गोल्डमैन सैक्स ने भारत के 2024 और 2025 के जीडीपी विकास पूर्वानुमान को घटाया

गोल्डमैन सैक्स ग्रुप ने साल 2024 और 2025 के लिए भारत के जीडीपी अनुमान को घटाने का फैसला किया है। बैंक ने ये फैसला सरकार के एक्सपेंडिचर में कमी के चलते ये लिया है। गोल्डमैन सैक्स ने 20 बेसिस प्वाइंट की कटौती करते हुए 2024 में जीडीपी के 6.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।

गोल्डमैन सैक्स अगले कैलेंडर ईयर 2025 के लिए अपने जीडीपी अनुमान को घटा दिया है और बैंक का मानना है कि अगले वर्ष 6.4 फीसदी के दर से भारतीय अर्थव्यवस्था ग्रोथ दर्ज करेगी। डाउनग्रेड का मुख्य कारण केंद्र सरकार द्वारा व्यय में कमी और वास्तविक उपभोग वृद्धि की धीमी गति है। इसके अतिरिक्त, बैंकों द्वारा असुरक्षित ऋण पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा सख्त नियमों ने घरेलू ऋण को प्रभावित किया है, जिससे आर्थिक विकास पर और अधिक असर पड़ा है।

गोल्डमैन सैक्स ने 2024 में जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को घटाकर 6.7 फीसदी कर दिया है। जबकि आरबीआई ने 8 अगस्त 2024 को मॉनिटरी पॉलिसी का एलान करते हुए वित्त वर्ष 2024-25 में जीडीपी के 7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है जबकि 2025-26 की पहली तिमाही में 7.1 फीसदी जीडीपी रहने का अनुमान जताया गया है। जबकि बजट से पहले 2023-24 के पेश हुए आर्थिक सर्वे में वित्त वर्ष 2024-25 में जीडीपी 6.5 – 7 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है।

फास्टैग रिचार्ज: RBI ने ऑटो-रिप्लेनिशमेंट के लिए ई-मैंडेट की अनुमति दी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने FASTag को लेकर एक अपडेट की घोषणा की है। RBI ने फास्टैग और नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड को ई-मेंडेट को शामिल करने का निर्णय लिया है। ऐसा होने के बाद अब अगर लोगों के FASTag बैलेंस तय सीमा से नीचे जाने पर अपने आप ही उसमें पैसे ऐड हो जाएंगे। इसका मतलब है कि अब फास्‍टैग यूजर्स को बार-बार फास्टैग रिचार्ज नहीं करने की आवश्‍यकता नहीं होगी। ऐसा कहा जा सकता है कि अब कस्‍टमर्स के लिए फास्‍टैग रिचार्ज करने का झंझट समाप्‍त हो जाएगा।

RBI के ई-मैंडेट फ्रेमवर्क में फास्टैग और NCMC शामिल होने के बाद अगर ग्राहक को फास्टैग को बार-बार रिचार्ज करने का झंझट खत्म हो जाएगा। FASTag में पर्याप्त बैलेंस नहीं होने पर भी गाड़ी टोल प्लाजा पर नहीं रुकेगी। फास्टैग के लिए आपको कभी भी पेमेंट करने की जरूरत पड़ सकती है। लिहाजा बिना किसी निश्चित तय सीमा के पैसे खाते में क्रेडट हो जाएंगे।

ई-मैंडेट क्या है?

ई-मैंडेट यानी भुगतान के लिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से दैनिक, साप्ताहिक, मासिक आदि जैसे निश्चित अवधि वाली सुविधाओं के लिए निश्चित समय पर ग्राहक के खाते में भुगतान स्वयं हो जाता है। इसमें ऐसे फीचर्स और प्लेटफॉर्म्स को जोड़ा जा रहा है, जिनके लिए पेमेंट का कोई समय तय नहीं है जबकि पेमेंट जमा राशि कम होने पर किया जाता है। यह RBI के जरिए शुरू की गई एक डिजिटल पेमेंट सर्विस है, जिसकी शुरुआत साल 2020 से हुई है।

फास्टैग क्या होता है?

