परमाणु ऊर्जा में उछाल: भारत का 100 गीगावाट तक पहुंचने का मार्ग

भारत ने अपनी स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन यात्रा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए महत्वाकांक्षी न्यूक्लियर मिशन की शुरुआत की है, जो टिकाऊ ऊर्जा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित और डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा विस्तृत इस पहल का उद्देश्य 2047 तक 100 गीगावाट (GW) परमाणु ऊर्जा उत्पन्न करना है। इस कदम के तहत, अब तक सरकार के नियंत्रण में रहा परमाणु क्षेत्र निजी क्षेत्र के लिए भी खोला गया है। मिशन का मुख्य फोकस स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) और स्वदेशी परमाणु तकनीक के विकास पर होगा, जिससे भारत 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ सकेगा।

भारत के न्यूक्लियर मिशन की प्रमुख बातें

1. दृष्टिकोण और उद्देश्य

  • लक्ष्य: 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन, जिससे भारत की कुल ऊर्जा जरूरतों का 10% पूरा होगा।
  • स्वच्छ एवं स्थिर ऊर्जा उत्पादन को मजबूत करना।
  • भारत को उन्नत परमाणु तकनीक में वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाना।

2. निजी क्षेत्र के लिए द्वार खुला

  • पहली बार निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भाग लेने की अनुमति।
  • निवेश और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए एक ऐतिहासिक नीतिगत परिवर्तन
  • परमाणु कार्यक्रमों की गोपनीयता की सीमाएं तोड़ने का पहला बड़ा कदम।

3. स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs)

  • 16 मेगावाट (MW) से 300 मेगावाट (MW) क्षमता वाले SMRs विकसित किए जाएंगे।
  • दूरस्थ क्षेत्रों और औद्योगिक समूहों को ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन।
  • पर्यावरण के अनुकूल, स्केलेबल और तुरंत उपयोग योग्य ऊर्जा स्रोत।

4. बजट और अनुसंधान को बढ़ावा

  • 2014 से परमाणु ऊर्जा बजट में 170% वृद्धि।
  • 2024-25 में ₹20,000 करोड़ की राशि से पांच ‘भारत SMRs’ विकसित किए जाएंगे।
  • राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (60-70% गैर-सरकारी वित्त पोषण) परमाणु अनुसंधान को गति देगा।

5. वैश्विक और स्वदेशी सहयोग

  • फ्रांस और अमेरिका के साथ उन्नत परमाणु तकनीक पर साझेदारी।
  • स्वदेशी विकास पर जोर, विशेष रूप से थोरियम-आधारित रिएक्टर्स में।
  • भवानी रिएक्टर और कुडनकुलम परमाणु संयंत्र जैसे विलंबित परियोजनाओं को पुनर्जीवित करना।

6. जलवायु लक्ष्यों में योगदान

  • भारत के 2070 तक नेट-ज़ीरो लक्ष्य को प्राप्त करने में परमाणु ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
  • जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करेगा और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देगा।
  • भारत की वैश्विक हरित ऊर्जा परिवर्तन यात्रा को मजबूती मिलेगी।
सारांश/स्थिर विवरण विवरण
क्यों चर्चा में? परमाणु ऊर्जा वृद्धि: भारत का 100 गीगावाट लक्ष्य
मिशन उद्देश्य 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन
निजी क्षेत्र की भागीदारी परमाणु ऊर्जा को निजी कंपनियों के लिए खोला गया
प्रौद्योगिकी फोकस स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) का विकास
बजट वृद्धि 2014 से परमाणु ऊर्जा फंडिंग में 170% की वृद्धि
2024-25 बजट आवंटन ₹20,000 करोड़ से पाँच ‘भारत SMRs’ विकसित किए जाएंगे
वैश्विक सहयोग फ्रांस, अमेरिका के साथ परमाणु प्रौद्योगिकी साझेदारी
स्वदेशी विकास थोरियम-आधारित रिएक्टर्स और स्थानीय अनुसंधान को बढ़ावा
जलवायु लक्ष्य 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन प्राप्त करना
परियोजनाओं का पुनरुद्धार भवानी रिएक्टर, कुडनकुलम संयंत्र का कार्य तेज़ी से आगे बढ़ाना

विश्व रंगमंच दिवस 2025: रंगमंच की कला और विरासत का जश्न

विश्व रंगमंच दिवस हर वर्ष 27 मार्च को मनाया जाता है। इसे 1961 में अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच संस्थान (ITI) द्वारा शुरू किया गया था ताकि रंगमंच के महत्व को मान्यता दी जा सके। वर्ष 2025 का विषय है “रंगमंच और शांति की संस्कृति”, जो शांति और समझ को बढ़ावा देने में रंगमंच की भूमिका को रेखांकित करता है।

इतिहास
इस दिवस की शुरुआत 1962 में हुई थी। 27 मार्च को “थिएटर ऑफ नेशंस” के उद्घाटन के रूप में चुना गया था। वर्तमान में, 90 से अधिक ITI केंद्र इस दिन को रंगमंच से जुड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के माध्यम से मनाते हैं।

महत्व

  • कला के रूप में रंगमंच को बढ़ावा देना – यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि कहानी कहने, शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम है।

  • सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहित करना – रंगमंच विभिन्न संस्कृतियों, भावनाओं और दृष्टिकोणों को समझने में मदद करता है।

  • सरकारी समर्थन की अपील – यह सरकारों और नीति-निर्माताओं को रंगमंच के सामाजिक और आर्थिक योगदान की याद दिलाता है।

