नए म्यूचुअल फंड नियम: SEBI ने अप्रैल 2026 से परफॉर्मेंस-बेस्ड खर्च स्ट्रक्चर की अनुमति दी

भारत का म्यूचुअल फंड उद्योग एक बड़े नियामकीय परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंड नियमों में व्यापक संशोधन को अधिसूचित किया है, जिसके तहत पहली बार प्रदर्शन से जुड़ी शुल्क व्यवस्था (Performance-linked Expense Charging) की अनुमति दी गई है। दिसंबर 2025 में स्वीकृत यह नया ढांचा 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और इसका मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता, सुशासन और निवेशक संरक्षण को मजबूत करना है।

क्यों चर्चा में है? 

SEBI ने नए म्यूचुअल फंड विनियम अधिसूचित किए हैं, जिनके तहत योजनाओं को प्रदर्शन-आधारित बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) वसूलने की अनुमति दी गई है। इसके साथ ही अधिक कड़े प्रकटीकरण (डिस्क्लोज़र) मानक और मजबूत गवर्नेंस नियम लागू होंगे, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे।

SEBI के म्यूचुअल फंड नियमों में प्रमुख बदलाव

  • यह लगभग तीन दशकों में म्यूचुअल फंड ढांचे का पहला व्यापक सुधार है।
  • नए नियमों में नई खर्च संरचना, सख्त डिस्क्लोज़र मानक और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) के ट्रस्टी व वरिष्ठ प्रबंधन की जिम्मेदारियों का विस्तार किया गया है।
  • उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निवेशकों पर लगने वाले खर्च पारदर्शी, उचित और फंड के प्रदर्शन से जुड़े हों।

प्रदर्शन-आधारित खर्च व्यवस्था 

  • सुधारों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रदर्शन से जुड़ी शुल्क व्यवस्था है।
  • इसके तहत म्यूचुअल फंड योजनाएं बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) को योजना के प्रदर्शन से जोड़कर वसूल सकेंगी, बशर्ते SEBI द्वारा तय शर्तों का पालन किया जाए।
  • इसका अर्थ है कि AMC तभी अधिक शुल्क कमा पाएंगी जब वे बेहतर रिटर्न देंगी, जिससे फंड मैनेजर और निवेशकों के हितों में बेहतर तालमेल बनेगा।

बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) की शुरुआत

  • नए नियमों में BER की अवधारणा लाई गई है, जो केवल निवेशकों के धन के प्रबंधन के लिए AMC द्वारा लिया जाने वाला शुल्क दर्शाता है।
  • पहले सभी खर्च टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) में शामिल होते थे।
  • अब ब्रोकरेज, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT), स्टांप ड्यूटी और एक्सचेंज शुल्क जैसे खर्च अलग-अलग दिखाने होंगे।
  • इससे निवेशकों के लिए लागत की स्पष्टता और तुलना आसान होगी।

मजबूत डिस्क्लोज़र और पारदर्शिता नियम

  • खर्चों के अलग-अलग प्रकटीकरण से निवेशकों को यह साफ़ तौर पर पता चलेगा कि उनका पैसा कहां खर्च हो रहा है।
  • SEBI का मानना है कि इससे विभिन्न योजनाओं और AMC के बीच तुलना सरल होगी।
  • बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े फंड्स पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन कुल मिलाकर निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

कड़ा गवर्नेंस और निगरानी तंत्र

  • संशोधित ढांचे में ट्रस्टी और प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों की भूमिका और जवाबदेही बढ़ाई गई है।
  • निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है ताकि AMC निवेशकों के सर्वोत्तम हित में काम करें।
  • यह SEBI की व्यापक रणनीति के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य वित्तीय संस्थानों में सुशासन को सुदृढ़ करना है।

ब्रोकरेज सीमा का युक्तिकरण

  • SEBI ने ट्रेडिंग लागत घटाने के लिए ब्रोकरेज सीमा भी कम की है।
  • कैश मार्केट में ब्रोकरेज कैप को लगभग 8.59 बेसिस प्वाइंट से घटाकर 6 bps किया गया है।
  • डेरिवेटिव्स सेगमेंट में यह सीमा 3.89 bps से घटाकर 2 bps कर दी गई है।
  • इससे म्यूचुअल फंड योजनाओं की कुल लेन-देन लागत कम होने की उम्मीद है।