यह एक तरह का टैग या स्टिकर होता है। यह गाड़ी की विंडदस्क्रीन पर लगाया जाता है। यह फास्टैग रेडियो फ्रिकेंसी आइडेंटिफिकेशन या RFID तकनीक पर काम करता है। इस स्टिकर के बार-कोड होता है, जिसे टोल प्लाजा पर लगे कैमरे उसे स्कैन कर लेते हैं। वहां, पर टोल फीस अपने आप फास्टैग के वॉलेट से कट जाती है। एक बार खरीदा गया फास्टैग स्टिकर 5 साल के लिए वैलिड होता है यानी आपको उसके 5 साल पूरे होने के बाद बदलवाना या वैलिडिटी बढ़वानी पड़ती है।

गेल और पेट्रॉन भारत में 500 केटीए बायो-एथिलीन संयंत्र स्थापित करेंगे

सरकारी स्वामित्व वाली गैस कंपनी गेल (इंडिया) लि. ने कहा कि उसने भारत में 500 किलो टन प्रति वर्ष बायो-एथिलीन संयंत्र स्थापित करने की संभावना तलाशने के लिए अमेरिकी जैव-ईंधन उत्पादक पेट्रॉन साइंटेक के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

गेल ने एक बयान में कहा कि समझौता ज्ञापन (एमओयू) में दोनों कंपनियों के बीच 50:50 संयुक्त उद्यम में बायो-एथनॉल आधारित संयंत्र स्थापित करने की संभावना तलाशने का प्रावधान है।

गेल देश की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस

गेल देश की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस परिवहन एवं विपणन कंपनी है, जबकि पेट्रॉन एथनॉल, बायो-एथिलीन, जैव-रसायन और विभिन्न जैव-ईंधन परियोजनाओं का उत्पादन करने के लिए बायोमास और अनाज प्रसंस्करण बायोरिफाइनरी परियोजनाएं स्थापित करने में माहिर है।

बयान के मुताबिक, गेल और पेट्रॉन संयुक्त रूप से परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता और वित्तीय संभावनाओं का पता लगाने के लिए व्यवहार्यता अध्ययन करेंगी। दोनों पक्ष परियोजना में निवेश और संयुक्त उद्यम कंपनी बनाने के लिए अपने-अपने प्रबंधन से निवेश अनुमोदन प्राप्त करने का प्रयास करेंगे।

इनकी उपस्थिति में हस्ताक्षर

समझौते पर गेल के कार्यकारी निदेशक (व्यापार विकास और अन्वेषण एवं उत्पादन) सुमित किशोर और पेट्रॉन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी योगी सरीन ने गेल के निदेशक (व्यापार विकास) राजीव कुमार सिंघल की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन भारत में नवीकरणीय गतिविधियों को बढ़ाने और जैव-अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

ओडिशा के मुख्यमंत्री माझी ने सुभद्रा योजना शुरू की

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन माझी ने सुभद्रा योजना का अनावरण किया है, जो भाजपा सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 21 से 60 वर्ष की आयु की एक करोड़ महिलाओं को 50,000 रुपये दिए जाने का वादा किया गया है, जिसका कुल बजट 55,825 करोड़ रुपये है। यह धनराशि 10,000 रुपये की वार्षिक किस्तों में वितरित की जाएगी, जिसे राखी पूर्णिमा और अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 5,000 रुपये की दो किस्तों में विभाजित किया जाएगा।

योजना विवरण

सुभद्रा योजना वित्तीय वर्ष 2024-25 से शुरू होकर 2028-29 तक जारी रहेगी। पात्र महिलाओं को पांच वार्षिक किस्तों में ₹50,000 मिलेंगे, जिसका लाभ राज्य की एक करोड़ महिलाओं को मिलेगा। आधार भुगतान ब्रिज सिस्टम (APBS) के माध्यम से लाभार्थियों के आधार-सक्षम बैंक खातों में सीधे भुगतान किया जाएगा, और सुभद्रा डेबिट कार्ड जारी किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक ग्राम पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय में सबसे अधिक डिजिटल लेनदेन करने वाले 100 लाभार्थियों को ₹500 का प्रोत्साहन दिया जाएगा।

विपक्ष की आलोचना

मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजद) ने सरकार की आलोचना की है कि वह भाजपा के चुनाव घोषणापत्र में उल्लिखित दो वर्षों के भीतर 50,000 रुपये प्रदान करने के अपने वादे को पूरा करने में कथित रूप से विफल रही है।

