Supreme Court की पांच जजों की पीठ करेगी चुनावी बॉन्ड केस की सुनवाई

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सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों के चंदे से संबंधित चुनावी बॉन्ड योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई की। इस मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 30 अक्टूबर की तारीख तय की है। वही, कोर्ट ने इस मामले को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास भेज दिया है।

दलीलों पर सहमति जताते हुए सीजेआई ने कहा कि उठाए गए मुद्दे के महत्व को देखते हुए और भारत के संविधान के अनुच्छेद 145(4) के संबंध में, मामले को कम से कम पांच न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष रखा जाएगा। 30 अक्टूबर, 2023 के लिए ये सूचीबद्ध है। अदालत विधानसभा चुनावों के वर्ष में चुनावी बांड की बिक्री के लिए एडिशनल विंडो की अनुमति देने वाली केंद्र की हालिया अधिसूचना को चुनौती देने वाली कांग्रेस नेता डॉ. जया ठाकुर द्वारा दायर याचिका सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

 

12,000 करोड़ रुपये का भुगतान

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि जरूरी है कि राजनीतिक पार्टियों की फंडिंग से जुड़े इस मामले को एक बड़ी पीठ के पास भेजा जाए। बता दें कि जनहित याचिका याचिकाकर्ताओं में से एक ने मार्च में कहा था कि चुनावी बांड के माध्यम से अब तक राजनीतिक दलों को 12,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है और दो-तिहाई राशि एक प्रमुख राजनीतिक दल को गई है।

 

आम चुनाव के लिए यह योजना

कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि 2024 के आम चुनाव के लिए यह योजना शुरू होने से पहले इसका न्यायिक परीक्षण जरूरी है। गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ओर से पेश प्रशांत भूषण ने कहा था कि चुनावी बॉन्ड के जरिये अज्ञात स्रोतों से होने वाली फंडिंग भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है और भ्रष्टाचार मुक्त देश में रहने के नागरिकों के अधिकार का हनन कर रही है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।

 

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चालू वित्त वर्ष में 6.3 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था: फिक्की सर्वे

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वित्तीय क्षेत्र की अच्छी सेहत और निजी निवेश में बढ़ोतरी के कारण चालू वित्त वर्ष (2023-24) में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। उद्योग निकाय फिक्की के एक सर्वेक्षण में सोमवार को यह अनुमान लगाया गया है।

इसमें साथ ही कहा गया कि अर्थव्यवस्था के सामने गिरावट का जोखिम बना हुआ है। फिक्की के आर्थिक परिदृश्य सर्वेक्षण के ताजा दौर में 2023-24 के लिए वार्षिक औसत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत आंकी गई है। इसमें न्यूनतम छह प्रतिशत और अधिकतम 6.6 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।

 

कृषि और संबद्ध गतिविधियों की औसत वृद्धि 2.7 प्रतिशत

सर्वेक्षण के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में कृषि और संबद्ध गतिविधियों की औसत वृद्धि 2.7 प्रतिशत रह सकती है। यह आंकड़ा 2022-23 के चार प्रतिशत की तुलना में काफी कम है। सर्वेक्षण से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष में उद्योग और सेवा क्षेत्र में क्रमशः 5.6 प्रतिशत और 7.3 प्रतिशत वृद्धि होने का अनुमान है।

 

अर्थव्यवस्था के सामने गिरावट का खतरा

सर्वे में यह भी कहा गया क‍ि अर्थव्यवस्था के सामने गिरावट का खतरा बना हुआ है। फिक्की (FICCI) के इकोनॉम‍िक आउटलुक सर्वे के ताजा दौर में 2023-24 के लिए सालाना एवरेज जीडीपी (GDP) की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत आंकी गई है।

 

सर्व‍िस सेक्‍टर में 7.3 प्रतिशत का इजाफा

जीडीपी में न्यूनतम छह प्रतिशत और अधिकतम 6.6 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। सर्वे के अनुसार मौजूदा फाइनेंश‍िल ईयर में कृषि और संबद्ध गतिविधियों की औसत वृद्धि 2.7 प्रतिशत रह सकती है। यह आंकड़ा 2022-23 के चार प्रतिशत के मुकाबले काफी कम है। सर्वे से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष में इंडस्‍ट्री और सर्व‍िस सेक्‍टर में क्रमशः 5.6 प्रतिशत और 7.3 प्रतिशत का इजाफा होने का अनुमान है।

