भारत में IPO की धूम, डीमैट अकाउंट्स 21 करोड़ के पार

भारत के इक्विटी बाजार एक ऐतिहासिक खुदरा उछाल का अनुभव कर रहे हैं, क्योंकि अक्टूबर 2025 में NSDL और CDSL में कुल सक्रिय डिमैट खातों की संख्या पहली बार 21 करोड़ के पार पहुंच गई। यह अभूतपूर्व वृद्धि रिकॉर्ड तोड़ IPO सीज़न, मजबूत बाजार प्रदर्शन और खुदरा निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी से प्रेरित है—खासकर नए निवेशकों की, जिन्हें “फोमो” (FOMO—मिस कर देने का डर) आगे बढ़ा रहा है।

अक्टूबर महीना भारत के प्राइमरी मार्केट के लिए सबसे व्यस्त महीनों में से एक रहा, जिसमें 33 कंपनियों ने कुल ₹39,140 करोड़ जुटाए। तेजी से बढ़ते शेयर बाजार और डिजिटल ऑनबोर्डिंग प्लेटफ़ॉर्म्स ने मिलकर व्यक्तिगत निवेशकों में प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश की नई उत्सुकता पैदा की है।

रिकॉर्ड डिमैट उछाल: प्रमुख आंकड़े

  • डिमैट खाते (अक्टूबर 2025): 21 करोड़

  • मासिक वृद्धि: 20.7 करोड़ से बढ़कर 21 करोड़

  • अक्टूबर में जुड़े नए खाते: 30 लाख से अधिक (सितंबर के 24.6 लाख की तुलना में 22% वृद्धि)

  • डिपॉजिटरी: NSDL और CDSL

शीर्ष IPOs

  • टाटा कैपिटल: ₹15,511 करोड़

  • एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स: ₹11,600 करोड़

  • वीवर्क इंडिया: ₹3,000 करोड़

  • केनरा HSBC लाइफ इंश्योरेंस: ₹2,517 करोड़

यह पिछले 10 महीनों में डिमैट खातों की सबसे अधिक मासिक वृद्धि है, जो सक्रिय IPO कैलेंडर से उत्पन्न उत्साह को दर्शाती है।

बाज़ार की रफ़्तार से निवेशकों की भावना हुई मजबूत

डिमैट खातों में उछाल का सीधा संबंध बाज़ार सूचकांकों में तेज़ी से है:

  • सेंसेक्स और निफ्टी: अक्टूबर में लगभग 3% बढ़े

  • बीएसई मिडकैप: 4% उछला

  • बीएसई स्मॉलकैप: 3% बढ़ा

बाज़ार में इस मजबूती ने रिटेल निवेशकों का आत्मविश्वास बढ़ाया, जिससे IPO और सेकेंडरी मार्केट दोनों में भागीदारी बढ़ी।

मास्टर ट्रस्ट ग्रुप के डायरेक्टर पुनीत सिंघानिया के अनुसार, निवेशकों की प्राथमिकताएँ बदल रही हैं—कई लोग म्यूचुअल फंड और SIP के बजाय सीधे शेयर बाज़ार में निवेश को चुन रहे हैं। SIP प्रवाह स्थिर रहने के बावजूद IPO और अल्पकालिक लाभ की उम्मीद ने डायरेक्ट इक्विटी में रुचि फिर से जगाई है।

IPO बूम: डिमैट वृद्धि का प्रमुख कारक

अक्टूबर में भारत के IPO बाज़ार में कुल 33 नए लिस्टिंग्स हुईं, जिनमें मुख्य बोर्ड और SME प्लेटफ़ॉर्म दोनों शामिल थे।

उल्लेखनीय IPOs:

  • टाटा कैपिटल (₹15,511 करोड़): साल के सबसे बड़े IPO में से एक

  • एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया (₹11,600 करोड़): बहुप्रतीक्षित तकनीकी लिस्टिंग

  • वीवर्क इंडिया (₹3,000 करोड़): कोवर्किंग से लेकर स्टॉक मार्केट तक का सफर

  • ऑर्कला इंडिया, केनरा रोबेको AMC, रुबिकॉन रिसर्च: विविध क्षेत्रीय पेशकशें

लिस्टिंग गेन, ओवरसब्सक्रिप्शन और UPI आधारित आसान एप्लिकेशन प्रक्रिया ने रिटेल निवेशकों को आकर्षित किया।

डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और निवेशकों का बदलता व्यवहार

फिनटेक ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से आसान डिमैट खाता खोलने ने इस वृद्धि में बड़ी भूमिका निभाई है। हालांकि, कई निवेशकों द्वारा एक से अधिक खाते खोलने की वजह से कुल संख्या और भी बढ़ी है, जैसा कि वेल्थ विज़डम इंडिया के MD कृष्ण पाटवारी ने बताया।

