सरकार की देश में 5 जी प्रौद्योगिकी के वास्ते 100 प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना

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दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार की देश में 5 जी प्रौद्योगिकी के लिए 100 प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना है जिनमें कम से कम 12 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने एवं प्रयोग करने के लिए उपयोग में लायी जाएंगी। मंत्री ने इंडियन मोबाइल कांग्रेस में शिरकत कर रही कंपनियों से नये दूरसंचार विधयेक पर अपनी राय देने का भी आह्वान किया। इस विधेयक के माध्यम से सरकार का लक्ष्य लाइसेंस व्यवस्था को आसान बनाना है।

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दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि हम देशभर में 5 जी की 100 प्रयोशालाएं स्थापित करने जा रहे हैं। मैं दूरसंचार उद्योग से साथ आने और इन 100 प्रयोगशालाओं में से कम से कम 12 को विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने एवं प्रयोग करने के वास्ते दूरसंचार इनक्यूबेटर के रूप में परिवर्तित करने का अनुरोध करता हूं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी इंडिया मोबाइल कांग्रेस में पहुंचे और कहा कि 5 जी की शुरुआत न केवल भारत बल्कि दुनिया के लिए निर्णायक क्षण है।

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पंकज आडवाणी ने 25वां विश्व खिताब जीता

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बिलियर्ड्स में भारत के टॉप खिलाड़ी पंकज आडवाणी ने विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में हमवतन सौरव कोठारी को 4-0 से हराकर अपने करियर का 25वां चैंपियनशिप अपने नाम किया। आडवाणी ने बेहतरीन खेल दिखाया। इस 150 से अधिक के प्रारूप में आडवाणी ने पहले फ्रेम को 149 के ब्रेक के साथ अपने नाम किया। तब तक कोठारी ने खाता भी नहीं खोला था।

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कोठारी को अपने पहले आईबीएसएफ (अंतरराष्ट्रीय बिलियर्ड्स एवं स्नूकर महासंघ) विश्व खिताब का इंतजार है। इस ‘बेस्ट ऑफ सेवन’ के फाइनल में आडवाणी ने शुरू से बेहतरीन खेल दिखाकर एक कैलेंडर वर्ष में बिलियर्ड्स का राष्ट्रीय, एशियाई और विश्व खिताब जीतने का पांचवीं बार अनूठा कीर्तिमान स्थापित किया। दूसरी तरफ आडवाणी ने 77 के ब्रेक की मदद से 2-0 की बढ़त हासिल कर ली। आडवाणी ने तीसरे फ्रेम में 153 का टूर्नामेंट का सर्वोच्च ब्रेक बनाया, जिससे वह खिताब से केवल एक फ्रेम दूर रह गए थे।

 

कोरोना वायरस के कारण पिछली विश्व चैंपियनशिप 2019 में खेली गई थी। आडवाणी ने बाद में कहा, ‘लगातार पांचवीं बार खिताब का बचाव करना सपना सच होने जैसा है। आडवाणी ने इससे पहले आखिरी विश्व खिताब 12 महीने पहले कतर में जीता था। तब उन्होंने आईबीएसएफ 6-रेड स्नूकर विश्वकप में खिताब जीता था।

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का उद्घाटन किया

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छत्तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का उद्घाटन किया। इसका आयोजन राज्‍य के बलवीर सिंह जुनेजा इंडोर स्‍टेडियम में किया गया। इसका आयोजन 06 अक्‍टूबर से 06 जनवरी, 2023 तक किया जाएगा। मुख्‍यमंत्री ने इस दिन छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के ब्रोशर का भी विमोचन किया, जिसमें इससे संबंधित सारी जानकारियां मौजूद हैं। उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, सभ्यता और विशिष्ट पहचान यहां की ग्रामीण परंपराओं और रीति रीवाजों से है।