 

चीन में धीमी वृद्धि

रिपोर्ट में कहा गया क‍ि ‘भूराजनीतिक तनाव के कारण लगातार प्रतिकूल परिस्थितियां, चीन में धीमी वृद्धि, मौद्रिक सख्ती का कम असर और सामान्य से कम मानसून ने विकास के लिए नकारात्मक जोखिम पैदा किया है। सर्वे के अनुसार, औसत जीडीपी की व‍िकास दर 2023-24 की दूसरी और तीसरी त‍िमाही में 6.1% और 6% तक रहने का अनुमान है। इस सर्वे को स‍ितंबर के महीने में क‍िया गया था।

 

कीमत में बढ़ोतरी का जोखिम

इसमें इंडस्‍ट्री, बैंकिंग और फाइनेंश‍ियल सर्व‍िस सेक्‍टर का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख अर्थशास्त्रियों की प्रतिक्रियाओं को शाम‍िल क‍िया गया है। मूल्‍य में बढ़ोतरी पर सर्वे में ह‍िस्‍सा लेने वालों ने सुझाव द‍िया क‍ि महंगाई की द‍िशा अन‍िश्‍च‍ित बनी हुई है। इसमें कहा गया है कि सीपीआई (CPI) बेस्‍ड महंगाई दर भले ही चरम पर पहुंच गई है, लेकिन कीमत में बढ़ोतरी का जोखिम अभी भी बना हुआ है।

 

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श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने वाला झारखंड पहला राज्य

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झारखंड के विभिन्न जिलों में कार्यरत स्विगी-जोमैटो, ओला-ऊबर सहित ऑनलाइन डिलीवरी ब्वॉय भी जल्द ही न्यूनतम मजदूरी के दायरे में लाए जाएंगे। झारखंड सरकार की श्रम विभाग ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है।

झारखंड देश का पहला राज्य होगा जहां कॉन्ट्रैक्ट या कमीशन पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी न्यूनतम मजदूरी के दायरे में लाने की तैयारी की जा रही है। अब तक यह व्यवस्था देश के किसी भी राज्य में नहीं है। श्रम विभाग की ओर से झारखंड राज्य न्यूनतम मजदूरी परामर्शदातृ पर्षद ने एक कमेटी गठित की है।

 

इन प्रतिनिधियों को किया गया शामिल

इसमें श्रमायुक्त संजीव कुमार बेसरा, न्यूनतम मजदूरी के निदेशक राजेश प्रसाद, झारखंड चैंबर के अध्यक्ष किशोर मंत्री, इंटक के प्रदेश अध्यक्ष राकेश्वर पांडेय सहित सीटू, बीएमएस व एटक के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।

 

न्यूनतम मजदूरी ऐसे तय होगी

उक्त कमेटी स्विगी-जोमैटो, ओला-ऊबर ड्राइवर, गिग वर्कर, ऑनलाइन डिलीवरी ब्वॉय के काम की परिस्थिति (वर्किंग कंडीशन) के आधार पर इनकी न्यूनतम मजदूरी तय करेगी। झारखंड के विभिन्न जिलों में लगभग 12 लाख ऐसे कर्मचारी हैं और ऑनलाइन डिलीवरी का काम करते हैं। न्यूनतम मजदूरी भी बढ़ाने की अनुशंसा परामर्शदातृ पर्षद झारखंड में कार्यरत ठेका कर्मचारियों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने पर भी विचार कर रही है।

 

अनुभव के आधार पर न्यूनतम मजदूरी

वर्तमान में अकुशल से अतिकुशल, चार श्रेणी में कर्मचारी को उसकी योग्यता व अनुभव के आधार पर न्यूनतम मजदूरी मिलती है। इसे बढ़ाकर न्यूनतम 504 रुपये करने की अनुशंसा सदस्यों ने पूर्व में की थी।

 