GAIL ने महाराष्ट्र गैस पाइपलाइन के लिए 694 किमी की ऐतिहासिक परियोजना पूरी की

भारत ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड ने महाराष्ट्र में एक अनोखी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना को पूरा किया है। यह 694 किलोमीटर लंबी मुंबई–नागपुर प्राकृतिक गैस पाइपलाइन लगभग पूरी तरह एक एक्सप्रेसवे के किनारे मात्र 3 मीटर चौड़े कॉरिडोर में बिछाई गई है। यह देश की पहली ऐसी परियोजना है, जो यह दर्शाती है कि एकीकृत योजना के तहत परिवहन कॉरिडोर को उपयोगिता (यूटिलिटी) कॉरिडोर के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्यों चर्चा में है? 

गेल ने समृद्धि महामार्ग के किनारे बने 3 मीटर चौड़े यूटिलिटी स्ट्रिप में निर्मित मुंबई–नागपुर प्राकृतिक गैस पाइपलाइन (MNPL) को पूरा कर लिया है। इस परियोजना को पीएम गति शक्ति के अंतर्गत एकीकृत अवसंरचना विकास का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

पाइपलाइन परियोजना को क्या बनाता है विशिष्ट

  • 694 किमी लंबी इस पाइपलाइन में से लगभग 675 किमी (करीब 96%) हिस्सा केवल 3 मीटर चौड़े कॉरिडोर में बिछाया गया है।
  • सामान्यतः गैस पाइपलाइन के लिए 20–30 मीटर चौड़ी जगह की आवश्यकता होती है, लेकिन इस परियोजना में 24 इंच व्यास की उच्च क्षमता वाली पाइपलाइन को फुटपाथ जितनी जगह में स्थापित किया गया।
  • इतनी सीमित जगह में काम करने से इंजीनियरिंग डिज़ाइन, निर्माण क्रम और समृद्धि महामार्ग का निर्माण कर रही MSRDC के साथ समन्वय बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।

इंजीनियरिंग चुनौतियाँ और नवाचार

  • सबसे कठिन हिस्सा पश्चिमी घाट, विशेषकर फुगले पहाड़ी क्षेत्र, रहा जहाँ ऊँचाई में 200 मीटर से अधिक का अंतर था।
  • पथरीली ज़मीन, घने जंगल और भारी मानसूनी बारिश ने निर्माण को जटिल बना दिया।
  • इंजीनियरों ने हॉरिज़ॉन्टल डायरेक्शनल ड्रिलिंग (HDD) और थ्रस्टर सिस्टम के संयुक्त उपयोग से लगभग 1 किमी लंबी पाइपलाइन को खड़ी ढलानों के नीचे से निकाला।
  • मानसून के दौरान ढलान स्थिरीकरण, पानी निकासी और सुरक्षा उपाय अपनाए गए, जो उच्च सुरक्षा मानकों और अनुशासित कार्य निष्पादन को दर्शाते हैं।

समन्वय और नियामकीय चुनौतियाँ

  • परियोजना को मई 2020 में मंज़ूरी मिली, लेकिन कोविड-19 और 10 जिलों में फैले लगभग 56 किमी वन क्षेत्र की मंज़ूरी में देरी के कारण काम प्रभावित हुआ, जो अंततः अप्रैल 2023 में मिली।
  • गेल ने 16 एक्सप्रेसवे पैकेजों और तीन पाइपलाइन खंडों के साथ दैनिक समन्वय कर कार्य की गति बनाए रखी।
  • गेल और MSRDC के बीच यह संयुक्त कार्य मॉडल अब भविष्य की कॉरिडोर-आधारित परियोजनाओं के लिए एक संदर्भ मॉडल माना जा रहा है।

आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रभाव

  • MNPL की क्षमता लगभग 16.5 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन है और इसमें द्विदिश प्रवाह की सुविधा है।
  • यह पाइपलाइन 16 जिलों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन, लगभग 95 लाख घरों को पाइप्ड नेचुरल गैस, और 1,700 से अधिक CNG स्टेशनों को ईंधन उपलब्ध कराएगी।
  • इससे बिजली, उर्वरक, रसायन और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही स्वच्छ ईंधन के उपयोग और समृद्धि महामार्ग कॉरिडोर के आसपास MSME और औद्योगिक विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

RBI का बड़ा कदम: बैंकिंग शिकायतों के लिए बनेगा CRPC

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्तीय प्रणाली में उपभोक्ता अनुभव को बेहतर बनाने के लिए शिकायत निवारण ढांचे में एक बड़ा सुधार घोषित किया है। इसके तहत RBI अब इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम के अंतर्गत शिकायतों के निपटान के लिए एक केंद्रीकृत केंद्र स्थापित करेगा। यह नई व्यवस्था देशभर के उपभोक्ताओं के लिए तेज़, पारदर्शी और सुलभ शिकायत निवारण सुनिश्चित करेगी।

क्यों चर्चा में है? 

भारतीय रिज़र्व बैंक ने सेंट्रलाइज़्ड रिसीट एंड प्रोसेसिंग सेंटर (CRPC) की स्थापना की घोषणा की है, जो 1 जुलाई 2026 से इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम के तहत लागू होगा।

केंद्रीय शिकायत प्रसंस्करण केंद्र (CRPC) क्या है?

  • CRPC एक राष्ट्रीय स्तर का एकल केंद्र होगा, जहां ईमेल और डाक के माध्यम से प्राप्त शिकायतों की प्रारंभिक जांच की जाएगी।
  • इसका मुख्य कार्य यह तय करना होगा कि कोई शिकायत इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम के तहत स्वीकार्य है या नहीं।
  • प्रारंभिक जांच को केंद्रीकृत करने से देरी कम होगी, दोहराव समाप्त होगा और सभी शिकायतों के साथ एक समान प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

शिकायतों का निपटान कैसे होगा?

  • ऑनलाइन दर्ज शिकायतें सीधे RBI के Complaint Management System (CMS) पोर्टल पर पंजीकृत होंगी।
  • ईमेल या डाक से प्राप्त शिकायतें पहले CRPC द्वारा जांची जाएंगी।
  • स्वीकार्य शिकायतों को आगे RBI ओम्बड्समैन या डिप्टी ओम्बड्समैन द्वारा निपटाया जाएगा।
  • निर्णय लेते समय बैंकिंग कानूनों, RBI के नियमों और संबंधित दिशानिर्देशों को ध्यान में रखा जाएगा।
  • इससे शिकायत निवारण में निष्पक्षता और एकरूपता सुनिश्चित होगी।

इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम का उद्देश्य

  • यह योजना बैंकों और RBI द्वारा विनियमित संस्थाओं के ग्राहकों के लिए कम खर्चीला, त्वरित और गैर-विवादात्मक शिकायत निवारण तंत्र प्रदान करती है।
  • संशोधित नियमों से इस प्रणाली की दक्षता और पहुंच और मजबूत होगी।
  • RBI ने स्पष्ट किया है कि इसका लक्ष्य लंबी कानूनी प्रक्रियाओं के बिना विवादों का समाधान करना है, जिससे आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों को राहत मिले।

मुआवज़ा प्रावधान 

  • शिकायत के मूल्य पर कोई अधिकतम सीमा नहीं है, यानी बड़ी राशि से जुड़े विवाद भी ओम्बड्समैन के पास ले जाए जा सकते हैं।
  • परिणामी नुकसान (Consequential Loss) के लिए ओम्बड्समैन अधिकतम ₹30 लाख तक का मुआवज़ा दे सकता है।
  • इसके अलावा, समय की हानि, खर्च, उत्पीड़न या मानसिक पीड़ा के लिए अधिकतम ₹3 लाख तक का अतिरिक्त मुआवज़ा दिया जा सकता है।

RBI ओम्बड्समैन प्रणाली का महत्व

  • यह प्रणाली बैंकों, NBFCs और अन्य RBI-नियंत्रित संस्थाओं के ग्राहकों के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान मंच प्रदान करती है।
  • अदालतों या ट्रिब्यूनल में जाए बिना, यहां शिकायतों का सरल और प्रभावी समाधान संभव होता है।

