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असम सरकार दरांग राजा की विरासत को संरक्षित करेगी

असम सरकार ने 02 फरवरी 2026 को कोच वंश के दरांग राजाओं की विरासत के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए ₹50 करोड़ की अनुदान राशि देने की घोषणा की। यह घोषणा दरांग जिले में आयोजित महाबीर चिलाराय दिवस समारोह के दौरान की गई। यह कदम असम की समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर की रक्षा करने, स्वदेशी शासकों के योगदान को सम्मान देने और ऐतिहासिक विरासत को पर्यटन तथा सांस्कृतिक गौरव के केंद्र के रूप में विकसित करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कोच वंश की विरासत संरक्षण हेतु असम सरकार की अनुदान घोषणा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दरांग राज्य की कोच वंशीय विरासत के संरक्षण के लिए ₹50 करोड़ की वित्तीय सहायता की घोषणा की है। इस परियोजना के तहत कोच वंश से जुड़े शाही स्थलों, स्मारकों और सांस्कृतिक धरोहरों के पुनर्स्थापन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने दरांग जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) को कार्य तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने जोर दिया कि पुनर्स्थापन कार्य में कोच वंश के ऐतिहासिक महत्व तथा असम के राजनीतिक और सांस्कृतिक विकास में उसके योगदान को सही रूप में दर्शाया जाना चाहिए।

दरांग के राजा और कोच वंश कौन थे

दरांग राज्य पर शासन करने वाला कोच वंश मध्यकालीन असम के सबसे शक्तिशाली राजवंशों में से एक था। प्राचीन कामरूप में पाल वंश के पतन के बाद कोच समुदाय का उदय हुआ। इस राज्य की स्थापना बिस्वा सिंघा ने की थी और महाराज नरनारायण के शासनकाल में यह अपने शिखर पर पहुँचा। कोच वंश ने असम की राजनीतिक सीमाओं, सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक पहचान को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

असम के इतिहास में महावीर चिलाराय की भूमिका

महावीर चिलाराय, महाराज नरनारायण के भ्राता, असम के महानतम सैन्य नायकों में गिने जाते हैं। युद्धभूमि में उनकी तीव्र और बिजली की गति जैसी आक्रमण शैली के कारण उन्हें “चिलाराय” की उपाधि मिली। उन्होंने थल और नौसैनिक बलों से युक्त एक सशक्त व सुव्यवस्थित सेना का निर्माण किया। उनके अभियानों के माध्यम से कोच साम्राज्य का प्रभाव अहोम, कचारी, जयंतिया, त्रिपुरा और सिलहट क्षेत्रों तक फैल गया। ऐतिहासिक गोहाइन कमल अली सड़क उनकी रणनीतिक दूरदर्शिता और प्रशासनिक क्षमता का प्रतीक मानी जाती है।

कोच शासकों के सांस्कृतिक और धार्मिक योगदान

महाराज नरनारायण और चिलाराय के शासनकाल में असम में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन का पुनर्जागरण हुआ। कामाख्या और हयग्रीव माधव जैसे प्रमुख मंदिरों के पुनर्निर्माण से धार्मिक परंपराओं को नया जीवन मिला। इन प्रयासों ने असम की आध्यात्मिक विरासत को सुदृढ़ किया और यह सिद्ध किया कि कोच वंश केवल राजनीतिक शासक ही नहीं, बल्कि संस्कृति के संरक्षक भी थे, जिन्होंने पीढ़ियों तक असमिया पहचान को आकार दिया।

अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएँ

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दरांग राज्य के महाराज कृष्णनारायण की प्रतिमा का अनावरण किया तथा मंगलदोई और गोलाघाट में चिलाराय भवनों का उद्घाटन किया। साथ ही, अमिंगांव में ऑल असम कोच राजबोंगशी संमिलनी के लिए भूमि आवंटन और कार्यालय भवन के निर्माण की घोषणा भी की गई। ये कदम राज्य की स्वदेशी विरासत के संरक्षण और समुदाय की पहचान को सशक्त करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

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