  • प्रदर्शन की शक्ति को उजागर करना – रंगमंच सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने, परंपराओं को चुनौती देने और परिवर्तन लाने का एक प्रभावी माध्यम है।

भारतीय रंगमंच का इतिहास

भारतीय रंगमंच की जड़ें वैदिक काल से जुड़ी हैं और इसका मूल आधार नाट्य शास्त्र है, जो 2000 ईसा पूर्व से लेकर चौथी शताब्दी ईस्वी के बीच लिखा गया था।

भारतीय रंगमंच का विकास

  • वैदिक काल – ऋग्वेद में संवादात्मक शैली में रचित कई भजन और नाटकीय दृश्य मिलते हैं।

  • संस्कृत रंगमंच (2वीं सदी ईसा पूर्व – 10वीं सदी ईस्वी) – भास, कालिदास और शूद्रक जैसे नाटककारों ने समृद्ध साहित्य रचा।

  • क्षेत्रीय लोक रंगमंच – भारत के विभिन्न भागों में पारंपरिक रंगमंच विकसित हुए:

    • जात्रा (बंगाल)

    • नौटंकी (उत्तर प्रदेश)

    • यक्षगान (कर्नाटक)

    • भवाई (गुजरात)

  • सड़क रंगमंच (19वीं सदी मध्य) – सामाजिक जागरूकता और क्रांति का माध्यम बना।

  • ब्रिटिश प्रभाव (1920 के बाद) – यथार्थवादी नाटकों की शुरुआत हुई।

  • स्वतंत्रता के बाद (1947 से वर्तमान) – भारतीय जन नाट्य संघ (IPTA) की स्थापना हुई, जिसने समाज से जुड़े मुद्दों को मंचित किया।

भारत के प्रमुख रंगमंच संस्थान

  • राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), दिल्ली

  • फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII), पुणे

  • सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट (SRFTI), कोलकाता

  • एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविज़न (AAFT), नोएडा

भारतीय रंगमंच की प्रमुख हस्तियां

  • इब्राहिम अल्काज़ी – “भारतीय रंगमंच के जनक”

  • उत्पल दत्त – क्रांतिकारी नाटककार और निर्देशक

  • रवींद्रनाथ टैगोर – भारतीय और पश्चिमी रंगमंच का संगम

  • गिरीश कर्नाड – आधुनिक भारतीय नाट्य लेखन के अग्रदूत

  • पृथ्वीराज कपूर – पृथ्वी थिएटर के संस्थापक

  • बी जयश्री, खालिद चौधरी, मकरंद देशपांडे – भारतीय रंगमंच में महत्वपूर्ण योगदान

रंगमंच से जुड़े प्रमुख अभिनेता

अनुपम खेर, ओम पुरी, शबाना आज़मी, नसीरुद्दीन शाह, परेश रावल, राजकुमार राव, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, इरफ़ान खान, मनोज बाजपेयी और अन्य।

आज भी रंगमंच क्यों महत्वपूर्ण है?

  • विभिन्न दृष्टिकोणों को बढ़ावा देता है – रंगमंच दर्शकों को अलग-अलग दुनियाओं में ले जाता है और विभिन्न पात्रों के प्रति सहानुभूति विकसित करने में मदद करता है।

  • शिक्षा और साक्षरता को प्रोत्साहित करता है – रंगमंच में भाग लेने वाले छात्र अकादमिक रूप से बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

  • सामुदायिकता और एकजुटता को बढ़ावा देता है – रंगमंच साझा अनुभवों के माध्यम से समाज में एकता स्थापित करता है।

  • आलोचनात्मक सोच को विकसित करता है – दर्शकों की तत्काल प्रतिक्रियाएं विश्लेषणात्मक क्षमता को बढ़ाती हैं।

  • समाज का प्रतिबिंब और परिवर्तन का माध्यम है – रंगमंच वास्तविक दुनिया की समस्याओं को दर्शाता और उन पर चर्चा करने के लिए प्रेरित करता है।

  • रचनात्मकता को बढ़ावा देता है – यह कलात्मक अभिव्यक्ति और कल्पनाशक्ति को विकसित करने में सहायक होता है।

  • एक अनूठा अनुभव प्रदान करता है – लाइव प्रदर्शन का रोमांच अप्रतिम और अविस्मरणीय होता है।

  • विभिन्न संस्कृतियों को समझने में सहायक – वैश्विक रंगमंच परंपराओं के संपर्क में आने से दृष्टिकोण व्यापक होता है।

डिजिटल मनोरंजन के युग में भी, लाइव रंगमंच का आकर्षण अद्वितीय बना हुआ है। वास्तविक समय में कलाकारों को अभिनय करते देखना आज भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

RBI ने सिक्किम में 8वीं राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक आयोजित की

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 26 मार्च 2025 को सिक्किम के गंगटोक में 8वीं राज्य स्तरीय समन्वय समिति (SLCC) बैठक आयोजित की। इस बैठक की अध्यक्षता सिक्किम के मुख्य सचिव श्री रवींद्र तेलंग ने की, जबकि इसे RBI के क्षेत्रीय निदेशक श्री थोटंगम जमांग द्वारा आयोजित किया गया। बैठक में RBI, SEBI और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारियों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र अविनियमित जमा योजना (BUDS) अधिनियम के कार्यान्वयन, डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना रहा।

SLCC बैठक के मुख्य बिंदु

अध्यक्षता एवं प्रतिभागी

  • बैठक की अध्यक्षता श्री रवींद्र तेलंग, मुख्य सचिव, सिक्किम ने की।

  • RBI के क्षेत्रीय निदेशक श्री थोटंगम जमांग द्वारा बैठक का आयोजन किया गया।

  • भाग लेने वाले प्रमुख संस्थान: RBI, SEBI, एवं राज्य सरकार के प्रमुख विभाग (कानून, गृह, वित्त, सहकारिता, सूचना एवं जनसंपर्क)।