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गौरतलब है कि इसके तहत हर ब्‍लाक, हर जिले में स्‍थानीय खेलों का आयोजन किया जाएगा। इसका आयोजन छह स्‍तरों में किया जा रहा है, जिसमें महिला व पुरुष प्रतिभागियों के लिए दो अलग-अलग वर्ग हैं। प्रतियोगिता में बच्‍चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी शामिल होंगे। ग्रामीण परिवेश से जुड़े इन खेलों को लेकर संभवत: देश में पहली बार इतना बड़ा आयोजन हो रहा है।

 

पारंपरिक खेलों को शामिल किया गया

 

मालूम हो कि यह पहली दफा है जब छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 14 तरह के पारंपरिक खेलों को शामिल किया गया है जैसे कि गिल्ली डंडा, पिट्टूल, लंगड़ी दौड़, बांटी (कंचा), बिल्लस, फुगड़ी, गेड़ी दौड़, भंवरा की प्रतियोगिता वगैरह। इसका मकसद छत्तीसगढ़ की संस्‍कृति को आगे ले जाने और खेलकूद को बढ़ावा देना है।

 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य:

 

  • छत्तीसगढ़ राजधानी: रायपुर;
  • छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री: भूपेश बघेल;
  • छत्तीसगढ़ राज्यपाल: अनुसुइया उइके.

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World Post Day 2022: विश्व डाक दिवस का इतिहास और महत्व

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विश्व डाक दिवस हर साल 9 अक्टूबर को दुनिया भर में मनाया जाता है। इस दिन का मकसद लोगों और बिजनेस के लिए हर दिन काम आने वाले डाक विभाग की भूमिका के प्रति लोगों को जागरूक करना और सेलिब्रेट करना है। यह दिन वैश्विक सामाजिक और आर्थिक विकास में डाक के योगदान को बढ़ावा देने के लिए भी मनाया जाता है। पोस्ट दुनिया का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक नेटवर्क है। हर साल 150 से अधिक देश विभिन्न तरीकों से विश्व डाक दिवस मनाते हैं। कुछ देशों में, विश्व डाक दिवस को अवकाश के रूप में मनाया जाता है।

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विश्व डाक दिवस 2022 की थीम

 

विश्व डाक दिवस 2022 की थीम ‘पोस्ट फॉर प्लेनेट’ है। भारत में राष्ट्रीय डाक सप्ताह हर साल 9 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक मनाया जाता है। आपको बता दें की विश्व स्तर पर इस दिवस को यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन की स्थापना के दिन को चिह्नित करने के लिए मनाया जाता है।

 

विश्व डाक दिवस महत्व

विश्व डाक दिवस के माध्यम से लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं। इस दिवस को मुख्य तौर पर लोगों में डाक सेवाओं की भूमिका के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए इस दिवस को मनाया जाता है। इसके उद्देश्य की बात करें तो इसका मुख्य उद्देश्य देशों के विकास सेवा के आर्थिक और सामाजिक महत्व को आगे बढ़ाना है।

 

विश्व डाक दिवस का इतिहास

साल 1840 के समय में इंग्लैंड में एक प्रणाली की शुरुआत की गई थी। इस प्रणाली के तहत जो भी डाक पत्र होते थें उन पर भुगतान पहले यानी प्रीपेड करना होता था। इस प्रणाली की शुरुआत सर रॉलैंड हिल द्वारा की गई थी। इस प्रणाली में पत्रों के लिए प्रीपेड भुगातने के साथ घरेलु सेवा के लिए एक श्रेणी निश्चित की गई थी, जिसमें समान भार वाले सभी पत्रों के लिए एक समान दर वसूल किया जाता था। इतना ही नहीं सर रॉलैंड हिल ने ही दुनिया की पहली डाक टिकट भी पेश की थी।

 

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य:

 

  • यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन मुख्यालय: बर्न, स्विट्जरलैंड;
  • यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन की स्थापना: 9 अक्टूबर 1874;
  • यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन महानिदेशक: मासाहिको मेटेको।

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एचडीएफसी लाइफ ने शुरू किया इंश्योर इंडिया कैंपेन