दैनिक मजदूरी के अंतर को कम करने की पहल

समिति सदस्यों का कहना है कि केंद्र सरकार के किसी कार्यालय में कार्यरत ठेका सफाई कर्मचारी या मनरेगा कर्मचारियों को प्रतिदिन का 537 रुपये न्यूनतम मजदूरी मिलती है, जबकि ठेका कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों को 352 रुपये मिलते हैं। समिति समान प्रकृति का काम करने वाले मजदूरों की दैनिक मजदूरी के अंतर को कम करने की पहल कर रही है।

 

तीन श्रेणियों में बांटी जाएगी न्यूनतम मजदूरी

शहर के आधार पर तीन श्रेणियों में न्यूनतम मजदूरी बांटी जाएगी। भविष्य में ठेका कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी उनके कार्यरत शहर के आधार पर मिलेगी। इसके लिए समिति तीन श्रेणियों तैयार कर रही है।

इसमें रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो सहित बड़े शहरों में कार्यरत कर्मचारियों को ‘ए’ श्रेणी में नगर निगम-नगरपालिका व नगर पर्षद में कार्यरत कर्मचारियों को ‘बी’ जबकि ग्रामीण व सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को ‘सी’ श्रेणी में रखा जाएगा। संबधित शहर के लिविंग ऑफ स्टैंडर्ड के आधार पर उनकी न्यूनतम मजदूरी तय होगी।

 

Bharat Rashtra Samithi In Telangana Unveils Manifesto For Underprivileged_100.1

प्रधानमंत्री मोदी ग्लोबल मैरीटाइम इंडिया समिट 2023 का करेंगे उद्घाटन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 से 19 अक्टूबर तक मुंबई के एमएमआरडीए ग्राउंड में आयोजित होने वाले ग्लोबल मैरीटाइम इंडिया समिट 2023 (जीएमआईएस 2023) के तीसरे संस्करण का वस्तुतः उद्घाटन करेंगे। यह शिखर सम्मेलन 17 से 19 अक्टूबर तक मुंबई के एमएमआरडीए मैदान में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री भारतीय मैरीटाइम ब्‍लू इकॉनमी के लिए लॉन्‍ग टर्म ब्‍लूप्रिंट ‘अमृत काल विजन 2047’ का अनावरण करेंगे।

ब्लूप्रिंट बंदरगाह सुविधाओं को बढ़ाने, टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से रणनीतिक पहल का उल्‍लेख करता है। इस भविष्यवादी योजना के अनुरूप प्रधानमंत्री 23,000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। उन्‍हें राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा। ये भारतीय मैरीटाइम ब्‍ल्‍यू इकॉनमी के लिए ‘अमृत काल विजन 2047’ के अनुरूप हैं।

 

देश का सबसे बड़ा समुद्री कार्यक्रम

यह शिखर सम्मेलन देश का सबसे बड़ा समुद्री कार्यक्रम है। इसमें यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, एशियाई (मध्य एशिया, मध्य पूर्व और बिम्सटेक क्षेत्र सहित) देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले दुनियाभर के मंत्री हिस्‍सा लेंगे। शिखर सम्मेलन में दुनियाभर से ग्‍लोबल सीईओ, बिजनस लीडर्स, इंवेस्‍टर्स, अधिकारी और अन्य हितधारक भी भाग लेंगे। इसके अलावा, शिखर सम्मेलन में कई मंत्री और अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व भी करेंगे।

 

शिखर सम्‍मेलन तीन दिन चलेगा

यह शिखर सम्‍मेलन तीन दिन चलेगा। इसमें भविष्य के बंदरगाहों सहित समुद्री क्षेत्र के प्रमुख मुद्दों पर चर्चा और विचार-विमर्श किया जाएगा। इन मुद्दों में डीकार्बोनाइजेशन, कोस्‍टल शिपिंग और इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्टेशन, शिप बिल्डिंग, रिपेयर और रीसाइकिलिंग शामिल हैं। यह शिखर सम्मेलन देश के समुद्री क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए मंच भी प्रदान करेगा। पहला मैरीटाइम इंडिया शिखर सम्मेलन 2016 में मुंबई में आयोजित किया गया था। दूसरा मैरीटाइल शिखर सम्मेलन 2021 में आयोजित किया गया था।

 

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जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल बने मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश

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कानून एवं न्याय मंत्रालय ने दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल की मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जुलाई में जस्टिस मृदुल की मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की सिफारिश की थी।

जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल को 13 मार्च, 2008 को दिल्ली हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया था, जहां वे वरिष्ठतम न्यायाधीश के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनकी अध्यक्षता वाली पीठ ने पिछले सप्ताह बटला हाउस मुठभेड़ मामले में आरिज खान की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।

 

फारिश और नियुक्ति के बीच तीन महीने की देरी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सिफारिश और नियुक्ति के बीच तीन महीने की देरी हो गई है। दरअसल, कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्रीय कानून मंत्रालय ने सात जुलाई को मणिपुर के मुख्यमंत्री और राज्यपाल को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने जस्टिस मृदुल की नियुक्ति को लेकर उनके विचार मांगे थे। राज्य सरकार ने तीन महीने बाद इस पत्र का जवाब दिया।

 

जानिए कॉलेजियम क्या होता है?

दरअसल, कॉलेजियम हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति की एक व्यवस्था है। ये व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट ने खुद तय की है। इसके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और जजों के ट्रांसफर पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और चार अन्य सबसे सीनियर जजों का समूह फैसला लेता है। इसी तरह हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति की सिफारिश उस हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और दो सबसे सीनियर जजों का समूह करता है। इन सिफारिशों की समीक्षा सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और दो सबसे सीनियर जज करते हैं।

कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिशों को सरकार राष्ट्रपति के पास भेजती है। इन सिफारिशों को मानना राष्ट्रपति और सरकार के लिए अनिवार्य होता है। सरकार चाहे तो कॉलेजियम से एक बार ये अनुरोध कर सकती है कि वह अपनी सिफारिश पर पुनर्विचार करे, लेकिन कॉलेजियम ने वही सिफारिश फिर से भेज दी, तो सरकार के लिए उसे मंजूर करना जरूरी होता है।

 

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भारत की थोक मुद्रास्फीति लगातार छठे महीने नेगेटिव

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भारत में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित थोक मुद्रास्फीति सितंबर तक लगातार छठे महीने नकारात्मक क्षेत्र में बनी रही। भारत सरकार की ओर से सोमवार को इसके आधिकारिक आंकड़े जारी कर दिए गए।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में थोक मुद्रास्फीति अगस्त के (-) 0.52 प्रतिशत के मुकाबले (-) 0.26 प्रतिशत और जुलाई के पिछले महीने (-) 1.23 प्रतिशत पर आ गई। माना जा रहा कि रासायनिक उत्पादों, खनिज तेल, कपड़ा, बुनियादी धातुओं और खाद्य उत्पादों की कीमतों में गिरावट के कारण ये स्थिति बनी है।

 

थोक मूल्यों के सूचकांक जारी

दरअसल सरकार मासिक आधार पर हर महीने की 14 तारीख पर थोक मूल्यों के सूचकांक जारी करती है। इस बार 14 तारीख को शनिवार और 15 को रविवार था, ऐसे में सोमवार को इसे जारी किया गया।

 

थोक मुद्रास्फीति 8.39 प्रतिशत

अक्टूबर 2022 में कुल मिलाकर थोक मुद्रास्फीति 8.39 प्रतिशत थी और तब से इसमें गिरावट आई है। विशेष रूप से थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति पिछले साल सितंबर तक लगातार 18 महीनों तक दोहरे अंक में रही थी।

 

थोक मुद्रास्फीति क्या है?

थोक मुद्रास्फीति में वस्तुओं की कीमत थोक विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं के स्तर पर आंकी जाती है। इसमें सबसे अधिक भारांश विनिर्मित उत्पादों के हैं। वहीं खुदरा महंगाई खुदरा दुकानदारों के स्तर आंकी जाती है।

 

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श्रम शक्ति में महिलाओं की भागीदारी 37 प्रतिशत हुई

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सरकार ने जानकारी दी है कि देश में महिला श्रम बल भागीदारी दर पहले के मुकाबले बढ़ी है। केंद्र सरकार ने कहा कि देश के श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी 4.2 प्रतिशत बढ़कर 37 प्रतिशत हो गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, महिला श्रम बल भागीदारी दर 2018-19 में बढ़कर 24.5 प्रतिशत हो गई थी जो 2017-18 में 23.3 प्रतिशत थी।