BUDS अधिनियम का कार्यान्वयन

  • अविनियमित जमा योजना (BUDS) अधिनियम, 2019 के सिक्किम में प्रभावी कार्यान्वयन पर चर्चा।

  • वित्तीय धोखाधड़ी और अवैध जमा योजनाओं पर सख्ती से रोक लगाने की रणनीति।

डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी और रोकथाम

  • हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से दर्ज वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों की समीक्षा।

  • RBI ने डिजिटल धोखाधड़ी के प्रकारों और उन्हें रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियानों पर चर्चा की।

  • सचेत पोर्टल के माध्यम से अविनियमित वित्तीय संस्थाओं की रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित किया गया।

बाजार खुफिया तंत्र एवं भागीदार सहयोग

  • राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों के बीच बाजार खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान।

  • वित्तीय धोखाधड़ी की पहचान और उन्हें नियंत्रित करने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत बनाना।

निवेशक जागरूकता एवं वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम

  • RBI और SEBI ने निवेशक संरक्षण और ग्राहक शिकायत निवारण के लिए जागरूकता कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

  • नागरिकों को डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी और उनके वित्तीय अधिकारों के बारे में शिक्षित करने पर जोर।

  • मुख्य सचिव ने RBI की वित्तीय साक्षरता पहलों और जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना की।

क्यों चर्चा में? सिक्किम में RBI द्वारा आयोजित 8वीं राज्य स्तरीय समन्वय समिति (SLCC) बैठक
आयोजक भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), गंगटोक
तारीख और स्थान 26 मार्च 2025, ताशी लिंग सचिवालय, गंगटोक
अध्यक्ष श्री रवींद्र तेलंग, मुख्य सचिव, सिक्किम
आयोजक (Convenor) श्री थोटंगम जमांग, क्षेत्रीय निदेशक, RBI
प्रतिभागी RBI, SEBI, सिक्किम सरकार के अधिकारी, कानून प्रवर्तन एजेंसियां
मुख्य चर्चाएं BUDS अधिनियम का कार्यान्वयन, वित्तीय धोखाधड़ी, डिजिटल धोखाधड़ी की रोकथाम, बाजार खुफिया साझा करना, निवेशक जागरूकता कार्यक्रम
धोखाधड़ी रिपोर्टिंग हेल्पलाइन 1930
RBI की पहल सचेत पोर्टल (Sachet Portal) द्वारा धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग
निष्कर्ष वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम को मजबूत किया गया और वित्तीय साक्षरता पहलों को बढ़ावा दिया गया

केंद्र सरकार 2025-26 की पहली छमाही में आठ लाख करोड़ रुपये का कर्ज जुटाएगी

केंद्र सरकार वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (H1) में दिनांकित प्रतिभूतियों (Dated Securities) के माध्यम से ₹8 लाख करोड़ जुटाने की योजना बना रही है, ताकि राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को पाटा जा सके। यह वित्त मंत्रालय द्वारा घोषित ₹14.82 लाख करोड़ के कुल सकल बाजार उधारी कार्यक्रम का हिस्सा है। इस उधारी को साप्ताहिक नीलामी के माध्यम से पूरा किया जाएगा, जिसमें ₹10,000 करोड़ के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड (SGrBs) भी शामिल होंगे। FY26 के लिए राजकोषीय घाटे का अनुमान GDP के 4.4% यानी ₹15.68 लाख करोड़ लगाया गया है। सरकार इस वित्तीय कमी को पूरा करने के लिए लघु बचत योजनाओं और अन्य साधनों का भी उपयोग करेगी।

मुख्य बिंदु

  • कुल बाजार उधारी: FY26 में ₹14.82 लाख करोड़।

  • पहली छमाही की उधारी (H1 FY26): ₹8 लाख करोड़ (कुल उधारी का 54%)।

  • प्रतिभूतियों के प्रकार: 3 से 50 वर्षों की विभिन्न परिपक्वता अवधि वाली दिनांकित प्रतिभूतियाँ।

  • सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड (SGrBs): ₹10,000 करोड़ की उधारी योजना में शामिल।

  • राजकोषीय घाटा: FY26 के लिए अनुमानित ₹15.68 लाख करोड़ (GDP का 4.4%)।

  • शुद्ध बाजार उधारी: ₹11.54 लाख करोड़ (दिनांकित प्रतिभूतियों के माध्यम से)।

राजस्व और व्यय

  • कुल प्राप्तियाँ (उधारी को छोड़कर): ₹34.96 लाख करोड़।

  • कुल व्यय: ₹50.65 लाख करोड़।

  • शुद्ध कर प्राप्तियाँ: ₹28.37 लाख करोड़।

साप्ताहिक उधारी नीलामी

  • नीलामी सीमा: प्रति नीलामी ₹25,000 करोड़ से ₹36,000 करोड़।

  • कुल नीलामी: 26 साप्ताहिक नीलामियाँ।

परिपक्वता अवधि के अनुसार बँटवारा

  • 3 वर्ष: 5.3%

  • 5 वर्ष: 11.3%

  • 7 वर्ष: 8.2%

  • 10 वर्ष: 26.2%

  • 15 वर्ष: 14%

  • 30 वर्ष: 10.5%

  • 40 वर्ष: 14%

  • 50 वर्ष: 10.5%

ट्रेजरी बिल (T-Bills) उधारी (Q1 FY26)