मार्च में ‘भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026’ का होगा आयोजन

भारत ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़े वैश्विक आयोजन की मेज़बानी के लिए तैयार है। भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 (Bharat Electricity Summit 2026) की घोषणा के साथ, देश स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण, लचीली बिजली प्रणालियों और वैश्विक सहयोग पर केंद्रित एक चार दिवसीय सम्मेलन-सह-प्रदर्शनी आयोजित करेगा। यह शिखर सम्मेलन ऊर्जा अभाव से ऊर्जा प्रचुरता की ओर भारत की यात्रा और वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में उसकी बढ़ती नेतृत्व भूमिका को दर्शाता है।

क्यों चर्चा में?

केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोजर लाल ने घोषणा की है कि भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन 19 से 22 मार्च 2026 तक यशोभूमि, नई दिल्ली में किया जाएगा।

भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 के बारे में

  • यह बिजली और ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक वैश्विक सम्मेलन-सह-प्रदर्शनी है।
  • इसका उद्देश्य उत्पादन, पारेषण, वितरण, भंडारण और स्मार्ट उपभोग से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करते हुए वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में भारत की नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित करना है।
  • इसमें सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और नागरिक समाज के हितधारक भाग लेंगे, जिससे सतत ऊर्जा प्रणालियों के भविष्य पर व्यापक विमर्श हो सके।

थीम और प्रमुख फोकस क्षेत्र

  • शिखर सम्मेलन की थीम है: “Electrifying Growth. Empowering Sustainability. Connecting Globally.”
  • यह सतत विकास और मजबूत विद्युत अवसंरचना के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
  • चर्चा के मुख्य विषय होंगे: स्वच्छ ऊर्जा तैनाती, ऊर्जा दक्षता, ग्रिड लचीलापन, बैटरी भंडारण, ऊर्जा संक्रमण प्रौद्योगिकियाँ और वैश्विक साझेदारियाँ।

आयोजन का पैमाना और वैश्विक भागीदारी

  • चार दिनों में 50 से अधिक उच्चस्तरीय सत्र, विशेषज्ञ पैनल चर्चाएँ, थीम आधारित पवेलियन और तकनीकी प्रदर्शन होंगे।
  • 500 से अधिक प्रदर्शक, 25,000 से अधिक प्रतिभागी, 1,000+ प्रतिनिधि और 300 वक्ता भारत व विश्व भर से भाग लेंगे।
  • यह इसे भारत द्वारा आयोजित सबसे बड़े बिजली क्षेत्र आयोजनों में से एक बनाता है।

उद्योग और निवेश के अवसर

  • यह मंच वैश्विक नीति-निर्माताओं, सीईओ, निवेशकों, नियामकों और नवोन्मेषकों को जोड़ेगा।
  • Buyer-Seller Meet के माध्यम से साझेदारियों को गति दी जाएगी।
  • सम्मेलन का लक्ष्य निवेश को आकर्षित करना, सीमा-पार सहयोग बढ़ाना और स्वच्छ बिजली समाधानों के त्वरित कार्यान्वयन को प्रोत्साहित करना है।

आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीन अमोनिया प्रोजेक्ट लगेगा

भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को एक महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला है, क्योंकि आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में विश्व की सबसे बड़ी ग्रीन अमोनिया परियोजना स्थापित की जा रही है। एएम ग्रीन (AM Green) द्वारा विकसित इस परियोजना में लगभग 10 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा। इसका उद्देश्य भारत को ग्रीन अमोनिया के वैश्विक निर्यातक के रूप में स्थापित करना, जलवायु लक्ष्यों को समर्थन देना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।

क्यों चर्चा में?