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 में महिला श्रम बल भागीदारी दर 30 प्रतिशत थी जो 2020-21 में बढ़कर 32.5 प्रतिशत हो गई। यह दर 2021-22 में 32.8 प्रतिशत थी जो 2022-23 में बढ़कर 37 प्रतिशत हो गई। मंत्रालय ने कहा कि 09 अक्टूबर, 2023 को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण रिपोर्ट 2022-23 से पता चलता है कि देश में महिला श्रम बल भागीदारी दर 2023 में 4.2 प्रतिशत बढ़कर 37 प्रतिशत हो गई है।

Female Labour Force Participation Rate Jumps to 37.0%

महिला सशक्‍तिकरण सुनिश्चित

महिला श्रम बल भागीदारी दर में यह महत्वपूर्ण उछाल महिलाओं के दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक विकास के उद्देश्य से की गई नीतिगत पहलों से महिला सशक्‍तिकरण सुनिश्चित करने के सरकार के निर्णायक कार्यक्रम का परिणाम है। सरकार की पहल महिलाओं के जीवनचक्र तक फैली हुई है, जिसमें लड़कियों की शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता सुविधा और कार्यस्थल में सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर पहल शामिल हैं। इन क्षेत्रों में नीतियां और कानून सरकार के ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं।

 

आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण क्या है ?

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने अप्रैल 2017 में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य, ‘वर्तमान साप्ताहिक स्थिति’ (सीडब्लूएस ) में केवल शहरी क्षेत्रों के लिये तीन माह के अल्‍पकालिक अंतराल पर प्रमुख रोज़गार और श्रमिक-जनसंख्या अनुपात, श्रम बल भागीदारी दर, बेरोज़गारी दर का अनुमान लगाना, प्रतिवर्ष ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में सामान्य स्थिति (पीएस+एसएस) और सीडब्लूएस दोनों में रोज़गार एवं बेरोज़गारी संकेतकों का अनुमान लगाना हैं।

 

महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि

श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी सीधे रूप से आर्थिक विकास से संबंधित है। जब महिला आबादी के एक महत्त्वपूर्ण हिस्से का उपयोग कम हो जाता है तो इसके परिणामस्वरूप संभावित उत्पादकता और आर्थिक उत्पादन का नुकसान होता है। श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि होने से उच्च सकल घरेलू उत्पाद और समग्र आर्थिक समृद्धि में योगदान हो सकता है।

 

गरीबी रेखा से बाहर निकलने में मदद

महिला सशक्‍तिकरण सुनिश्चित करने के सरकार के निर्णायक कार्यक्रम से महिलाओं को आय-अर्जित करने के अवसरों तक पहुँच प्रदान करने से यह उनके परिवारों को गरीबी रेखा से बाहर निकलने में मदद कर सकती है जिससे जीवन स्तर बेहतर हो सकता है तथा परिवारों की स्थिति में सुधार हो सकता है।

 

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2023-24 में भारत की अपेक्षित आर्थिक वृद्धि

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विश्व बैंक के नवीनतम भारत विकास अपडेट (आईडीयू) के अनुसार, भारत ने वैश्विक चुनौतियों के बीच उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है। कठिन वैश्विक माहौल के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2012/23 में 7.2% की दर से बढ़ी, जिससे यह सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गई।

 

विकास के प्रमुख चालक

मजबूत घरेलू मांग: भारत की मजबूत आंतरिक मांग ने इसके आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बुनियादी ढांचे में निवेश: सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण निवेश ने आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया।

वित्तीय क्षेत्र की ताकत: वित्तीय क्षेत्र मजबूत हुआ, जिसने समग्र आर्थिक लचीलेपन में योगदान दिया।

बैंक क्रेडिट में वृद्धि: FY23/24 की पहली तिमाही में बैंक क्रेडिट में 15.8% की वृद्धि हुई, जो एक स्वस्थ वित्तीय वातावरण का संकेत देता है।

 

चुनौतियाँ और वैश्विक कारक

वैश्विक विपरीत परिस्थितियां: उच्च वैश्विक ब्याज दरें, भू-राजनीतिक तनाव और सुस्त वैश्विक मांग जैसी चुनौतियाँ बनी रहने की उम्मीद है।

अनुमानित वृद्धि: चुनौतीपूर्ण बाहरी परिस्थितियों और कम मांग के कारण FY23/24 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि 6.3% होने का अनुमान है।