  • साप्ताहिक उधारी: ₹19,000 करोड़ प्रति सप्ताह।

    • 91-दिनीय टी-बिल: ₹9,000 करोड़

    • 182-दिनीय टी-बिल: ₹5,000 करोड़

    • 364-दिनीय टी-बिल: ₹5,000 करोड़

वेज़ एंड मीन्स एडवांस (WMA) सीमा

  • H1 FY26 के लिए: ₹1.50 लाख करोड़।

लचीलापन उपाय

सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के साथ परामर्श कर, बाजार की स्थिति के अनुसार प्रतिभूतियों की अधिसूचित राशि, जारी करने की अवधि और उपकरणों के प्रकार (फ्लोटिंग रेट बॉन्ड, मुद्रास्फीति-सूचकांकित बॉन्ड, आदि) में बदलाव कर सकती है।

केंद्र सरकार ने स्वर्ण मुद्रीकरण योजना की बंद

केंद्र सरकार ने 26 मार्च 2025 से गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) के मध्यम और दीर्घकालिक जमा को बंद करने का निर्णय लिया है। यह फैसला बाजार की बदलती परिस्थितियों और योजना के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हालांकि, अल्पकालिक जमा (Short-term Deposits) बैंकों के विवेक पर जारी रहेंगे। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा जमा परिपक्वता तक प्रभावित नहीं होंगे।

मुख्य बिंदु

गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) के बारे में

  • शुरुआत: नवंबर 2015 में निष्क्रिय सोने को औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाने के लिए शुरू की गई।

  • उद्देश्य: भारत के सोना आयात और चालू खाता घाटे को कम करना।

  • संशोधित संस्करण: पहले की गोल्ड डिपॉज़िट स्कीम का उन्नत रूप।

  • डिपॉजिट की पात्रता: घरेलू परिवार, ट्रस्ट और संस्थान बैंक में सोना जमा कर सकते थे।

  • न्यूनतम जमा सीमा: 10 ग्राम कच्चा सोना (बार, सिक्के, आभूषण; पत्थर व अन्य धातु रहित)।

  • अधिकतम सीमा: कोई ऊपरी सीमा नहीं।

तीन प्रकार की जमा योजनाएँ

  1. अल्पकालिक बैंक जमा (STBD): 1-3 वर्ष, बैंक द्वारा प्रबंधित।

  2. मध्यमकालिक सरकारी जमा (MTGD): 5-7 वर्ष, सरकार द्वारा समर्थित।

  3. दीर्घकालिक सरकारी जमा (LTGD): 12-15 वर्ष, सरकार द्वारा समर्थित।

ब्याज दरें

  • अल्पकालिक जमा: ब्याज दर बैंक द्वारा अंतरराष्ट्रीय सोने की लीज दर और बाजार की स्थिति के आधार पर तय की जाती है।

  • मध्यमकालिक जमा: 2.25% वार्षिक (सरकार द्वारा भुगतान)।

  • दीर्घकालिक जमा: 2.5% वार्षिक (सरकार द्वारा भुगतान)।

योजना बंद करने का कारण

  • 26 मार्च 2025 से मध्यम और दीर्घकालिक जमा बंद।

  • अल्पकालिक जमा जारी रहेंगे (बैंकों के निर्णय पर निर्भर)।

  • बाजार की बदलती परिस्थितियों और योजना के प्रदर्शन के कारण बंद करने का फैसला।

  • 26 मार्च 2025 के बाद कोई नई जमा स्वीकार नहीं की जाएगी।

RBI का बयान

  • मौजूदा मध्यम और दीर्घकालिक जमा अपनी परिपक्वता तक जारी रहेंगे।

  • समय से पहले निकासी मौजूदा प्रावधानों के अनुसार संभव।

  • 26 मार्च 2025 के बाद कोई नवीनीकरण नहीं

योजना के तहत संग्रहित सोना

  • कुल जमा (नवंबर 2024 तक): 31,164 किग्रा।

    • अल्पकालिक जमा: 7,509 किग्रा।

    • मध्यमकालिक जमा: 9,728 किग्रा।

    • दीर्घकालिक जमा: 13,926 किग्रा।

  • कुल जमाकर्ता: 5,693 (व्यक्तिगत निवेशक, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF), मंदिर, ट्रस्ट, म्यूचुअल फंड, ETF, कंपनियाँ)।

भारत में अन्य स्वर्ण योजनाओं की स्थिति

  • सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) को भी उच्च लागत के कारण बंद किया गया।

  • बजट 2025-26 में नए गोल्ड बॉन्ड जारी नहीं किए जाएंगे।

  • सरकार ने सोने की मांग बढ़ाने के लिए आयात शुल्क को तर्कसंगत बनाया

  • सोने की कीमतों में 2024 में 41.5% वृद्धि, 25 मार्च 2025 तक ₹90,450 प्रति 10 ग्राम पहुँची।