NSE के आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि—

  • टॉप 25 ब्रोकर्स के सक्रिय क्लाइंट्स की संख्या अक्टूबर में 57,000 कम हुई

  • सक्रिय डिमैट खाते: 4.52 करोड़

इससे स्पष्ट है कि भले ही नए खाते बढ़ रहे हों, लेकिन सक्रिय भागीदारी में लगातार सुधार की ज़रूरत है।

रिटेल निवेशकों का बदलता प्रोफ़ाइल

नए निवेशकों की प्रकृति तेजी से बदल रही है:

  • पहली बार निवेश करने वाले लोग तेज़ी के दौरान बाज़ार में प्रवेश कर रहे हैं

  • मिलेनियल और जेन Z निवेशक ऑनलाइन खाता खोलने में अग्रणी हैं

  • कई लोग लंबी अवधि के पोर्टफोलियो की जगह IPO आधारित निवेश को चुनते हैं

  • वित्तीय बाज़ार के प्रति जागरूकता बढ़ रही है

हालाँकि निवेश का यह लोकतंत्रीकरण स्वागत योग्य है, लेकिन इससे बाज़ार टाइमिंग, सट्टेबाज़ी और वित्तीय शिक्षा जैसी चिंताएँ भी बढ़ती हैं।

Guru Tegh Bahadur: जानें किस दिन है गुरु तेग बहादुर जी महाराज का शहीदी दिवस

गुरु तेग बहादुर जी सिख धर्म के नौवें गुरु थे, जिनका जीवन साहस और त्याग का प्रतीक है। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। उनका शहीदी दिवस हमें न्याय, समानता और मानवाधिकारों के लिए खड़े होने की प्रेरणा देता है। गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस इस वर्ष मनाया जा रहा है, और यह भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन है। गुरु तेग बहादुर जी सिख धर्म के नौवें गुरु थे और उन्हें ‘हिंद की चादर’ के रूप में भी जाना जाता है। उनका बलिदान भारतीय धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस कब है?

सिख धर्म के 9वें गुरु, गुरु तेग बहादुर सिंह जी का 350वां शहीदी दिवस 24 नवंबर 2025, मंगलवार को मनाया जाएगा। उन्हें “भारत का कवच” कहा जाता है क्योंकि उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अत्याचारों के खिलाफ डटकर संघर्ष किया।

गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस: इतिहास

गुरु तेग बहादुर जी ने 1675 में दिल्ली में शहादत प्राप्त की। उन्होंने मुग़ल सम्राट और औरंगजेब के धार्मिक उत्पीड़न का विरोध किया था। औरंगजेब ने जब हिंदू धर्म, विशेषकर कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार करने शुरू किए, तब गुरु तेग बहादुर ने उनकी रक्षा के लिए अपनी शहादत दी।

इस दिवस का महत्व

गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान हमें सिखाता है कि सही के लिए खड़े होना कितना जरूरी है, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों। उनका जीवन साहस, करुणा और न्याय का प्रतीक है।

कैसे मनाया जाता है यह दिवस?

इस दिन सिख समुदाय और अन्य लोग गुरुद्वारों में विशेष कीर्तन, अरदास और सभाएं आयोजित करते हैं। लोग गुरु जी की शिक्षाओं को याद करते हैं और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं। उनकी शहादत हमें समानता, स्वतंत्रता और दूसरों की रक्षा करने के महत्व को भी समझाती है।

गुरु तेग बहादुर जी, का जन्म

सिख धर्म के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी, का जन्म 1 अप्रैल, 1621 को अमृतसर में हुआ था। वह छठे सिख गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब जी, और माता नानकी जी के सबसे छोटे पुत्र थे। उनका बचपन का नाम त्याग मल था।

एक बालक के रूप में, तेग बहादुर जी ने अपने पिता, गुरु हरगोबिंद साहिब, से न केवल आध्यात्मिक शिक्षा, बल्कि सैन्य प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। 1634 में करतारपुर के युद्ध में उन्होंने अपनी असाधारण तलवारबाजी और बहादुरी का प्रदर्शन किया। उनकी वीरता से प्रभावित होकर ही उनके पिता ने उनका नाम ‘त्याग मल’ से बदलकर ‘तेग बहादुर’ रखा, जिसका अर्थ है ‘तलवार का धनी’ या ‘तलवार का बहादुर’।

 

नीतीश कुमार ने रचा इतिहास, 10वीं बार ली CM की शपथ

बिहार विधानसभा चुनाव में 202 सीटें लाने वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के लिए आज ऐतिहासिक दिन है। गांधी मैदान में नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा फिर से डिप्टी सीएम बनाए गए। मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कई केंद्रीय मंत्रियों समेत एनडीए के सभी घटकों के प्रमुखों, एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और बड़े नेता मौजूद रहे।

