भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने FASTag को लेकर एक अपडेट की घोषणा की है। RBI ने फास्टैग और नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड को ई-मेंडेट को शामिल करने का निर्णय लिया है। ऐसा होने के बाद अब अगर लोगों के FASTag बैलेंस तय सीमा से नीचे जाने पर अपने आप ही उसमें पैसे ऐड हो जाएंगे। इसका मतलब है कि अब फास्टैग यूजर्स को बार-बार फास्टैग रिचार्ज नहीं करने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसा कहा जा सकता है कि अब कस्टमर्स के लिए फास्टैग रिचार्ज करने का झंझट समाप्त हो जाएगा।
RBI के ई-मैंडेट फ्रेमवर्क में फास्टैग और NCMC शामिल होने के बाद अगर ग्राहक को फास्टैग को बार-बार रिचार्ज करने का झंझट खत्म हो जाएगा। FASTag में पर्याप्त बैलेंस नहीं होने पर भी गाड़ी टोल प्लाजा पर नहीं रुकेगी। फास्टैग के लिए आपको कभी भी पेमेंट करने की जरूरत पड़ सकती है। लिहाजा बिना किसी निश्चित तय सीमा के पैसे खाते में क्रेडट हो जाएंगे।
ई-मैंडेट क्या है?
ई-मैंडेट यानी भुगतान के लिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से दैनिक, साप्ताहिक, मासिक आदि जैसे निश्चित अवधि वाली सुविधाओं के लिए निश्चित समय पर ग्राहक के खाते में भुगतान स्वयं हो जाता है। इसमें ऐसे फीचर्स और प्लेटफॉर्म्स को जोड़ा जा रहा है, जिनके लिए पेमेंट का कोई समय तय नहीं है जबकि पेमेंट जमा राशि कम होने पर किया जाता है। यह RBI के जरिए शुरू की गई एक डिजिटल पेमेंट सर्विस है, जिसकी शुरुआत साल 2020 से हुई है।
फास्टैग क्या होता है?
यह एक तरह का टैग या स्टिकर होता है। यह गाड़ी की विंडदस्क्रीन पर लगाया जाता है। यह फास्टैग रेडियो फ्रिकेंसी आइडेंटिफिकेशन या RFID तकनीक पर काम करता है। इस स्टिकर के बार-कोड होता है, जिसे टोल प्लाजा पर लगे कैमरे उसे स्कैन कर लेते हैं। वहां, पर टोल फीस अपने आप फास्टैग के वॉलेट से कट जाती है। एक बार खरीदा गया फास्टैग स्टिकर 5 साल के लिए वैलिड होता है यानी आपको उसके 5 साल पूरे होने के बाद बदलवाना या वैलिडिटी बढ़वानी पड़ती है।


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