पात्रता मानदंड

आर्थिक रूप से संपन्न पृष्ठभूमि, सरकारी कर्मचारी या आयकर दाता महिलाओं को इस योजना से बाहर रखा गया है। कार्यान्वयन का उद्देश्य पारदर्शिता लाना और लाभार्थियों के बीच डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करना है।

बंधन बैंक ने महिलाओं के लिए अवनी बचत खाता शुरू किया

बंधन बैंक ने 22 अगस्त 2023 को महिला ग्राहकों के लिए एक विशेष बचत खाता, अवनी का शुभारंभ किया है। बैंक ने अपने 9वें स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर, जो कि 23 अगस्त को है, दो नए उत्पादों का शुभारंभ किया-अवनी और बंधन बैंक्स डिलाइट नामक एक ग्राहक वफादारी उत्पाद।बंधन बैंक एक महिला केंद्रित बैंक है और इसके 3.4 ग्राहकों में से 73% महिलाएं हैं।

अवनी खाते का महत्व

  • बंधन बैंक का अवनी उत्पाद जनता से जमा राशि जुटाने का बैंक का एक प्रयास है। हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बैंकों से नवीन और आकर्षक उत्पादों की पेशकश करके घरेलू बचत जुटाने का आग्रह किया।
  • हाल के दिनों में, भारत में बैंकों की सीएएसए (चालू खाता बचत खाता) जमा में गिरावट देखी गई है क्योंकि भारतीय परिवार बेहतर और आकर्षक रिटर्न के लिए बैंक के जगह शेयर बाजार, सोना और अन्य वित्तीय बाजार उपकरणों में निवेश करना पसंद कर रहे हैं।
  • सीएएसए (CASA) बैंकों के लिए धन का सबसे सस्ता स्रोत है, क्योंकि बैंक चालू खातों पर ब्याज नहीं देते हैं और बचत खातों पर औसतन 3 से 4 प्रतिशत का भुगतान करते हैं।
  • हालाँकि, सीएएसए जमा में गिरावट के कारण, बैंक उच्च ब्याज दर पर धन जुटाने के लिए मजबूर हैं, जिसके परिणामस्वरूप भविष्य में उनकी उधार दरों में भी वृद्धि होगी।
  • आरबीआई चाहता है कि बैंक अपनी ऋण दरें कम करें ताकि उद्योगों आदि को सस्ता ऋण उपलब्ध कराकर आर्थिक विकास दर को बढ़ावा दिया जा सके।

अवनी बचत खाते और बंधन बैंक डिलाइट्स के बारे में

अवनी बचत खाता अपेक्षाकृत संपन्न महिलाओं को लक्षित करता है, क्योंकि इस खाते में न्यूनतम औसत त्रैमासिक शेष राशि 25,000 रुपये है। अवनी खाता अपने ग्राहकों को कई अतिरिक्त सुविधा भी देता है जैसे- 10 लाख रुपये के व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर, मुफ्त हवाई अड्डे के लाउंज एक्सेस और 3.5 लाख रुपये की खोई हुई कार्ड देयता के साथ एक विशेष डेबिट कार्ड प्रदान करता है। इस खाते में खाता धारक को लॉकर किराये पर 25 प्रतिशत की छूट और गोल्ड लोन प्रोसेसिंग फीस पर 50 प्रतिशत की छूट भी मिलती है।

बैंक द्वारा लॉन्च किया गया बंधन बैंक डिलाइट्स एक लॉयल्टी प्रोग्राम है जहां ग्राहक खाते खोलने, कार्ड लेनदेन, फंड ट्रांसफर और अन्य बैंकिंग लेनदेन के लिए लॉयल्टी पॉइंट अर्जित करते हैं। लॉयल्टी पॉइंट्स, जिन्हें डिलाइट पॉइंट्स कहा जाता है, का उपयोग ग्राहकों द्वारा अन्य सामान और सेवाओं को खरीदने के लिए किया जा सकता है।

बंधन बैंक के बारे में

बंधन बैंक की शुरुआत एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के रूप में हुई और बाद में यह एक गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी-माइक्रो फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन (एनबीएफसी-एमएफआई) बन गई। बैंक को आरबीआई से यूनिवर्सल बैंक का लाइसेंस मिला और 23 अगस्त 2015 को यूनिवर्सल बैंक में परिवर्तित हो गया। बंधन बैंक की स्थापना चंद्र शेखर घोष ने किया, जो लंबे समय तक बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी रहे थे। यह एक निजी क्षेत्र का बैंक है।