बिहार में एनडीए को प्रचंड जीत मिलने के बाद एक बार फिर नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। वह 19 वर्ष तक बिहार की सत्ता के शीर्ष पर रह चुके हैं। वह बिहार में सबसे लंबे समय तक सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री भी हैं। बिहार में अभी तक किसी भी मुख्यमंत्री का कार्यकाल इतना लंबा नहीं रहा है। देश के अब तक इतिहास को देखें तो सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वालों की सूची में नीतीश कुमार का नाम भी शामिल है।

नीतीश कुमार के बाद, बहुत से ऐसे नेता हैं, जिन्होंने कई बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली हैं, लेकिन 10 का आंकड़ा अब तक किसी ने नहीं छुआ है। इस लिहाज से नीतीश कुमार देश के सबसे अनुभवी और रिकॉर्ड-धारक मुख्यमंत्री हैं।

26 मंत्रियों ने शपथ ली

राज्यपाल ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। उनके बाद उप मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा ने भी पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। इसके साथ ही एनडीए गठबंधन की नई सरकार ने औपचारिक रूप से कामकाज की शुरुआत कर दी। समारोह में कुल 26 मंत्रियों ने शपथ ली, जिनमें पहली बार मंत्री बनने वाली जमुई की विधायक श्रेयसी सिंह भी शामिल रहीं।

पीएम नरेंद्र मोदी भी मौजूद

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिली बंपर जीत के बाद यह शपथ ग्रहण समारोह बेहद खास तरीके से बनाया गया। राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे और नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी। गांधी मैदान में विशाल मंच बनाया गया था, जहां हजारों की संख्या में कार्यकर्ता, नेता और आम लोग इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद बिहार कैबिनेट के मंत्रियों को भी शपथ दिलाई गई।

दिग्गज नेताओं की मौजूदगी

शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और एनडीए गठबंधन के बड़े नेता मौजूद रहे। पूरा गांधी मैदान सुरक्षा के विशेष प्रोटोकॉल के तहत कवर किया गया था। शपथ ग्रहण के साथ ही बिहार में नई सरकार के कामकाज की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री जल्द ही कैबिनेट की पहली बैठक करने वाले हैं, जिसमें कई अहम फैसलों की उम्मीद की जा रही है।

 

 

Bihar Cabinet ministers list 2025: नीतीश सरकार के कैबिनेट मंत्रियों की पूरी सूची, देखिए पूरी लिस्ट

जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने आज पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में रिकॉर्ड 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। नीतीश कुमार के साथ 26 मंत्रियों ने शपथ ली। शपथ समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय मंत्री जीतराम मांझी, राज्य मंत्री चिराग पासवान और हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी समेत कई बड़े दिग्गज नेताओं ने शिरकत की। समारोह में श्रवण कुमार, दीलीप जायसवाल, बिजेंद्र यादव और मंगल पाण्डेय समेत कुल 26 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली है।

मंत्रियों की सूची

बीजेपी 

  • सम्राट चौधरी
  • विजय कुमार सिन्हा
  • दिलीप जायसवाल
  • मंगल पांडे
  • रामकृपाल यादव
  • नीतिन नवीन
  • संजय सिंह टाइगर
  • अरुण शंकर प्रसाद
  • सुरेंद्र मेहता
  • नारायण प्रसाद
  • रमा निषाद
  • लखेंद्र सिंह रौशन
  • श्रेयसी सिंह
  • प्रमोद कुमार

जनता दल यूनाइटेड

  • विजय कुमार चौधरी
  • बिजेंद्र प्रसाद यादव
  • श्रवण कुमार
  • अशोक चौधरी
  • लेशी सिंह
  • मदन सहनी
  • सुनील कुमार
  • मोहम्म जमा ख़ान

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास)

  • संजय कुमार
  • संजय कुमार सिंह

हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा

  • संतोष सुमन (जीतन राम मांझी के बेटे)

राष्ट्रीय लोक मोर्चा

  • दीपक प्रकाश

एनडीए ने पिछले हफ़्ते बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए सत्ता में वापसी की। 243 सीटों में से एनडीए को 202 सीटें मिलीं। बीजेपी को 89, जेडीयू को 85, एलजेपी(आरवी) को 19 और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा 5 और आरएलएम 4 सीटें जीतने में कामयाब रही थीं।

मिशेल बैचलेट को इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया

मिशेल बैचलेट — चिली की पहली और एकमात्र महिला राष्ट्रपति तथा संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार उच्चायुक्त — को 20 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण और विकास पुरस्कार (2024) से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा प्रदान किया गया। यह सम्मान बाचेलेट के आजीवन मानवाधिकार, लैंगिक समानता और वैश्विक न्याय के प्रति योगदान को मान्यता देता है।

अधिकारों और समानता की वैश्विक समर्थक

मिशेल बैचलेट ने चिली की राष्ट्रपति के रूप में दो कार्यकाल (2006–2010 और 2014–2018) पूरे किए और एक मजबूत विरासत छोड़ी। अपने शासनकाल में उन्होंने—