क्षेत्रीय विकास: चुनौतियों के बावजूद, सेवा क्षेत्र में 7.4% की वृद्धि होने का अनुमान है, और निवेश 8.9% पर मजबूत रहने का अनुमान है।

 

मुद्रास्फीति और राजकोषीय उपाय

मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी: खाद्य पदार्थों की बढ़ी कीमतों के कारण जुलाई में मुद्रास्फीति बढ़कर 7.8% हो गई, लेकिन इसके धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है।

राजकोषीय आउटलुक: राजकोषीय समेकन जारी रहने की उम्मीद है, राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 6.4% से घटकर 5.9% होने का अनुमान है। सार्वजनिक ऋण सकल घरेलू उत्पाद के 83% पर स्थिर हो रहा है।

बाहरी संतुलन: विदेशी निवेश प्रवाह और महत्वपूर्ण विदेशी भंडार द्वारा समर्थित, चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 1.4% तक कम होने की उम्मीद है।

 

भविष्य की रणनीतियाँ

सार्वजनिक-निजी सहयोग: निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सार्वजनिक व्यय का उपयोग करने से भारत के लिए वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने और उच्च विकास हासिल करने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ तैयार होंगी।

नीति अनुशंसाएँ: विश्व बैंक विकास में तेजी लाने के लिए निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देने और वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन से उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाने का सुझाव देता है।

 

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अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस 2023: 17 अक्टूबर

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अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty) हर साल 17 अक्टूबर को दुनिया भर में मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य दुनिया भर में, विशेष रूप से विकासशील देशों में गरीबी और गरीबी उन्मूलन की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

रीबी उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस 2023 के लिए थीम, ‘सभ्य कार्य और सामाजिक सुरक्षा: सभी के लिए सम्मान को व्यवहार में लाना’ है। इस साल का थीम उन लोगों के लिए है गरीबी के कारण ज्यादा मेहनत करना पड़ता है। उन्हें मजबूरी में अनियमित परिस्थितियों में लंबे समय तक खतरनाक काम करना होता है। इसके बाद भी अपने परिवार के लिए पर्याप्त आय अर्जित नहीं कर पाते हैं। थीम में सभी कामगारों के लिए गरीमा, सामाजिक सुरक्षा, उचित वेतन और सुरक्षा प्रदान होनी चाहिए। यह विषय राजनीतिक नेताओं और नीति निर्माताओं से मानवीय गरिमा का उपयोग करने का आह्वान भी है।

 

भारत में गरीबी

2011 में राष्ट्रीय गरीबी रेखा के अनुसार, भारत में लगभग 21.9% जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे है। वर्तमान में गरीबी रेखा ग्रामीण क्षेत्रों में 1,059.42 रुपए प्रति माह और शहरी क्षेत्रों में 1,286 रुपए प्रति माह है। भारत में गरीबी का आकलन नीति आयोग की टास्क फोर्स द्वारा सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय द्वारा प्राप्त आंकड़ों के आधार पर गरीबी रेखा की गणना के माध्यम से किया जाता है।

 

इस दिन का इतिहास:

इस वर्ष, महासभा द्वारा 22 दिसंबर 1992 के संकल्प 47/196 में, 17 अक्टूबर को गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित घोषणा की 27वीं वर्षगांठ है। इस वर्ष फादर जोसेफ व्रेसिंस्की (Joseph Wresinski) द्वारा कॉल टू एक्शन की 32 वीं वर्षगांठ भी है – जिसने 17 अक्टूबर को अत्यधिक गरीबी पर काबू पाने के लिए विश्व दिवस के रूप में मनाने के लिए प्रेरित किया – और संयुक्त राष्ट्र द्वारा उस दिन को अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस के रूप में मान्यता दी गई।

 

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World Anaesthesia Day 2023: Theme, History and Significance_110.1