क्या है BHISHM Cube, जिसे पीएम मोदी ने जेलेंस्की को किया गिफ्ट

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूक्रेन की अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की और सरकार को चार भीष्म (भारत स्वास्थ्य सहयोग हित और मैत्री पहल) क्यूब्स भेंट किए। इस किट को भारत ने खास तौर पर विकासशील देशों को चिकित्सा क्षेत्र में मदद देने के लिए शुरू किए गए प्रोजेक्ट आरोग्य मैत्री के तहत तैयार किया है और इसका नाम भीष्म रखा गया है।

कैसे बनता है भीष्म क्यूब?

इसके तहत दवाइयों, मरहम-पट्टी, इंजेक्शन आदि का एक छोटा 15 इंच का चिकित्सा पैकेट होता है। इस तरह के 36 छोटे चिकित्सा पैकेटों को मिलाकर एक मदर क्यूब बनाया जाता है और दो मदर क्यूब को मिलाकर एक भीष्म क्यूब बनाया जाता है।

एआई की मदद से रियल टाइम मॉनीटरिंग में सक्षम

भीष्म क्यूब में एआई की मदद से रियल टाइम मानीटरिंग संभव है। साथ ही इसके पूरे डाटा का विश्लेषण किया जा सकता है। इसके सॉफ्टवेयर सिस्टम को टैब की मदद से कहीं से भी ऑपरेट किया जा सकता है।

अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस

यह पोर्टेबल अस्पताल अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस है। इसमें एक ऑपरेटिंग थियेटर, एक्स-रे मशीन, रक्त परीक्षण उपकरण, वेंटिलेटर और बंदूक की गोली के घाव, जलन, फ्रैक्चर और गंभीर रक्तस्राव जैसी कऍ चोटों के इलाज के लिए जरूरी सभी चीजें उपलब्ध हैं। यह अस्पताल आपात स्थिति के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

दोनों देशों के बीच हुए चार समझौते

पीएम मोदी और राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई, उसमें भी चिकित्सा व मेडिकल क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ाने को लेकर बात हुई है। दोनों देशों के बीच चार समझौते हुए हैं, जिनमें एक समझौता स्वास्थ्य व ड्रग्स को लेकर है। इससे भारतीय दवाइयों व चिकित्सा उपकरणों को यूक्रेन निर्यात करने की राह आसान होगी।

अन्य समझौते कृषि व खाद्य प्रसंस्करण, भारत की तरफ से सामुदायिक विकास के लिए यूक्रेन को अनुदान देने और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने को लेकर है। दोनों देशों के बीच आर्थिक व प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को लेकर भी सहमति बनी है। इस संबंध में भारत-यूक्रेन के बीच अंतर-सरकारी आयोग का गठन पहले ही हो चुका है और इसकी एक बैठक मार्च, 2024 में हुई थी।

 

डाक विभाग ने फिलैटली को प्रोत्साहित करने के लिए दीन दयाल स्पर्श योजना शुरू की

केंद्रीय संचार मंत्रालय के तहत डाक विभाग ने देश के छात्रों के बीच टिकटों में अनुसंधान और छात्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए दीन दयाल स्पर्श योजना शुरू की है। उत्तर गुजरात क्षेत्र, अहमदाबाद के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने योजना की घोषणा करते हुए कहा कि इस छात्रवृत्ति का उद्देश्य छोटी उम्र से ही बच्चों में डाक टिकट संग्रह का शौक पैदा करना है।

भारतीय डाक विभाग ने डाक टिकट संग्रह को प्रोत्साहन देने और शिक्षा प्रणाली की मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से, विद्यार्थियों के बीच डाक टिकट संग्रह के लिए रुचि पैदा करने के शौक के रूप में टिकटों के प्रति अभिरुचि और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एक डाक टिकट छात्रवृत्ति कार्यक्रम दीन दयाल स्पर्श योजना शुरू की है।

फिलेटली का तात्पर्य

फिलेटली का तात्पर्य डाक टिकटों के संग्रह और अध्ययन से है। एक शौक के रूप में, फिलाटेली में डाक टिकटों को इकट्ठा करना, प्राप्त करना, व्यवस्थित करना, सूचीबद्ध करना, भंडारण करना, प्रदर्शित करना और उन्हें या संबंधित उत्पादों को विषयगत क्षेत्रों में बनाए रखना शामिल है।