  • महिला एवं लैंगिक समानता मंत्रालय की स्थापना की

  • शिक्षा एवं कर सुधार लागू किए

  • राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थान और स्मृति एवं मानवाधिकार संग्रहालय की स्थापना की

  • LGBT अधिकारों को आगे बढ़ाया और राजनीतिक लैंगिक आरक्षण का समर्थन किया

उनकी घरेलू उपलब्धियों के साथ-साथ उनका वैश्विक प्रभाव भी उल्लेखनीय रहा, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (2018–2022) के रूप में। वे 2010 में ‘यूएन वीमेन’ की पहली निदेशक भी रहीं।

भारतीय मानवाधिकार मुद्दों पर मुखर रहीं

बैचलेट भारत में मानवाधिकार मुद्दों पर भी स्पष्ट रूप से बोलती रही हैं, जिनमें प्रमुख हैं—

  • 2019–20 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) की आलोचना

  • कार्यकर्ताओं के खिलाफ यूएपीए (UAPA) के इस्तेमाल पर चिंता

  • एनजीओ के विरुद्ध एफसीआरए (FCRA) के दुरुपयोग को लेकर चेतावनी

इसके बावजूद, उन्हें इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नागरिक सहभागिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की व्यापक प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

संघर्ष और साहस की व्यक्तिगत कहानी

बैचलेट का निजी जीवन लैटिन अमेरिका के अनेक संघर्षों को प्रतिबिंबित करता है। उनके पिता एयर फ़ोर्स ब्रिगेडियर जनरल अल्बर्टो बैचलेट की मृत्यु 1973 में ऑगस्तो पिनोशे के सैन्य तख्तापलट का विरोध करने के कारण जेल में हुई। स्वयं बैचलेट को भी हिरासत में लिया गया और बाद में निर्वासन झेलना पड़ा।

समारोह के दौरान, सोनिया गांधी ने बैचलेट और इंदिरा गांधी के बीच समानताओं का उल्लेख किया—दोनों नेता उथल-पुथल भरे राजनीतिक दौर में पैदा हुईं और व्यक्तिगत तथा राष्ट्रीय चुनौतियों ने उनके नेतृत्व को आकार दिया।

श्रद्धांजलि और स्वीकृति

अपने स्वीकृति भाषण में बैचलेट ने इंदिरा गांधी की उस विचारधारा को याद किया कि राष्ट्र तभी प्रगति करते हैं जब उनमें सौहार्द होता है। उन्होंने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों को “विशेष सौभाग्य” के रूप में वर्णित किया।

इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार: वैश्विक प्रभाव का प्रतीक

1985 में स्थापित यह पुरस्कार उन व्यक्तियों या संगठनों को दिया जाता है जिन्होंने—

  • अंतरराष्ट्रीय शांति

  • विकास सहयोग

  • लोकतांत्रिक शासन

  • मानव कल्याण हेतु वैज्ञानिक खोजों

में उत्कृष्ट योगदान दिया हो।

स्थैतिक तथ्य 

  • पुरस्कार: इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण और विकास पुरस्कार 2024

  • प्राप्तकर्ता: मिशेल बैचलेट

  • समारोह की तिथि: 20 नवंबर 2025

  • प्रस्तुतकर्ता: सोनिया गांधी

  • देश: चिली

  • प्रमुख पद: चिली की राष्ट्रपति (2006–10, 2014–18), यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त, यूएन वीमेन की पहली निदेशक

  • प्रसिद्धि: मानवाधिकार वकालत, लैंगिक सुधार, CAA और FCRA की आलोचना

  • स्थापना: 1985 (इंदिरा गांधी की स्मृति में)

नीतीश कुमार 10वीं बार बनेंगे बिहार के मुख्यमंत्री

भारत की राज्य राजनीति के एक ऐतिहासिक क्षण में, जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख नीतीश कुमार आज, 20 नवंबर 2025 को सुबह 11:30 बजे पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। यह महत्वपूर्ण घटना बिहार विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की शानदार जीत के बाद हो रही है, जिसमें गठबंधन ने 243 में से 202 सीटें हासिल कर प्रचंड बहुमत दर्ज किया। इस चुनावी सफलता ने राज्य में सत्ता के पुनर्स्थापन और राजनीतिक मजबूती की एक बार फिर पुष्टि की है।

NDA के विधायकों की बैठक (NDA meeting) में नीतीश कुमार को नेता चुना गया है। उनके नाम का प्रस्ताव बीजेपी नेता सम्राट चौधरी ने रखा, जिसका सभी विधायकों ने समर्थन किया। नीतीश कुमार 10वीं बार शपथ लेने जा रहे हैं। वह पहली बार 2000 में मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन बहुमत न मिलते ही 7 दिन बाद इस्तीफा दे दिया। इसके बाद Nitish Kumar ने 2005 में आरजेडी शासन को चुनौती देते हुए प्रचंड बहुमत से सत्ता में लौटे, यहीं से ‘गुड गवर्नेंस’ का उनका ब्रांड मजबूत हुआ।

