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असम को मिला कुमार भास्कर वर्मा सेतु, पूर्वोत्तर की पहली इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में कई महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिनमें गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्मित कुमार भास्कर वर्मा सेतु तथा डिब्रूगढ़ जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग पर पूर्वोत्तर क्षेत्र की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) शामिल है। ये परियोजनाएँ ₹5,450 करोड़ से अधिक के व्यापक विकास अभियान का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करना, रणनीतिक तैयारियों को मजबूत करना, शहरी गतिशीलता में सुधार करना और क्षेत्रीय विकास को गति देना है।

कुमार भास्कर वर्मा सेतु: गुवाहाटी की कनेक्टिविटी में बदलाव

कुमार भास्कर वर्मा सेतु 2.86 किलोमीटर लंबा, छह-लेन वाला एक्स्ट्राडोज्ड प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (PSC) पुल है, जिसका निर्माण लगभग ₹3,030 करोड़ की लागत से किया गया है। यह पुल गुवाहाटी को उत्तर गुवाहाटी से जोड़ता है और पूर्वोत्तर भारत का पहला एक्स्ट्राडोज्ड पुल है।

इसके शुरू होने से शहर के दोनों हिस्सों के बीच यात्रा समय घटकर मात्र सात मिनट रह जाएगा। यह पुल प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर सहित कई महत्वपूर्ण स्थलों तक बेहतर संपर्क सुनिश्चित करता है।

इस पुल में उन्नत इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग किया गया है, जैसे—

  • फ्रिक्शन पेंडुलम बेयरिंग के साथ बेस आइसोलेशन तकनीक
  • अधिक टिकाऊपन के लिए उच्च-प्रदर्शन स्टे केबल्स

साथ ही, ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम (BHMS) के माध्यम से पुल की संरचना की वास्तविक समय (Real-time) निगरानी संभव है, जिससे इसकी सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होती है।

पूर्वोत्तर का पहला हाईवे इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF)

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिब्रूगढ़ जिले के मोरान बाईपास पर पूर्वोत्तर क्षेत्र की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) का उद्घाटन किया।
  • भारतीय वायु सेना के समन्वय से विकसित यह ELF एक द्वि-उपयोग (Dual-use) अवसंरचना है, जो आपात स्थितियों में सैन्य और नागरिक दोनों प्रकार के विमानों के संचालन में सहायक होगी।
  • उद्घाटन के तुरंत बाद भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों— Sukhoi Su-30MKI और Dassault Rafale —ने इस राष्ट्रीय राजमार्ग खंड पर सफल टेक-ऑफ और लैंडिंग का प्रदर्शन किया। इस ऐतिहासिक क्षण को लगभग एक लाख दर्शकों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा।

रणनीतिक और आपदा-तैयार अवसंरचना

4.2 किलोमीटर लंबा यह प्रबलित कंक्रीट (Reinforced Concrete) राजमार्ग खंड इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर यह एक आपातकालीन रनवे के रूप में कार्य कर सके। यह निम्न क्षमता वाले विमानों को संभाल सकता है—

  • अधिकतम 40 टन वजन तक के लड़ाकू विमान
  • अधिकतम 74 टन टेक-ऑफ वजन वाले परिवहन विमान

विमानों की आवाजाही सुगम बनाने के लिए इस सुविधा में बीच में कोई सेंट्रल डिवाइडर नहीं रखा गया है। संचालन की पूर्ण तैयारी सुनिश्चित करने हेतु फेंसिंग की गई है तथा सड़क किनारे की अस्थायी संरचनाओं को हटाया गया है।

असम के ऊपरी क्षेत्र (Upper Assam) में, भारत-चीन सीमा के निकट स्थित यह ELF भारत की सैन्य तैयारी को मजबूत करता है। यदि डिब्रूगढ़ हवाई अड्डा या चाबुआ वायुसेना स्टेशन उपलब्ध न हो, तो यह एक वैकल्पिक लैंडिंग विकल्प प्रदान करता है।

हाईवे लैंडिंग फैसिलिटी क्यों महत्वपूर्ण हैं

  • राजमार्ग आधारित आपातकालीन लैंडिंग पट्टियाँ लचीलापन और रणनीतिक बढ़त प्रदान करती हैं।
  • स्थायी एयरबेस के विपरीत, ये आपात स्थितियों में अतिरिक्त विकल्प (Redundancy) और संचालन में आश्चर्य तत्व (Operational Surprise) उपलब्ध कराती हैं।
  • पूर्वोत्तर जैसे क्षेत्र, जो प्राकृतिक आपदाओं और रणनीतिक संवेदनशीलताओं के प्रति संवेदनशील है, वहाँ ऐसी सुविधाएँ त्वरित तैनाती क्षमता और आपदा प्रतिक्रिया दक्षता को बढ़ाती हैं।
  • इस प्रकार, यह ELF राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय सहायता उद्देश्यों की भी पूर्ति करता है।

 

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