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राजदूत प्रीति सरन तीन वर्ष के कार्यकाल हेतु संयुक्त राष्ट्र की एक अहम संस्था में पुनर्निर्वाचित

भारत ने अप्रैल 2026 में संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) के तहत आने वाले निकायों के लिए चार अहम चुनावों में निर्विरोध जीत हासिल की है। ये चुनाव ‘एक्लेमेशन’ (acclamation) के ज़रिए हुए, जिसका मतलब है कि बिना किसी विरोध के सर्वसम्मति से मंज़ूरी मिलना। इसकी सबसे बड़ी बात यह रही कि अनुभवी राजनयिक प्रीति सरन को संयुक्त राष्ट्र की एक अहम समिति में फिर से चुन लिया गया। यह उपलब्धि वैश्विक शासन और बहुपक्षीय संस्थानों में भारत की बढ़ती साख और उसके प्रभाव को दर्शाती है।

UN ECOSOC चुनावों में भारत की शानदार जीत

ECOSOC चुनावों में भारत का प्रदर्शन बेहद खास रहा, क्योंकि उसने बिना किसी मुकाबले के चारों पद जीत लिए, जो उसे प्राप्त मज़बूत अंतरराष्ट्रीय समर्थन को दर्शाता है।

वे चार महत्वपूर्ण निकाय जिनमें भारत ने प्रतिनिधित्व हासिल किया है, उनमें शामिल हैं:

  • आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर समिति (CESCR)
  • विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी आयोग (CSTD)
  • गैर-सरकारी संगठनों पर समिति
  • कार्यक्रम और समन्वय समिति (CPC)

यह शानदार जीत देश की बढ़ती कूटनीतिक ताकत और विश्वसनीय वैश्विक छवि को दर्शाती है—विशेष रूप से विकास, प्रौद्योगिकी और शासन के क्षेत्रों में।

प्रीति सरन का पुनर्चयन

CESCR (आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर समिति) में प्रीति सरन का पुनर्चयन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह पद एक व्यक्तिगत विशेषज्ञ के तौर पर संभाला जाता है, न कि किसी सरकारी प्रतिनिधि के रूप में।

श्रीमती सरन के पास दशकों का कूटनीतिक अनुभव है और वह पहले भी इन पदों पर कार्य कर चुकी हैं:

  • विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व)
  • वियतनाम में राजदूत
  • जिनेवा, मॉस्को, काहिरा, ढाका और टोरंटो जैसे शहरों में राजनयिक

CESCR के पिछले सत्रों में उनके नेतृत्व को वैश्विक पहचान मिली है, और इसी वजह से उनका पुनर्चयन भारत की बौद्धिक और कूटनीतिक विश्वसनीयता का एक संकेत माना जा रहा है।

ये UN निकाय क्या करते हैं

आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर समिति (CESCR)

CESCR, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदा (International Covenant) के कार्यान्वयन की निगरानी करती है और यह शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास तथा रोज़गार जैसे आवश्यक मानवाधिकारों की गारंटी देती है।

विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी आयोग (CSTD)

इस समिति ने इस बात पर ध्यान केंद्रित किया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी किस प्रकार सतत विकास को गति प्रदान कर सकते हैं। साथ ही, यह नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और तकनीकी अंतरालों को पाटने से संबंधित वैश्विक चर्चाओं को दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

गैर-सरकारी संगठनों पर समिति

यह समिति उन NGO का मूल्यांकन करती है जो UN के साथ परामर्शदात्री दर्जा प्राप्त करना चाहते हैं, और यह भी सुनिश्चित करती है कि वैश्विक नीति-निर्माण में केवल विश्वसनीय और जवाबदेह संगठन ही भाग लें।

कार्यक्रम और समन्वय समिति (CPC)

CPC, UN के कार्यक्रमों और गतिविधियों की समीक्षा और समन्वय करती है, साथ ही विभिन्न एजेंसियों के बीच कार्यकुशलता, तालमेल और संसाधनों के प्रभावी उपयोग को भी सुनिश्चित करती है।

भारत के लिए यह जीत क्यों मायने रखती है?

ECOSOC के कई निकायों में भारत का निर्विरोध चुनाव केवल एक प्रतीकात्मक घटना नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक रणनीतिक महत्व भी है।

यह भारत की इन क्षमताओं को मज़बूत करता है:

  • वैश्विक विकास नीतियों को प्रभावित करना
  • मानवाधिकारों से जुड़े ढाँचों में योगदान देना
  • प्रौद्योगिकी और स्थिरता पर होने वाली चर्चाओं को दिशा देना

यह एक ज़िम्मेदार और रचनात्मक अंतर्राष्ट्रीय साझेदार के रूप में भारत की भूमिका पर बढ़ते वैश्विक भरोसे का भी संकेत है।

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद के बारे में

  • इसकी स्थापना 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर द्वारा, संयुक्त राष्ट्र के छह मुख्य अंगों में से एक के रूप में की गई थी।
  • यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित आर्थिक, सामाजिक, मानवीय और सांस्कृतिक गतिविधियों के निर्देशन और समन्वय के लिए उत्तरदायी है।
  • निर्णय साधारण बहुमत से लिए जाते हैं। ECOSOC की अध्यक्षता प्रतिवर्ष बदलती है।
  • सदस्य: इसमें 54 सदस्य होते हैं, जिनका चुनाव महासभा द्वारा तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है।
  • मुख्यालय: न्यूयॉर्क (USA)
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