नीतीश कुमार: राजनीतिक पुनर्निर्माण का एक दशक

नीतीश कुमार का यह शपथग्रहण उन्हें भारत के सबसे लंबे और लचीले राजनीतिक नेतृत्वकर्ताओं में firmly स्थापित करता है। उनका सफ़र — समाजवादी पृष्ठभूमि से लेकर दशकों में यूपीए और एनडीए, दोनों के साथ तालमेल बैठाने तक — राजनीतिक समय-सूझबूझ और सुशासन को प्राथमिकता देने की उनकी क्षमता को दर्शाता है।

यह उनका 10वां शपथग्रहण है, जो मार्च 2000 में पहले कार्यकाल (जो अल्पकालिक रहा) से शुरू हुई उनकी मुख्यमंत्री यात्रा को एक लंबी निरंतरता प्रदान करता है। इसके बाद से वह बिहार की राजनीति में एक केंद्रीय चेहरा बन चुके हैं, जिन्हें विशेष रूप से बुनियादी ढाँचे, क़ानून-व्यवस्था और सामाजिक कल्याण से जुड़ी सुधारों के लिए जाना जाता है।

एनडीए की जीत और सत्ता का ढांचा

2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में एनडीए की प्रचंड जीत ने नीतीश कुमार की वापसी का मार्ग प्रशस्त किया। इस गठबंधन में शामिल हैं—

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP)

  • जनता दल (यूनाइटेड)

  • हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM)

  • राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP)

  • तथा अन्य क्षेत्रीय सहयोगी

202 सीटों का यह जनादेश हालिया राज्य चुनावों के सबसे बड़े परिणामों में से एक है।

विधानमंडलीय नेतृत्व के चयन

  • सम्राट चौधरी (BJP) को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया।

  • विजय सिन्हा को उपनेता बनाया गया।

  • नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से एनडीए विधायक दल का नेता चुना गया, जिससे आज के शपथग्रहण का औपचारिक मार्ग प्रशस्त हुआ।

गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह

शपथग्रहण पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित हो रहा है, जो राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व का प्रतीक स्थल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल और एनडीए के प्रमुख नेता इस समारोह में उपस्थित रहने की संभावना है।

यह आयोजन राजनीतिक निरंतरता और नेतृत्व के बदलते समीकरणों दोनों को रेखांकित करता है—जहाँ भाजपा गठबंधन में अधिक प्रमुख भूमिका निभा रही है, वहीं नीतीश कुमार को फिर से मुख्यमंत्री पद देकर गठबंधन की स्थिरता और संतुलन को मजबूत किया गया है।

इंदिरा गांधी की 108वीं जयंती, पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

इंदिरा गांधी की 108वीं जयंती, जिसे 19 नवंबर 2025 को मनाया गया, भारत की प्रथम और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री के जीवन और योगदान को याद करने का अवसर है। अपने साहसिक निर्णयों और सशक्त नेतृत्व के लिए प्रसिद्ध इंदिरा गांधी ने आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 19 नवंबर 1917 को जन्मी इंदिरा गांधी आज भी अपने दूरदर्शी नेतृत्व, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रहित में किए गए निर्णयों के लिए करोड़ों लोगों की प्रेरणा बनी हुई हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनकी 108वीं जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक संदेश पोस्ट करते हुए कहा, “पूर्व PM श्रीमती इंदिरा गांधी जी को उनकी जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि।”

इंदिरा गांधी का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

इंदिरा गांधी का जन्म इलाहाबाद में हुआ था। उनके पिता जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री थे और उनकी माता कमला नेहरू स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख कार्यकर्ता थीं। राजनीतिक माहौल और स्वतंत्रता आंदोलन से घिरे परिवार में पली-बढ़ी इंदिरा ने छोटी उम्र से ही जनसेवा और राष्ट्रीय कर्तव्य की सीख पाई।

उन्होंने कई विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त की — दिल्ली का मॉडर्न स्कूल, इलाहाबाद के सेंट सेसिलिया और सेंट मैरीज़ कॉन्वेंट, स्विट्ज़रलैंड के स्कूल, और फिर शांतिनिकेतन, जहाँ गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें प्यार से ‘प्रियदर्शिनी’ नाम दिया। बाद में उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भी अध्ययन किया, हालांकि अपनी डिग्री पूरी नहीं कर सकीं।

साल 1942 में उन्होंने फिरोज़ गांधी से विवाह किया। इस दंपत्ति के दो पुत्र हुए — राजीव गांधी और संजय गांधी।

उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत

इंदिरा गांधी का सक्रिय राजनीतिक सफ़र 1950 के दशक में शुरू हुआ, जब वे अनौपचारिक रूप से अपने पिता जवाहरलाल नेहरू का सहयोग करने लगीं। 1955 में वे कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य बनीं और 1959 में कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गईं।