क्यों चर्चा में? सरकार ने गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम समाप्त की: RBI का मौजूदा जमाओं पर अपडेट
योजना शुरू हुई नवंबर 2015
शुरू करने का कारण सोने के आयात और चालू खाता घाटे को कम करना
जमा के प्रकार अल्पकालिक (1-3 वर्ष), मध्यमकालिक (5-7 वर्ष), दीर्घकालिक (12-15 वर्ष)
न्यूनतम जमा सीमा 10 ग्राम कच्चा सोना
अधिकतम सीमा कोई सीमा नहीं
ब्याज दरें अल्पकालिक: बैंक द्वारा तय, मध्यमकालिक: 2.25% वार्षिक, दीर्घकालिक: 2.5% वार्षिक
कुल जमा (नवंबर 2024 तक) 31,164 किग्रा
अल्पकालिक जमा 7,509 किग्रा
मध्यमकालिक जमा 9,728 किग्रा
दीर्घकालिक जमा 13,926 किग्रा
कुल जमाकर्ता 5,693
सरकार का निर्णय 26 मार्च 2025 से मध्यम और दीर्घकालिक जमा बंद
RBI का मौजूदा जमा पर रुख परिपक्वता तक जारी रहेंगे
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की स्थिति अधिक लागत के कारण बंद
सोने की कीमतों में वृद्धि (2024-25) ₹90,450 प्रति 10 ग्राम (41.5% बढ़ोतरी)

डिजिटल फसल सर्वेक्षण (डीसीएस) प्रणाली: सटीक फसल डेटा संग्रह सुनिश्चित करना

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने डिजिटल फसल सर्वेक्षण (DCS) प्रणाली शुरू की है, जो मोबाइल इंटरफेस के माध्यम से खेतों से प्रत्यक्ष रूप से फसल बोआई का वास्तविक समय में डेटा एकत्र करती है। यह प्रणाली फसल क्षेत्र के सटीक अनुमान को सुदृढ़ बनाकर कृषि उत्पादन के पूर्वानुमान को अधिक विश्वसनीय बनाती है।

मुख्य बिंदु

डिजिटल फसल सर्वेक्षण (DCS) प्रणाली की विशेषताएं

  • वास्तविक समय डेटा संग्रह: मोबाइल इंटरफेस के माध्यम से खेतों से फसल की जानकारी सीधे प्राप्त की जाती है।

  • उन्नत सटीकता: कृषि विश्लेषण के लिए सटीक और अद्यतन डेटा सुनिश्चित करता है।

  • एग्री स्टैक के साथ एकीकरण: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और भारत के अन्य आईटी विनियमों के अनुसार विकसित।

डेटा गोपनीयता और सुरक्षा

  • किसानों के डेटा को केवल उनकी सहमति से एकत्र किया जाता है।

  • डेटा साझा करने की अनुमति केवल अधिकृत संस्थाओं को दी जाती है।

  • संघीय संरचना के तहत राज्य सरकारों को डेटा सेट का नियंत्रण प्राप्त है।

  • एन्क्रिप्शन और सुरक्षित API के माध्यम से डेटा ट्रांसमिशन को सुरक्षित किया जाता है।

  • नियमित सुरक्षा ऑडिट और जोखिम मूल्यांकन किए जाते हैं।

साइबर सुरक्षा उपाय

  • इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) और CERT-In के दिशानिर्देशों का पालन किया जाता है।

  • मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा लागू किया गया है।

किसानों के लिए डिजिटल समावेशन

  • किसान उत्पादक संगठन (FPOs), कृषि सखी और कॉमन सर्विस सेंटर (CSCs) के माध्यम से सहायता प्रदान की जाती है।

  • राज्य-स्तरीय शिविरों के माध्यम से उन किसानों को भी शामिल किया जाता है जिनके पास मोबाइल सुविधा नहीं है।

राज्य किसान रजिस्टर

  • इसमें सभी भूमिधारी किसानों, महिला किसानों को शामिल किया जाता है।

  • राज्य सरकारें अपनी नीतियों के अनुसार बटाईदार और पट्टेदार किसानों को भी जोड़ सकती हैं।

  • यह प्रणाली कृषि पारिस्थितिकी तंत्र में समावेशिता को सुनिश्चित करती है।

क्यों चर्चा में? डिजिटल फसल सर्वेक्षण (DCS) प्रणाली: सटीक फसल डेटा संग्रह सुनिश्चित
उद्देश्य वास्तविक समय में सटीक फसल डेटा संग्रह
प्रौद्योगिकी मोबाइल इंटरफेस, एग्री स्टैक एकीकरण
डेटा सुरक्षा एन्क्रिप्शन, सुरक्षित API, नियमित सुरक्षा ऑडिट
गोपनीयता अनुपालन डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023
राज्य नियंत्रण संघीय संरचना के तहत राज्य डेटा प्रबंधन करते हैं
साइबर सुरक्षा MeitY और CERT-In दिशानिर्देशों का पालन
किसान समावेशन FPOs, CSCs, कृषि सखी, राज्य-स्तरीय शिविर
समावेशिता भूमिधारी, महिला किसान, बटाईदार और पट्टेदार किसान शामिल

राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के 5 वर्ष

भारत का कपड़ा उद्योग राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और नवाचार का केंद्र बन गया है। वैश्विक स्तर पर भारत छठा सबसे बड़ा वस्त्र निर्यातक है, जिसका विश्व वस्त्र निर्यात में 3.9% हिस्सा है। यह क्षेत्र देश की GDP में लगभग 2% का योगदान देता है और 2030 तक $350 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे लगभग 3.5 करोड़ नौकरियां उत्पन्न होंगी। पारंपरिक वस्त्रों के साथ-साथ तकनीकी वस्त्रों (टेक्निकल टेक्सटाइल्स) का बढ़ता उपयोग उद्योग में बदलाव ला रहा है। ये विशेष वस्त्र सौंदर्य से अधिक कार्यक्षमता पर केंद्रित होते हैं और कृषि, स्वास्थ्य, निर्माण, और सुरक्षा सहित 12 प्रमुख क्षेत्रों में उपयोग किए जाते हैं।