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एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस ने ‘इंश्योर इंडिया’ अभियान शुरू किया है जिसका उद्देश्य उत्पाद श्रेणी के रूप में जीवन बीमा के लाभों पर भारतीयों को शिक्षित करना है। एचडीएफसी लाइफ भारत में अग्रणी जीवन बीमा कंपनियों में से एक है और पिछले तीन वर्षों में, एचडीएफसी ने वितरण भागीदारों के कई विशाल नेटवर्क के साथ जीवन बीमा जागरूकता माह को एक विशेष संपत्ति के रूप में स्थापित किया है।

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एचडीएफसी द्वारा ‘इंश्योर इंडिया’ अभियान से संबंधित प्रमुख बिंदु

  • इंश्योर इंडिया अभियान एचडीएफसी द्वारा शुरू किए गए जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला का नवीनतम जोड़ है।
  • अभियान का उद्देश्य भारतीयों को जीवन बीमा के बारे में शिक्षित करना और उन्हें अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए प्रेरित करना है।
  • एचडीएफसी लाइफ का मानना है कि इंश्योर इंडिया व्यक्तियों को वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में पहला कदम उठाने में सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • कंपनी चैट शो, ऑन-ग्राउंड गतिविधियों, वेबसाइटों आदि की मेजबानी करेगी।
  • ये संवादात्मक गतिविधियाँ उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वितरण के व्यापक नेटवर्क से जोड़ेगी।
  • इंश्योर इंडिया का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों में अधिक से अधिक व्यक्तियों तक पहुंच बनाना है।
  • एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड भारत के अग्रणी हाउसिंग फाइनेंस संस्थान एचडीएफसी लिमिटेड के बीच एक संयुक्त उद्यम है।

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World Mental Health Day 2022: जानें इसका महत्व और इतिहास

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हर साल 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) मनाया जाता है। इसका मकसद यह है कि लोगों के बीच मानसिक दिक्कतों को लेकर जागरूकता फैलाई जा सके। कोरोना महामारी के बाद से तो मानसिक रोगों से जूझ रहे लोगों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। यूनिसेफ की 2021 की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में लगभग 14 प्रतिशत बच्चे भी अवसाद में जी रहे हैं। तो इस दिन को इतने बड़े स्तर पर मनाने का केवल और सिर्फ उद्देश्य लोगों के बीच मानसिक सेहत के प्रति जागरूकता फैलाना है।

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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2022: थीम

हर साल इस दिन को एक नई थीम के साथ मनाया जाता है। इस साल की थीम ‘मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को वैश्विक प्राथमिकता बनाएं’ (Make Mental Health and Well-Being for All a Global Priority) है।

 

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: महत्व

हर साल 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। कोविड- 19 महामारी ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि हमारे शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध है। लेकिन अभी भी ज्यादातर लोग इसपर ध्यान नहीं देते। रिपोर्ट के अनुसार आज करीब 1 मिलियन से अधिक लोग मानसिक विकार के साथ जी रहे हैं जिसके फलस्वरूप प्रत्येक 40 सेकंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करके खुद की जान का दुश्मन बनता जा रहा है।

 

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: इतिहास

 

संयुक्त राष्ट्र संघ ने साल 1992 में विश्व मानसिक सेहत दिवस (World Mental Health Day) मनाने की शुरुआत की थी। इस दिन को मनाए जाने की सलाह साल 1994 में संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव यूजीन ब्रॉडी ने दी थी। विश्वस्तर पर इस दिन को मनाए जाने का मकसद लोगों को मानसिक सेहत के प्रति जागरुक करना है। इसे हर साल एक थीम के साथ सेलिब्रेट किया जाता है।

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आरबीआई ने यस बैंक के एमडी और सीईओ प्रशांत कुमार की 3 साल के लिए पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी

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निजी क्षेत्र के यस बैंक (Yes Bank) के प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के तौर पर प्रशांत कुमार की नियुक्ति को भारतीय रिजर्व बैंक ने स्वीकृति दे दी है। यस बैंक ने शेयर बाजारों को इस मंजूरी की सूचना देते हुए कहा कि कुमार छह अक्टूबर, 2022 से तीन वर्षों के लिए बैंक के एमडी एवं सीईओ के रूप में कार्यरत रहेंगे। हालांकि कुमार की इस नियुक्ति पर अभी शेयरधारकों की मंजूरी मिलनी बाकी है। प्रशांत कुमार को पहली बार मार्च 2020 में संकट के दौर से गुजर रहे इस बैंक की कमान सौंपी गई थी।

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प्रशांत कुमार: एक नजर में

 

  • प्रशांत कुमार भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व उप प्रबंध निदेशक और सीएफओ रह चुके हैं। प्रशांत कुमार को आरबीआई द्वारा पहले साल 2020 में भी केंद्रीय बैंक द्वारा यस बैंक के बोर्ड को हटाने के बाद नियुक्त किया गया था।
  • प्रशांत कुमार ने एसबीआई में क्रेडिट, मानव संसाधन और प्रशिक्षण प्रणाली जैसे विभिन्न क्षेत्रों में काम किया है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री पूरी की है।
  • इसके बाद वे साल 1983 में भारतीय स्टेट बैंक में शामिल हुए, उन्हें बैंकिंग क्षेत्र में 30 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने बैंक के कोलकाता और मुंबई सर्कल में एसबीआई के मुख्य महाप्रबंधक के रूप में भी काम किया है।

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विश्व बैंक ने घटाया भारत के आर्थिक विकास का अनुमान

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विश्व बैंक ने खराब वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देते हुए वित्त वर्ष 2022-23 के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर केअनुमान में कटौती करते हुए 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। यह पिछले जून 2022 के अनुमान से एक प्रतिशत कम है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की वार्षिक बैठक से पहले जारी अपने नवीनतम दक्षिण एशिया आर्थिक फोकस रिपोर्ट में विश्व बैंक ने कहा कि भारत दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में मजबूत हो रहा है।

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दक्षिण एशिया के विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री हैंस टिमर ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने दक्षिण एशिया के अन्य देशों की तुलना में अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि भारत के पास बाहरी ऋण का अधिक बोझ नहीं है, इस मोर्चे पर कोई समस्या नहीं है और भारत की मौद्रिक नीति भी विवेकपूर्ण है। भारतीय अर्थव्यवस्था ने विशेष रूप से सेवा क्षेत्र और इसके निर्यात में अच्छा प्रदर्शन किया है। पिछले वर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

विश्व बैंक ने कहा है कि भारत का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर है। यह अन्य देशों की तरह कमजोर नहीं है। लेकिन अभी इसे बढ़ती हुई कीमतों से जूझना पड़ रहा है। इसके रास्ते में कई चुनौतियां हैं। भारत में बफर स्टॉक की कमी नहीं है। केंद्रीय बैंक का भंडार भरा हुआ है। फिर भी भारत को कुछ प्रमुख मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है। भारत में फोकस मौजूदा बड़ी फर्मों और एफडीआई पर है। सामाजिक सुरक्षा पर सरकार का पूरा ध्यान है। यह अच्छा है, लेकिन पर्याप्त नहीं है।

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रूस-यूक्रेन के मानवाधिकार संगठनों और बेलारूस के मानवाधिकार कार्यकर्ता को नोबेल शांति पुरस्कार

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नोबेल शांति पुरस्कार का घोषणा कर दिया गया। यह पुरस्कार इस साल विश्व के सबसे अशांत क्षेत्र के नाम रहा, जिसके विजेता जेल में बंद बेलारूस के मानवाधिकार कार्यकर्ता एलेस बियालियात्स्की, रूसी मानवाधिकार संगठन ‘मेमोरियल’ और यूक्रेनी संगठन ‘सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज’ बने हैं। इससे पहले साहित्य के क्षेत्र में फ्रांस की लेखिका को नोबेल से सम्मानित किया गया था। पहली बार 1901 में इस पुरस्कार की शुरुआत की गई थी।