1964 में नेहरू के निधन के बाद वे लाल बहादुर शास्त्री की सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनीं, जहाँ उनके कार्यों की व्यापक सराहना हुई।

प्रधानमंत्री बनने का सफ़र

1966 में लाल बहादुर शास्त्री के आकस्मिक निधन के बाद कांग्रेस पार्टी ने इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री चुना। उस समय कई नेताओं को लगा कि वे एक “कमज़ोर” उम्मीदवार होंगी, लेकिन उन्होंने अपने दृढ़, निडर और निर्णायक नेतृत्व से यह साबित कर दिया कि वे देश को दिशा देने में सक्षम हैं।

वे 1966 से 1977 तक और फिर 1980 से 1984 तक भारत की प्रधानमंत्री रहीं। इस प्रकार वे जवाहरलाल नेहरू के बाद भारत की दूसरी सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाली प्रधानमंत्री बनीं।

प्रधानमंत्री के रूप में उनके प्रमुख योगदान

इंदिरा गांधी ने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण नीतियाँ शुरू कीं। उनके मुख्य योगदान इस प्रकार हैं:

हरित क्रांति (Green Revolution): उन्होंने किसानों को नई खेती तकनीकों, बेहतर बीजों और सिंचाई सुविधाओं का समर्थन दिया। इससे देश में खाद्यान्न उत्पादन बहुत बढ़ा और भूख की समस्या काफी कम हुई।

1971 का युद्ध और बांग्लादेश का निर्माण: उनके नेतृत्व में भारत ने 1971 के भारत–पाक युद्ध में विजय प्राप्त की, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश एक नया देश बना। इस जीत ने इंदिरा गांधी को बेहद लोकप्रिय बना दिया।

गरीबी हटाओ कार्यक्रम: उनका नारा “गरीबी हटाओ” गरीब और वंचित लोगों के कल्याण के लिए उनके समर्पण को दर्शाता है। उन्होंने अनेक सामाजिक योजनाएँ शुरू कीं ताकि गरीबों की जीवन स्थितियों में सुधार हो सके।

इंदिरा गांधी की हत्या

1984 में पंजाब में उग्रवाद बढ़ गया था और कुछ उग्रवादी अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में छिपे हुए थे। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए इंदिरा गांधी ने सेना को मंदिर से उग्रवादियों को हटाने के आदेश दिए। इस कार्रवाई से कई सिख भावनाएँ आहत हुईं।

31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की उनके दो सुरक्षा कर्मियों ने हत्या कर दी, जिन्होंने स्वर्ण मंदिर अभियान का बदला लेने के लिए यह कदम उठाया।

इंदिरा गांधी की विरासत

अपनी जन्मशती के 108 वर्षों बाद भी, इंदिरा गांधी को एक निडर, प्रभावशाली और दृढ़ नेता के रूप में याद किया जाता है। उनके फैसले—चाहे प्रशंसित हों या आलोचना के पात्र—भारत की राजनीति, समाज और विकास की दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण रहे।

उनका जीवन आज भी साहस, दृढ़ संकल्प और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक प्रतीक माना जाता है।

वेणु श्रीनिवासन ने सीआईआई गुणवत्ता रत्न पुरस्कार 2025 जीता

गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) में उत्कृष्ट नेतृत्व की मान्यता के रूप में, TVS मोटर कंपनी के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन को CII क्वालिटी रत्न पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया। यह सम्मान 18 नवंबर 2025 को कोलकाता में आयोजित 33वें CII एक्सीलेंस समिट में दिया गया, जिसमें 1,000 से अधिक उद्योग और गुणवत्ता विशेषज्ञ उपस्थित थे। यह पुरस्कार श्रीनिवासन की दशकों की गुणवत्ता-उन्मुख नेतृत्व यात्रा को मजबूत करता है, जिसने भारतीय विनिर्माण (manufacturing) को वैश्विक मानकों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

CII एक्सीलेंस समिट 2025: भारत के विनिर्माण भविष्य की दिशा

CII इंस्टिट्यूट ऑफ क्वालिटी द्वारा आयोजित इस समिट का उद्देश्य था—

  • भारत की वैश्विक विनिर्माण हिस्सेदारी को 3% से बढ़ाकर 25% करना

  • 10 करोड़ नई नौकरियाँ पैदा करना

यह समिट इस बात पर केंद्रित थी कि भारत कैसे गुणवत्ता, नवाचार और नेतृत्व के माध्यम से दुनिया के शीर्ष तीन विनिर्माण केंद्रों में शामिल हो सकता है।

वेणु श्रीनिवासन का सम्मान इस परिवर्तनकारी यात्रा में नेतृत्व की अहम भूमिका को रेखांकित करता है।

वेणु श्रीनिवासन: गुणवत्ता नेतृत्व में अग्रणी

1. टोटल क्वालिटी मैनेजमेंट (TQM) के प्रवर्तक

वेणु श्रीनिवासन ने कई दशक पहले TVS मोटर में TQM को अपनाया, जिससे कंपनी पहली भारतीय दोपहिया निर्माता बनी जिसने जापान के बाहर डेमिंग पुरस्कार 2002 जीता।
यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी जिसने गुणवत्ता प्रबंधन में नई दिशा स्थापित की।