आंध्र प्रदेश काकीनाडा में विश्व की सबसे बड़ी ग्रीन अमोनिया परियोजना की मेजबानी करेगा। एएम ग्रीन 2030 तक चरणबद्ध रूप से परियोजना को चालू करेगा और इसके माध्यम से भारत के पहले ग्रीन अमोनिया निर्यात को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

परियोजना का अवलोकन और निवेश योजना

  • यह परियोजना काकीनाडा में स्थित एक मौजूदा अमोनिया-यूरिया कॉम्प्लेक्स को परिवर्तित करके विकसित की जा रही है।
  • कुल नियोजित निवेश 10 अरब डॉलर है।
  • अंतिम उत्पादन क्षमता 1.5 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) होगी।

चरणबद्ध कमीशनिंग योजना:

  • 2027 तक: 0.5 MTPA
  • 2028 तक: 1.0 MTPA
  • 2030 तक: पूर्ण क्षमता 1.5 MTPA

पूर्ण होने पर यह परियोजना विश्व की सबसे बड़ी ग्रीन अमोनिया सुविधा होगी।

एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा आधार

  • काकीनाडा संयंत्र को पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित किया जाएगा।
  • इसके लिए लगभग 7.5 गीगावाट सौर और पवन ऊर्जा क्षमता, 1,950 मेगावाट इलेक्ट्रोलाइज़र क्षमता और लगभग 2 गीगावाट चौबीसों घंटे उपलब्ध नवीकरणीय बिजली शामिल होगी।
  • ऊर्जा भंडारण की आवश्यकता पंप्ड हाइड्रो परियोजनाओं से पूरी की जाएगी, जिसमें आंध्र प्रदेश की पिन्नापुरम पंप्ड स्टोरेज परियोजना भी शामिल है, जिससे निरंतर स्वच्छ बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

निर्यात और वैश्विक बाजार से जुड़ाव

  • यह परियोजना भारत के पहले ग्रीन अमोनिया निर्यात को संभव बनाएगी।
  • जर्मनी, जापान और सिंगापुर के लिए आपूर्ति की योजना है।
  • एएम ग्रीन ने जर्मनी की यूनिपर (Uniper) कंपनी के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौता किया है और जापान व सिंगापुर के खरीदारों के साथ उन्नत बातचीत चल रही है।
  • इससे भारत स्वच्छ ईंधन के एक भरोसेमंद वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरेगा।

रोजगार और क्षेत्रीय आर्थिक प्रभाव

  • निर्माण चरण के दौरान लगभग 8,000 नौकरियों के सृजन की उम्मीद है।
  • संचालन के दौरान दीर्घकालिक रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
  • नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, बंदरगाह सेवाओं और सहायक उद्योगों में अप्रत्यक्ष रोजगार बढ़ेगा, जिससे आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास को बल मिलेगा।

ग्रीन अमोनिया का महत्व

  • ग्रीन अमोनिया वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में एक महत्वपूर्ण ईंधन के रूप में उभर रहा है।
  • इसका उपयोग स्वच्छ शिपिंग ईंधन, बिजली उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में ग्रीन हाइड्रोजन के वाहक के रूप में किया जा सकता है।
  • भारत के लिए, उर्वरक क्षेत्र में ग्रीन अमोनिया का घरेलू उपयोग आयात निर्भरता घटाने, उत्सर्जन कम करने और वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में सहायक होगा।

ग्रीन अमोनिया और ऊर्जा संक्रमण

  • ग्रीन अमोनिया का उत्पादन नवीकरणीय बिजली और ग्रीन हाइड्रोजन से किया जाता है, जिससे पारंपरिक अमोनिया उत्पादन से जुड़े कार्बन उत्सर्जन समाप्त हो जाते हैं।
  • यह दुनिया के सबसे प्रदूषणकारी उद्योगों के लिए एक शून्य-कार्बन विकल्प माना जाता है और दीर्घकालिक डीकार्बोनाइजेशन रणनीतियों का एक प्रमुख स्तंभ है।

इंडिया पोस्ट ने पहला ONDC ऑर्डर डिलीवर किया, डिजिटल लॉजिस्टिक्स के दौर में कदम रखा

भारत के डाक नेटवर्क ने डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पहली बार डाक विभाग ने ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) के माध्यम से बुक किए गए एक ऑनलाइन ऑर्डर की सफल डिलीवरी की है। यह उपलब्धि पारंपरिक डाक सेवाओं से आगे बढ़कर भारत पोस्ट की भूमिका को दर्शाती है और भारत के डिजिटल कॉमर्स व लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को मजबूत करने में उसके बढ़ते महत्व को रेखांकित करती है।

क्यों चर्चा में?