दीन दयाल स्पर्श योजना के बारे में

  • दीन दयाल स्पर्श (शौक के रूप में टिकटों में योग्यता और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्ति) योजना एक अखिल भारतीय योजना है जो किसी मान्यता प्राप्त स्कूल के छठी, सातवीं,आठवीं और नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए खुली है। छात्रवृत्ति के लिए केवल उन छात्रों का चयन किया जाएगा जो किसी फिलैटली क्लब के सदस्य हैं या जिनके पास फिलैटली जमा खाता है।
  • फिलैटली को शौक के तौर पर अपनाने वाले छात्रों को अखिल भारतीय स्तर पर 920 छात्रवृत्तियाँ प्रदान की जाएंगी। प्रत्येक डाक सर्कल कक्षा VI, VII, VIII और IX में से प्रत्येक के 10 छात्रों को अधिकतम 40 छात्रवृत्तियाँ प्रदान करेगा।
  • छात्रवृत्ति राशि 6000 रुपये प्रति वर्ष है, और इसका भुगतान त्रैमासिक किया जाएगा। छात्रवृत्ति के लिए चयन एक वर्ष के लिए किया जाएगा, और छात्र योजना के नियमों और शर्तों को पूरा करने के अधीन अगले वर्ष आवेदन कर सकते हैं।
  • एक फिलैटली मेंटर प्रत्येक चयनित छात्र का मार्गदर्शन करेगा। फिलैटली मेंटर स्कूल-स्तरीय फिलैटली क्लब बनाने में मदद करेगा, युवा और महत्वाकांक्षी फिलैटलीवादियों को शौक को आगे बढ़ाने के बारे में मार्गदर्शन प्रदान करेगा और इच्छुक छात्रों की मदद करेगा।

भारत सरकार के DARPG और मलेशिया सरकार के ‘लोक प्रशासन और शासन सुधार के क्षेत्र में सहयोग’ के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार विभाग (डीएआरपीजी) और मलेशिया सरकार के प्रधानमंत्री विभाग के लोक सेवा विभाग के बीच ‘लोक प्रशासन और शासन सुधार के क्षेत्र में सहयोग’ पर पांच वर्षों की अवधि के लिए 20 अगस्त, 2024 से प्रभावी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

एमओयू के आदान-प्रदान के लिए औपचारिक समारोह भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर बिन इब्राहिम की उपस्थिति में 20 अगस्त, 2024 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजित किया गया था।

समझौता ज्ञापन का उद्देश्य

समझौता ज्ञापन का उद्देश्य यह है कि दोनों देश डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिक केंद्रित सेवाएं प्रदान करने; डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सार्वजनिक सेवाओं के प्रभावी वितरण के लिए सरकारी प्रक्रिया का सरलीकरण और रि-इंजिनियरिंग करने; सार्वजनिक सेवाओं के वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने; मानव संसाधन प्रबंधन/नेतृत्व विकास; सार्वजनिक क्षेत्र प्रबंधन और सुधार; लोक शिकायत निवारण तंत्र; और ई-गवर्नेंस/डिजिटल सरकार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहित करने और बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रयास करें।

संयुक्त कार्य समूह की स्थापना

समझौता ज्ञापन के तत्वावधान में सहयोग के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी एक संयुक्त कार्य समूह की स्थापना की जाएगी।

 

डायना पुंडोले: राष्ट्रीय चैम्पियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय महिला रेसर

पुणे की रहने वाली 28 वर्षीय दो बच्चों की माँ डायना पंडोले ने इतिहास रचते हुए एमआरएफ सैलून्स कैटेगरी में चैंपियनशिप खिताब जीता हैं। उन्होंने 2024 के इंडियन नेशनल कार रेसिंग चैंपियनशिप में यह प्रतिष्ठित खिताब हासिल किया है, जिससे वे इस उपलब्धि को हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं। डायना की यह जीत भारतीय मोटरस्पोर्ट्स में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। महिलाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत है, जो उनके साहस और प्रतिभा को दर्शाती है।