2. ग्राहक-केंद्रित गुणवत्ता संस्कृति का निर्माण

समिट में श्रीनिवासन ने कहा कि—

  • डिज़ाइन ग्राहक की ज़रूरतों पर आधारित होने चाहिए

  • कर्मचारियों पर विश्वास दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है

उन्होंने कहा, “टेक्नोलॉजी और सामाजिक आकांक्षाएँ नए उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। हमें ग्राहक की ज़रूरतों को गहराई से समझना होगा और उन्हें जीवनभर सेवा देनी होगी।”

CII क्वालिटी रत्न पुरस्कार का महत्व

1. गुणवत्ता उत्कृष्टता का राष्ट्रीय प्रतीक

यह भारत का सबसे बड़ा औद्योगिक सम्मान है, जो उन नेताओं को दिया जाता है जिन्होंने—

  • गुणवत्ता

  • संचालन उत्कृष्टता

  • राष्ट्रीय नीति पर सकारात्मक प्रभाव
    —में असाधारण योगदान दिया हो।

2. भारत के विनिर्माण लक्ष्यों को गति

यह पुरस्कार बताता है कि भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों की सफलता गुणवत्ता नेतृत्व पर ही निर्भर है।

भारत के लिए रणनीतिक महत्व

1. वैश्विक विनिर्माण नेतृत्व

ऐसे नेता भारत को assembler से creator of world-class products बनने की ओर ले जाते हैं।

2. कौशल और रोजगार

10 करोड़ नौकरियों के लक्ष्य को पाने के लिए TVS मॉडल—

  • TQM

  • कर्मचारी-प्रथम नीति
    —बहुत प्रभावी साबित हो सकता है।

3. नवाचार आधारित डिज़ाइन

ग्राहक-केन्द्रित और तकनीक-संचालित डिज़ाइन भविष्य की जरूरत है, जो श्रीनिवासन के नेतृत्व की मुख्य सोच है।

मुख्य तथ्य 

  • कौन: वेणु श्रीनिवासन, चेयरमैन एमेरिटस, TVS मोटर

  • क्या: CII क्वालिटी रत्न पुरस्कार 2025 प्राप्त

  • कब: 18 नवंबर 2025

  • कहाँ: 33वां CII एक्सीलेंस समिट, कोलकाता

  • क्यों: गुणवत्ता प्रबंधन, TQM, और मूल्य-आधारित उत्पादन में उत्कृष्ट योगदान

स्टैटिक फैक्ट्स 

  • CII क्वालिटी रत्न पुरस्कार: CII (Confederation of Indian Industry) द्वारा प्रदान किया जाता है

  • TVS मोटर: भारत की तीसरी सबसे बड़ी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी

  • वेणु श्रीनिवासन: 2002 में डेमिंग पुरस्कार प्राप्त

  • भारत की वर्तमान वैश्विक विनिर्माण हिस्सेदारी: लगभग 3%

  • लक्ष्य: इसे 25% तक बढ़ाना और 10 करोड़ नौकरियाँ सृजित करना

  • TQM: एक गुणवत्ता प्रणाली जो ग्राहक संतुष्टि और सतत सुधार पर केंद्रित है

International Mens Day 2025: जानें क्यों 19 नवंबर को मनाया जाता है पुरुष दिवस

International Mens Day 2025: हर साल 19 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस दुनिया भर में उन पुरुषों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है, जो परिवार, समाज और रिश्तों में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। यह दिन सिर्फ पुरुषों के योगदान को सराहने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, जिम्मेदारियों और जेंडर इक्विटी जैसे मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने का भी माध्यम है।

इंटरनेशनल मेन्स डे 2025 की थीम

इंटरनेशनल मेन्स डे की आधिकारिक वेबसाइट, जिसे ऑस्ट्रेलिया की चैरिटी संस्था Dads4Kids Fatherhood Foundation चलाती है, ने 2025 की थीम “Celebrating Men and Boys” घोषित की है। इस थीम का मकसद है हर उम्र और हर भूमिका में पुरुषों को सम्मान देना चाहे वे पिता हों, मेंटर हों, शिक्षक हों, हेल्थ वर्कर हों या समाज से जुड़े कोई भी सदस्य।

क्यों मनाया जाता है पुरुष दिवस?