तकनीकी वस्त्रों के विकास को गति देने के लिए, सरकार ने 2020 में राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) की शुरुआत की, जिसके लिए 2020-2026 तक ₹1,480 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इस मिशन का उद्देश्य अनुसंधान को मजबूत करना, निर्यात को बढ़ावा देना, कौशल विकास को प्रोत्साहित करना और भारत को तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में वैश्विक नेता बनाना है।

राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) के चार प्रमुख घटक

  1. अनुसंधान, नवाचार और विकास

    • तकनीकी वस्त्रों में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना।

    • नए सामग्री और तकनीकों के विकास के लिए R&D परियोजनाओं को समर्थन।

    • अब तक ₹509 करोड़ की 168 अनुसंधान परियोजनाओं को मंजूरी मिली।

  2. संवर्धन और बाजार विकास

    • विभिन्न उद्योगों में तकनीकी वस्त्रों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।

    • व्यापार शो, प्रदर्शनियों और वैश्विक सहयोग के माध्यम से बाजार संपर्क को मजबूत करना।

  3. निर्यात संवर्धन

    • भारत के तकनीकी वस्त्रों के निर्यात को बढ़ावा देना।

    • समर्पित निर्यात संवर्धन परिषद के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देना।

  4. शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास

    • तकनीकी वस्त्रों में कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम।

    • 50,000 व्यक्तियों को तकनीकी वस्त्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है।

    • शिक्षण संस्थानों में विशेष तकनीकी वस्त्र पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देना।

अब तक इस मिशन के तहत ₹517 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिनमें से ₹393.39 करोड़ अनुसंधान, बाजार विकास, निर्यात और कौशल विकास पर खर्च किए गए हैं।

NTTM के तहत प्रमुख पहलें

  1. GIST 2.0 (इंटर्नशिप सहायता अनुदान योजना)

    • छात्रों और पेशेवरों के लिए व्यावहारिक शिक्षा के अवसर प्रदान करता है।

    • उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।

    • ‘मेक इन इंडिया’ को समर्थन देकर स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहित करता है।

  2. GREAT योजना (नवाचार और उद्यमिता अनुदान)

    • अगस्त 2023 में लॉन्च, जिसका उद्देश्य नई वस्त्र तकनीकों का व्यावसायीकरण करना है।

    • 8 स्टार्टअप को ₹50 लाख की सहायता दी गई है।

    • IIT इंदौर और NIT पटना को ₹6.5 करोड़ विशेष पाठ्यक्रमों के लिए दिए गए।

  3. कौशल विकास कार्यक्रम

    • 50,000 लोगों को तकनीकी वस्त्रों में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य।

    • SITRA, NITRA, SASMIRA जैसे प्रमुख संस्थानों के सहयोग से 12 उद्योग-केंद्रित पाठ्यक्रम।

  4. Technotex 2024 (भारत टेक्स 2024)

    • भारत के तकनीकी वस्त्रों की प्रगति को प्रदर्शित किया गया।

    • 71 नवाचार परियोजनाएं, जिनमें 48 प्रोटोटाइप और 23 सूचना पोस्टर शामिल थे।

तकनीकी वस्त्रों में सफलता की कहानियां

  1. महिना: भारत का पहला लीक-प्रूफ पीरियड अंडरवियर

    • Eicher Goodearth द्वारा विकसित, यह 12 घंटे तक सुरक्षा प्रदान करता है।

    • प्राकृतिक सामग्री से बना, 100 बार धोकर पुनः उपयोग किया जा सकता है, जिससे सैनिटरी पैड और टैम्पोन की आवश्यकता समाप्त होती है।

  2. तमिलनाडु में तकनीकी वस्त्रों का विकास

    • PM MITRA पार्क को विरुधुनगर में स्थापित किया गया।

    • सलेम में एक नया वस्त्र पार्क बनाने की योजना।

    • तकनीकी वस्त्र निवेश के लिए पूंजी अनुदान 2% से बढ़ाकर 6% किया गया, जिससे मशीनरी उन्नयन और आधुनिकीकरण को प्रोत्साहन मिलेगा।

सारांश/आंकड़े विवरण
क्यों चर्चा में? राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के 5 वर्ष पूरे
शुरुआत वर्ष 2020
क्रियान्वयन निकाय वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार
बजट आवंटन ₹1,480 करोड़ (2020-2026)
स्वीकृत अनुसंधान परियोजनाएं 168 परियोजनाएं, ₹509 करोड़ मूल्य की
प्रशिक्षण लक्ष्य 50,000 व्यक्तियों को तकनीकी वस्त्रों में प्रशिक्षित करना
प्रमुख पहलें GIST 2.0, GREAT योजना, कौशल विकास, Technotex 2024
निर्यात संवर्धन समर्पित परिषद द्वारा निर्यात को बढ़ावा
मुख्य लाभार्थी छात्र, स्टार्टअप, वस्त्र उद्योग और अनुसंधान संस्थान
निवेश उपयोग ₹517 करोड़ में से ₹393.39 करोड़ उपयोग
प्रमुख सफलता की कहानियां महिना पीरियड अंडरवियर, तमिलनाडु का तकनीकी वस्त्र निवेश

म्यांमार भूकंप के बाद थाई प्रधानमंत्री ने आपातकाल की घोषणा की

म्यांमार में 28 मार्च 2025 को आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी। इसका केंद्र मंडालय, म्यांमार से 17.2 किमी दूर और 10 किमी की गहराई में स्थित था, जिसकी पुष्टि यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने की। इस भूकंप के झटके थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक तक महसूस किए गए, जिससे शहर में कई इमारतों को नुकसान हुआ और एक निर्माणाधीन गगनचुंबी इमारत ढह गई। इस आपदा के बाद थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैटोंगटार्न शिनवात्रा ने आपातकाल घोषित कर दिया है।

