषद के अध्यक्ष हैं।
इस पुस्तक का शीर्षक प्रतीकात्मक और रूपकात्मक है। यह दर्शाता है कि किस प्रकार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संघर्षों और कठिन परिस्थितियों से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर तय किया—ठीक उसी तरह जैसे अग्नि से भरे जल में भी कमल खिल उठता है।
इस आयोजन की सबसे खास बात इसका स्थल था। किसी भव्य सभागार या औपचारिक मंच के बजाय, पुस्तक का विमोचन आंध्र विश्वविद्यालय परिसर में एक पेड़ के नीचे किया गया। यह असामान्य चयन कार्यक्रम को और अधिक भावनात्मक व अर्थपूर्ण बनाता है। यह सादगी, ज़मीनी जुड़ाव और वास्तविक जीवन से निकटता का प्रतीक है—जो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जीवन-संघर्ष और यात्रा से गहराई से मेल खाता है।
इसके साथ ही, एक स्वच्छता कर्मी द्वारा पुस्तक का विमोचन कराया जाना समाज को एक सशक्त संदेश देता है कि हर श्रम सम्माननीय है और हर व्यक्ति समान गरिमा का अधिकारी है।
लेखक लक्ष्मी प्रसाद ने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जीवन उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो समाज में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, विशेष रूप से—
उन्होंने स्पष्ट किया कि पुस्तक के विमोचन के लिए लक्ष्मम्मा को चुनना एक सचेत और प्रतीकात्मक निर्णय था, जिसका उद्देश्य समाज के मूल मानवीय मूल्यों को सामने लाना था, जैसे—
यह पहल सीधे उन मूल्यों को दर्शाती है जिनका प्रतिनिधित्व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करती हैं—उनकी पृष्ठभूमि, सादगी और आंतरिक शक्ति। यह पुस्तक विमोचन केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि समानता और गरिमा का सामाजिक संदेश भी है।
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