इंटरनेशनल मेन्स डे का उद्देश्य पुरुषों के स्वास्थ्य, उनकी भलाई और समाज में उनके योगदान को सराहना देना है। यह दिन याद दिलाता है कि पुरुष भी कई तरह की चुनौतियों से गुजरते हैं चाहे वह शारीरिक स्वास्थ्य हो, मानसिक दबाव हो या फिर सामाजिक उम्मीदें। इस अवसर का संदेश यही है कि समानता और सम्मान हर किसी के लिए हों, और पुरुषों को भी एक संतुलित, सुरक्षित और सहयोगी माहौल मिले।

अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस का इतिहास

इंटरनेशनल मेन्स डे का विचार सबसे पहले 1999 में वेस्टइंडीज के प्रोफेसर डॉ. जेरोम टीलक्सिंग ने रखा था। उन्होंने यह दिन अपने पिता के जन्मदिन से प्रेरित होकर चुना और दुनिया को बताया कि पुरुषों के मुद्दों और उनके कल्याण पर भी वैसी ही बातचीत की जरूरत है जैसी महिलाओं और बच्चों के लिए होती है। भारत में इस दिन का औपचारिक रूप से मनाया जाना 2007 के बाद तेजी से बढ़ा और आज देश के कई हिस्सों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

 

केंद्र सरकार ने रोगाणुरोधी प्रतिरोध 2.0 पर राष्ट्रीय कार्य योजना का शुभारंभ किया

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने राष्ट्रीय एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) कार्ययोजना 2.0 लॉन्च की, जो वर्ष 2025 से 2029 की अवधि को कवर करेगी। यह लॉन्च नई दिल्ली में हुआ और एंटीबायोटिक प्रतिरोध की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए भारत की स्वास्थ्य रणनीति में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस क्यों महत्वपूर्ण है?

एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) तब होती है जब बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी दवाओं के प्रति प्रतिरोधी बनने लगते हैं, जिससे संक्रमणों का इलाज कठिन हो जाता है। यह एक वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल का रूप ले चुका है और निम्न प्रमुख चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए गंभीर खतरा है:

  • सर्जिकल ऑपरेशन

  • कैंसर उपचार

  • इंटेंसिव केयर प्रक्रियाएँ

मंत्री नड्डा ने बताया कि एंटीबायोटिक का अत्यधिक और गलत उपयोग अस्पतालों, समुदायों और पशु स्वास्थ्य क्षेत्रों में AMR को बढ़ा रहा है। यदि इसे रोका न गया, तो यह लंबी बीमारी, अधिक मृत्यु दर और बढ़ते स्वास्थ्य खर्चों का कारण बन सकता है।

AMR 2.0 (2025–29) में नया क्या है?

नई कार्ययोजना पहले संस्करण की सीखों पर आधारित है और इसका उद्देश्य है:

  • पिछली कार्ययोजना की क्रियान्वयन खामियों को दूर करना

  • संबंधित पक्षों की जवाबदेही बढ़ाना

  • मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच समन्वय मजबूत करना

  • निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना

  • हर स्तर पर एंटीबायोटिक के उचित और संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना

यह योजना WHO के ग्लोबल एक्शन प्लान और वन हेल्थ अप्रोच के अनुरूप है, जिसमें मानव, पशु और पर्यावरण का एकीकृत दृष्टिकोण शामिल है।

तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता क्यों है?

AMR के कारण:

  • उपचार के परिणामों में देरी

  • दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों का फैलाव

  • अस्पताल में अधिक समय

  • परिवारों और स्वास्थ्य प्रणाली पर आर्थिक बोझ

भारत जैसे देश में, जहाँ एंटीबायोटिक अक्सर बिना निर्देश के उपयोग किए जाते हैं, जोखिम और भी गंभीर है।

सरकार का बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण

AMR 2.0 रणनीति सहयोगी प्रयासों पर आधारित है और निम्न को बढ़ावा देती है:

  • एंटीबायोटिक प्रतिरोध की निगरानी (surveillance)

  • दवाओं के गलत उपयोग को रोकने के लिए सख़्त नियम

  • डॉक्टरों और फार्मासिस्टों का प्रशिक्षण

  • एंटीबायोटिक के जिम्मेदार उपयोग पर जन-जागरूकता

  • अस्पतालों में संक्रमण रोकथाम प्रणाली

यह समग्र दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि AMR पर नियंत्रण केवल अस्पतालों तक सीमित न रहकर कृषि, पशुपालन और पर्यावरण क्षेत्रों तक भी फैले।

स्थिर तथ्य (Static Facts)

  • योजना का नाम: राष्ट्रीय एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) कार्ययोजना 2.0

  • लॉन्च तिथि: 18 नवंबर 2025

  • लॉन्चकर्ता: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा

  • अवधि: 2025–2029

  • मुख्य उद्देश्य: AMR से निपटने के लिए बहु-क्षेत्रीय और समन्वित कार्रवाई

  • मुख्य फोकस क्षेत्र: मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, एंटीबायोटिक उपयोग नियमन, निजी क्षेत्र की भागीदारी

  • संबंधित चुनौतियाँ: दवाओं का अत्यधिक/गलत उपयोग, समन्वय की कमी, जागरूकता की कमी

  • संबंधित ढांचे: WHO ग्लोबल एक्शन प्लान, वन हेल्थ अप्रोच

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