प्रमुख बिंदु

भूकंप के विवरण

  • तीव्रता: 7.7

  • केंद्र बिंदु: मंडालय, म्यांमार से 17.2 किमी दूर

  • गहराई: 10 किमी (USGS के अनुसार)

बैंकॉक में प्रभाव

  • थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैटोंगटार्न शिनवात्रा ने आपातकाल घोषित किया।

  • पूरे शहर में भवनों को संरचनात्मक क्षति पहुँची।

  • उत्तर बैंकॉक में एक 30-मंजिला निर्माणाधीन गगनचुंबी इमारत गिर गई, जिसमें 43 मजदूर फंस गए।

  • भूकंप के झटकों से लोगों में दहशत, कई लोग अपने घरों और दफ्तरों से बाहर भागे।

  • स्विमिंग पूल में पानी उफान मारने लगा, जिससे झटकों की तीव्रता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

आपातकालीन प्रतिक्रिया और बचाव कार्य

  • बैंकॉक में आपातकालीन सेवाएँ पूरी तरह सक्रिय।

  • बचाव दल फंसे हुए मजदूरों को बाहर निकालने में जुटे।

  • प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन जारी।

  • म्यांमार से आधिकारिक क्षति रिपोर्ट का इंतजार।

इस विनाशकारी भूकंप ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। सरकार और राहत एजेंसियाँ स्थिति को नियंत्रित करने और प्रभावित लोगों की सहायता करने के लिए तेजी से कार्य कर रही हैं।

श्रेणी विवरण
क्यों चर्चा में? म्यांमार में भूकंप के बाद थाई पीएम ने आपातकाल घोषित किया
स्थान म्यांमार (केंद्र), बैंकॉक (प्रभावित)
तीव्रता 7.7
गहराई 10 किमी (6.2 मील)
मुख्य घटना बैंकॉक में 30-मंजिला इमारत गिरी
हताहत 43 मजदूर फंसे (बचाव अभियान जारी)
सरकारी कार्रवाई बैंकॉक में आपातकाल घोषित
जन प्रतिक्रिया दहशत, भवनों से बड़े पैमाने पर निकासी

दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय निर्यातक बना भारत

भारत की चाय उद्योग, जो वर्षों से विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रही थी, के लिए 2024 में खुशखबरी आई है। भारतीय चाय बोर्ड द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत 2024 में वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा चाय निर्यातक बन गया है। इसने श्रीलंका को पीछे छोड़ दिया है, जबकि केन्या ने शीर्ष स्थान बरकरार रखा है।

भारत का वैश्विक चाय निर्यात में उछाल

श्रीलंका को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान

  • भारत ने 2024 में 254 मिलियन किलोग्राम (Mkg) चाय का निर्यात किया, जो 2023 के 231 Mkg की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है।

  • श्रीलंका का चाय निर्यात 2023 के समान स्तर पर बना रहा, जिससे भारत को दूसरा स्थान हासिल करने का अवसर मिला।

  • केन्या 2024 में भी शीर्ष पर रहा, जिसने 500 Mkg से अधिक चाय का निर्यात किया।

  • 2024 में भारत का चाय निर्यात उसके इतिहास में दूसरा सबसे अधिक था, पहले स्थान पर 2018 का 256 Mkg निर्यात रहा था।

  • भारतीय चाय उद्योग का लक्ष्य 2030 तक 300 Mkg का निर्यात हासिल करना है।

चाय निर्यात से आर्थिक लाभ

2024 में चाय निर्यात से ₹7,112 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ, जो उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण बढ़ावा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत का चाय निर्यात आमतौर पर 200-225 Mkg के बीच रहा, लेकिन 2018 और 2024 अपवाद रहे।

भारत के चाय निर्यात में वृद्धि के प्रमुख कारण

सरकारी नीतियां और उद्योग को समर्थन

  • केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लागू अनुकूल निर्यात नीतियां इस वृद्धि का प्रमुख कारण रही हैं।

  • विशेष रूप से ऑर्थोडॉक्स चाय उत्पादन को बढ़ावा देने वाली योजनाओं ने निर्यात में वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव प्रबीर कुमार भट्टाचार्य के अनुसार, अगर सरकार का समर्थन जारी रहा, तो भारतीय चाय उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी और बढ़ा सकता है।

ऑर्थोडॉक्स चाय का वर्चस्व

  • भारत के चाय निर्यात में अधिकांश वृद्धि ऑर्थोडॉक्स चाय की लोकप्रियता के कारण हुई है।

  • इस श्रेणी की चाय अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अधिक पसंद की जा रही है, जिससे इसकी मांग और निर्यात में इज़ाफ़ा हुआ है।

  • सरकार द्वारा दी जा रही प्रोत्साहन योजनाओं ने भारत को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखा है।

भारत का चाय उत्पादन और भविष्य की संभावनाएं

  • भारत हर साल लगभग 1,400 Mkg चाय का उत्पादन करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा घरेलू बाजार में खपत होता है।

  • हालिया निर्यात वृद्धि से उद्योग को मजबूती मिली है, जिससे आने वाले वर्षों में नए निर्यात रिकॉर्ड बनने की उम्मीद है।

  • भारतीय चाय बोर्ड और अन्य उद्योग हितधारक अब नए बाजारों में विस्तार करने और निर्यात की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