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तीनों नामों की घोषणा करते हुए नॉर्वेजियन नोबेल समिति की अध्यक्ष बेरिट रीज-एंडरसन ने कहा, इस बार का शांति पुरस्कार मानवाधिकार, लोकतंत्र और पड़ोसी देशों बेलारूस, रूस व यूक्रेन में शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के पैरोकारों को सम्मानित करने के लिए दिया गया है।

 

नोबेल शांति पुरस्कार

 

नोबेल शांति पुरस्कार ऐसे व्यक्ति या संस्था को दिया जाता है, जिन्होंने विश्व में शांति स्थापित करने या शांति को बढ़ावा देने के लिए बेहतरीन काम किया है। इन्हीं में एक बियालियात्स्की हैं, जो बेलारूस में साल 1980 के मध्य से ही लोकतांत्रिक आंदोलन के प्रमुख नेतृत्वकर्ता रहे हैं। तमाम दबावों के बावजूद वह अधिनायकवादी देश में मानवाधिकार, नागरिक अधिकारों के लिए खुलकर काम करते आए हैं।

 

नोबेल पुरस्कार दूसरा विजेता संगठन मेमोरियल सोवियत संघ के दौर में 1987 में बना था, जिसका कार्य साम्यवादी दमन के पीड़ितों की यादें सुनिश्चित रखना था। संघ के विघटन के बाद भी इसने रूस में मानवाधिकार के दमन की जानकारी जुटाना जारी रखा और राजनीतिक बंदियों के हाल पर भी नजर रखी।

 

सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज की स्थापना यूक्रेन में 2007 के दौरान जारी उथल-पुथल के बीच मानवाधिकार और लोकतंत्र के लिए हुई थी। तब से संगठन यूक्रेनी नागरिक समाज को मजबूत करने और सरकार पर देश को पूर्ण लोकंतत्र बनाने के लिए दबाव बनाता रहा है। फरवरी में रूसी आक्रमण के बाद से यह यूक्रेनी नागरिकों पर रूसी सेना के अपराधों को दस्तावेजों में दर्ज कर रहा है।

 

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धर्म बदलने वालों के SC दर्जे पर होगा विचार, पूर्व CJI की अगुवाई में आयोग गठित

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केंद्र सरकार ने पूर्व चीफ जस्टिस केजी बालकृष्णन की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया है। यह आयोग उन लोगों को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा देने पर विचार करेगा, जिनका ऐतिहासिक रूप से अनुसूचित जाति से ताल्लुक है लेकिन उन्होंने दूसरा धर्म अपना लिया है। संविधान में कहा गया है कि हिंदू या सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता है।

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सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की तरफ जारी अधिसूचना के अनुसार, तीन सदस्यीय आयोग में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. रविंदर कुमार जैन और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की सदस्य प्रोफेसर सुषमा यादव भी शामिल हैं। आयोग यह भी तय करेगा कि अगर उन्हें एससी का दर्जा दिया जाता है तो मौजूदा अनुसूचित जातियों पर इसका क्या असर पड़ेगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि इन लोगों के अन्य धर्मों में परिवर्तित होने के बाद, रीति-रिवाजों, परंपराओं और सामाजिक भेदभाव और अभाव की स्थिति में कैसा बदलाव आया। आयोग किसी भी अन्य संबंधित प्रश्नों पर भी मंथन कर सकता है।

 

केजी बालकृष्णन सुप्रीम कोर्ट ने पहले दलित चीफ जस्टिस थे। वह मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। अधिसूचना में कहा गया है कि यह मुद्दा मौलिक और ऐतिहासिक रूप से जटिल सामाजिक और संवैधानिक है। निश्चित रूप से यह सार्वजनिक महत्व का एक मामला है। इसकी संवेदनशीलता और प्रभाव को देखते हुए विस्तृत अध्ययन जरूरी है।

 

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