फिनिश के पूर्व राष्ट्रपति और नोबेल शांति पुरस्कृत मार्टी अहतिसारी का निधन

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अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने में योगदान के लिए 2008 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित फिनलैंड के पूर्व राष्ट्रपति व नोबेल विजेता मार्टी अहतिसारी का 16 अक्टूबर 2023 को निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। हिंसक संघर्षों को रोकने एवं सुलझाने के लिए अहतिसारी द्वारा गठित फाउंडेशन ने उनके निधन की पुष्टि की। 2021 में यह घोषणा की गई थी कि अहतिसारी अल्जाइमर से पीड़ित हैं। उन्हें निरस्त्रीकरण प्रक्रिया की निगरानी का काम सौंपा गया था।

फिनलैंड के राष्ट्रपति साउली निनिस्तो ने एक बयान में कहा कि यह बहुत दुखद घटना है। हमने मार्टी अहतिसारी को खो दिया। वह परिवर्तन के समय के राष्ट्रपति थे, जिन्होंने फिनलैंड को वैश्विक यूरोपीय संघ के युग में पहुंचाया। साल 2021 में, पता चला था कि अहतिसारी अल्जाइमर रोग से पीड़ित थे।

 

शांति समझौते करने में मदद

रिपोर्ट के मुताबिक, अहतिसारी ने 1990 के दशक के अंत में कोसोवो से सर्बिया की वापसी, 1980 के दशक में नामीबिया की स्वतंत्रता की कोशिश और 2005 में इंडोनेशिया में आचे प्रांत की स्वायत्तता से संबंधित शांति समझौते करने में मदद की थी। वे 1990 के दशक के अंत में उत्तरी आयरलैंड शांति प्रक्रिया में भी शामिल थे। उन्हें आतंकवादी समूह आईआरए (आइरिश रिपब्लिकन आर्मी) की निरस्त्रीकरण प्रक्रिया की निगरानी का काम सौंपा गया था।

 

1994 से 2000 तक फिनलैंड के राष्ट्रपति

अक्टूबर 2008 में जब नॉर्वे की नोबेल शांति समिति ने अहतिसारी को चुना, तो उसने ”कई महाद्वीपों में और तीन दशक से भी अधिक समय तक अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने में उनके महत्वपूर्ण प्रयासों” का जिक्र किया था। अहतिसारी छह साल यानी 1994 से 2000 तक फिनलैंड के राष्ट्रपति रहे। उन्होंने बाद में एक हेलसिंकी स्थित संकट प्रबंधन पहल की स्थापना की। जिसका उद्देश्य अनौपचारिक वार्ता और मध्यस्थता के माध्यम से हिंसक संघर्षों को रोकना और उनका समाधान करना है।

 

संयुक्त राष्ट्र में शामिल

अहतिसारी ने 20 साल विदेश में बिताए 23 जून, 1937 को पूर्वी शहर वियापुरी में जन्मे अहतिसारी 1965 में फिनलैंड के विदेश मंत्रालय में शामिल होने से पहले एक प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक थे। उन्होंने लगभग 20 साल विदेश में बिताए, पहले तंजानिया, सांबिया और सोमालिया में राजदूत के रूप में और फिर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में। उसके बाद वह संयुक्त राष्ट्र में शामिल हो गए और 1990 में नामीबिया को आजादी दिलाने वाले संयुक्त राष्ट्र अभियान का नेतृत्व करने से पहले इसके न्यूयॉर्क मुख्यालय में काम किया।

 

विदेश मंत्रालय के राज्य सचिव के रूप में काम किया

अहतिसारी 1970 के दशक में अफ्रीका में अपने राजनयिक कार्यकाल के दौरान नामीबियाई लोगों को स्वतंत्रता के लिए तैयार करने के उद्देश्य से की गई गतिविधियों में गहराई से शामिल हो गए थे। 1978 में अहतिसारी को संयुक्त राष्ट्र महासचिव कर्ट वाल्डहेम द्वारा नामीबिया के विशेष प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया गया था, और 1980 के दशक के अंत में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के प्रमुख के रूप में अपने जनादेश के तहत अफ्रीकी राष्ट्र को स्वतंत्रता की ओर ले जाने के लिए उन्हें व्यापक रूप से श्रेय दिया जाता है। 1991 में फ़िनलैंड लौटने के बाद, अहतिसारी ने 1994 में छह साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति चुने जाने से पहले विदेश मंत्रालय के राज्य सचिव के रूप में काम किया। वह पहले फिनिश राज्य प्रमुख थे जिन्हें चुनावी मंडल के बजाय सीधे चुना गया था।

 

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