भारत का चाय निर्यात: 2023 बनाम 2024

वर्ष चाय निर्यात (Mkg) वैश्विक निर्यात रैंक प्रमुख प्रतिस्पर्धी राजस्व (₹ करोड़)
2023 231 तीसरा श्रीलंका निर्दिष्ट नहीं
2024 254 दूसरा केन्या 7,112

भारत की चाय उद्योग की यह सफलता इसे वैश्विक चाय व्यापार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करती है और भविष्य में निर्यात में और वृद्धि की संभावनाओं को दर्शाती है।

खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025: हरियाणा एक बार फिर पदक तालिका में शीर्ष पर

खेलो इंडिया पैरा गेम्स (KIPG) 2025 का दूसरा संस्करण आठ दिनों की रोमांचक खेल प्रतियोगिताओं के बाद शानदार समापन के साथ संपन्न हुआ। इस प्रतिष्ठित आयोजन में 1,300 से अधिक पैरा-एथलीटों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने अपनी अद्भुत प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और साहस का परिचय दिया। नई दिल्ली के तीन प्रमुख स्थलों—जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम, इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम और कर्णी सिंह शूटिंग रेंज—में आयोजित इस प्रतियोगिता ने मानव क्षमता और जुझारूपन का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

हरियाणा का दबदबा कायम

खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 में हरियाणा ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता साबित करते हुए 34 स्वर्ण पदकों के साथ पदक तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। पहले संस्करण (2023) में भी हरियाणा शीर्ष पर था। तमिलनाडु (28 स्वर्ण) दूसरे स्थान पर और उत्तर प्रदेश (23 स्वर्ण) तीसरे स्थान पर रहा। इस संस्करण में कुल 18 राष्ट्रीय रिकॉर्ड बने, जिससे भारत में पैरा-खेलों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और उत्कृष्टता का प्रमाण मिलता है।

हरियाणा ने कुल 104 पदक (34 स्वर्ण, 39 रजत, 31 कांस्य) जीतकर अपना प्रभुत्व कायम रखा, जो 2023 में उनके 105 पदकों (40 स्वर्ण, 39 रजत, 26 कांस्य) से केवल एक पदक कम था। तमिलनाडु ने इस बार बेहतरीन प्रदर्शन किया और 74 पदकों (28 स्वर्ण, 19 रजत, 27 कांस्य) के साथ तीसरे से दूसरे स्थान पर पहुंचा, जबकि उत्तर प्रदेश 64 पदकों (23 स्वर्ण, 21 रजत, 20 कांस्य) के साथ तीसरे स्थान पर खिसक गया।

रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन और स्टार एथलीट्स

इस प्रतियोगिता में कुल 18 राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़े गए, जो भारतीय पैरा-खेलों के उन्नत स्तर को दर्शाता है। पैरा-पावरलिफ्टिंग में स्वर्ण पदक जीतने वाले कुछ प्रमुख खिलाड़ी थे:

  • जसप्रीत कौर (पंजाब)

  • मनीष कुमार (हरियाणा)

  • सीमा रानी (पंजाब)

  • झंडू कुमार (बिहार)

इसके अलावा, ट्रैक और फील्ड स्पर्धाओं में 14 खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़े। इन एथलीटों में शामिल थे:

  • दिलीप महाडु गावित (महाराष्ट्र)

  • शरथ मकनहल्ली शंकरप्पा (कर्नाटक)

  • मनीष कुमार (हरियाणा)

  • मनजीत (हरियाणा)

  • भवानी मुन्नियांडी (अंडमान व निकोबार)

  • ललिता किल्लाका (आंध्र प्रदेश)

  • खुशबू गिल (तमिलनाडु)

  • एनबटामिझी एस (तमिलनाडु)

  • कीर्तिका जयचंद्रन (तमिलनाडु)

  • लक्ष्मी (हरियाणा)

  • उषा (हरियाणा)

  • डॉली गोला (दिल्ली)

  • जसप्रीत कौर स्रान (पंजाब)

  • फातिमा खातून (उत्तर प्रदेश)

गुजरात ने टेबल टेनिस में मचाया धमाल

प्रतियोगिता के अंतिम दिन गुजरात ने इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित टेबल टेनिस स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन किया। गुजरात ने कुल 21 पदक जीते, जिनमें 4 स्वर्ण, 5 रजत और 12 कांस्य पदक शामिल थे। हरियाणा ने भी टेबल टेनिस में 8 पदक जीते, जिसमें 3 स्वर्ण शामिल थे।

खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 ने भारत में पैरा-खेलों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा, उत्कृष्टता और खिलाड़ियों की अटूट दृढ़ता को प्रदर्शित किया, जिससे भविष्य में इन खेलों को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।

खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025: अंतिम पदक तालिका

खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 के अंतिम पदक तालिका में हरियाणा ने शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। विस्तृत पदक तालिका निम्नलिखित है:

रैंक राज्य स्वर्ण रजत कांस्य कुल पदक
1 हरियाणा 34 39 31 104
2 तमिलनाडु 28 19 27 74
3 उत्तर प्रदेश 23 21 20 64
4 राजस्थान 22 18 24 64
5 महाराष्ट्र 18 13 12 43
6 गुजरात 12 24 23 59
7 कर्नाटक 10 5 7 22
8 दिल्ली 8 11 20 39
9 पंजाब 8 2 5 15
10 आंध्र प्रदेश 4 8 3 15

हरियाणा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 104 पदकों के साथ अपनी बढ़त बनाई, जबकि तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश ने भी जबरदस्त प्रतिस्पर्धा दिखाई। राजस्थान और गुजरात ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पदक तालिका में ऊंचा स्थान हासिल किया।

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