निर्णायक जीत और व्यक्तिगत बलिदान

18 अगस्त, 2024 को, अपने जन्मदिन के सप्ताहांत के साथ, डायना की चैंपियनशिप जीत एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर थी। उसका ध्यान बनाए रखने के लिए, उसके कोच ने अस्थायी रूप से उसका सेलफोन रख लिया था, जिसके परिणामस्वरूप जन्मदिन की शुभकामनाएँ नहीं मिल पाईं। हालाँकि, इस बलिदान ने एक विजयी परिणाम दिया, जिसमें डायना ने रेस के बाद फिर से जुड़ने पर दोस्तों, परिवार और समर्थकों द्वारा जश्न मनाया।

चुनौतियों पर विजय

डायना की सफलता का मार्ग संदेह और व्यक्तिगत बाधाओं से भरा था। रेसिंग में उनके स्थान पर सवाल उठाने वालों की शंकाओं का सामना करने के बावजूद – एक ऐसा खेल जो अक्सर महिला प्रतिभा को नकारता है – वह अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों और रेसिंग करियर के बीच संतुलन बनाने में कामयाब रही। अपने बच्चों की देखभाल के लिए टूर्नामेंट मिस करने वाली डायना की दृढ़ता रेसिंग के लिए उनके आजीवन जुनून से प्रेरित थी, जो उनके पिता के साथ फॉर्मूला वन देखने से शुरू हुआ और उन्हें गो-कार्टिंग और प्रतिस्पर्धी रेसिंग की ओर ले गया।

उपलब्धियाँ और अंतर्राष्ट्रीय अनुभव

डायना न केवल एक राष्ट्रीय चैंपियन के रूप में बल्कि भारतीय टूरिंग कारों की मिश्रित श्रेणी में अग्रणी के रूप में भी उभरी हैं, जहाँ वह अनुभवी रेसर्स के बीच पहली और एकमात्र महिला प्रतियोगी थीं। उनके रेसिंग रिज्यूमे में दुबई ऑटोड्रोम, होकेनहाइमिंग और बेल्जियम में F1 सर्किट डे स्पा जैसे प्रतिष्ठित ट्रैक में भागीदारी शामिल है। डेटा विश्लेषण और ड्राइविंग तकनीक परिशोधन के लिए उनका सावधानीपूर्वक दृष्टिकोण उनकी सफलता की कुंजी रहा है।

भारत के केएपीएस-4 परमाणु संयंत्र ने पूर्ण क्षमता प्राप्त कर ली

भारत के गुजरात में काकरापार परमाणु ऊर्जा स्टेशन (केएपीएस) अपने दूसरे 700 मेगावाट परमाणु रिएक्टर, केएपीएस-4 के साथ पूर्ण परिचालन क्षमता पर पहुंच गया है, जिसने 21 अगस्त, 2024 को पूरी शक्ति से काम करना शुरू कर दिया। यह उपलब्धि रिएक्टर के वाणिज्यिक संचालन की शुरुआत 31 मार्च, 2024 को तथा इसकी पहली महत्वपूर्णता 17 दिसंबर, 2023 को होने के बाद प्राप्त हुई है। भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) ने पुष्टि की है कि केएपीएस की चौथी इकाई अपने पूर्ण 700 मेगावाट उत्पादन तक पहुंचने से पहले 90% क्षमता पर काम कर रही थी।

रिएक्टर विवरण

केएपीएस-4 इकाई, एक स्वदेशी 700 मेगावाट दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) है, जो भारत की घरेलू परमाणु प्रौद्योगिकी की सफलता को दर्शाता है। केएपीएस-4 का पूर्ण शक्ति संचालन, इसकी जुड़वां इकाई केएपीएस-3 के साथ, पीएचडब्ल्यूआर डिजाइन की प्रभावशीलता को रेखांकित करता है।

भविष्य की संभावनाएँ

एनपीसीआईएल 2031-2032 तक पूरा होने की योजना वाले समान डिजाइन के 14 अतिरिक्त रिएक्टरों के साथ अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमताओं को आगे बढ़ा रहा है। वर्तमान में, एनपीसीआईएल 8,180 मेगावाट की कुल क्षमता वाले 24 रिएक्टरों का संचालन करता है, जिसमें आठ और रिएक्टर निर्माणाधीन हैं और दस अतिरिक्त रिएक्टर परियोजना-पूर्व चरणों में हैं। इन विकासों से 2031-2032 तक भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता 22,480 मेगावाट तक बढ़ने की उम्मीद है।

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