डाक विभाग ने 15 जनवरी 2026 को ONDC के तहत लॉजिस्टिक्स सर्विस प्रोवाइडर (LSP) के रूप में अपना पहला ऑनलाइन ऑर्डर सफलतापूर्वक डिलीवर किया।

ONDC पर पहली डिलीवरी: एक महत्वपूर्ण उपलब्धि

  • पहला ऑनलाइन कंसाइनमेंट 13 जनवरी 2026 को बुक किया गया था, जिसे दो दिनों के भीतर सफलतापूर्वक डिलीवर कर दिया गया।
  • यह ऑर्डर उद्यमवेल (UdyamWell) द्वारा दिया गया था, जो ग्रामीण उद्यमियों को समर्थन देने वाली एक ONDC-सक्षम पहल है।
  • यह सफल लेनदेन दर्शाता है कि डाक विभाग आधुनिक डिजिटल कॉमर्स वातावरण में एक सक्षम लॉजिस्टिक्स पार्टनर के रूप में कार्य करने के लिए तैयार है, जहां वह अपने व्यापक भौतिक नेटवर्क को तकनीक-आधारित प्रक्रियाओं के साथ जोड़ रहा है।

ONDC प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण

ONDC के साथ एकीकरण के माध्यम से, डाक विभाग ONDC-सक्षम खरीदार ऐप्स पर मौजूद विक्रेताओं को पार्सल पिकअप, बुकिंग, परिवहन और अंतिम मील डिलीवरी के लिए इंडिया पोस्ट को चुनने का विकल्प प्रदान करता है।

यह व्यवस्था विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर निर्बाध लॉजिस्टिक्स सेवाएं सुनिश्चित करती है और छोटे विक्रेताओं को अधिक विकल्प देती है, विशेषकर उन व्यवसायों को जिन्हें निजी लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तक पहुंच नहीं होती।

‘क्लिक एंड बुक’ मॉडल क्या है?

  • वर्तमान में डाक विभाग ONDC पर “क्लिक एंड बुक” मॉडल के तहत कार्य कर रहा है।
  • इस प्रणाली में विक्रेता डिजिटल रूप से पिकअप अनुरोध जनरेट कर सकते हैं, इंडिया पोस्ट को अपना लॉजिस्टिक्स पार्टनर चुन सकते हैं और अपने परिसर से ही पार्सल पिकअप करवा सकते हैं।
  • पिकअप के समय डाक शुल्क लिया जाता है, जबकि कंसाइनमेंट को इंडिया पोस्ट की तकनीक-सक्षम लॉजिस्टिक्स प्रणाली के माध्यम से ट्रैक और डिलीवर किया जाता है।
  • यह मॉडल मैनुअल कागजी कार्य को कम करता है और विक्रेताओं के लिए लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया को सरल बनाता है।

MSME और भारतप्रेन्योर्स के लिए बड़ा प्रोत्साहन

  • पहला ऑर्डर उद्यमवेल द्वारा दिया गया, जो कारीगरों, किसानों और ग्रामीण उद्यमियों सहित भारतप्रेन्योर्स को सशक्त बनाने पर केंद्रित पहल है।
  • ONDC पर लॉजिस्टिक्स पार्टनर के रूप में इंडिया पोस्ट की भागीदारी से MSMEs और छोटे विक्रेताओं को देशभर के बाजारों तक पहुंच मिलेगी, वह भी अधिक लागत वहन किए बिना।
  • यह कदम दूरदराज के उत्पादकों को डिजिटल मार्केटप्लेस से जोड़कर समावेशी विकास को बढ़ावा देता है।

ONDC और इंडिया पोस्ट

  • ONDC एक सरकारी पहल है, जिसका उद्देश्य एक खुला और इंटरऑपरेबल डिजिटल कॉमर्स नेटवर्क तैयार करना है।
  • इंडिया पोस्ट दुनिया के सबसे बड़े डाक नेटवर्क्स में से एक का संचालन करता है, जिससे वह अंतिम मील कनेक्टिविटी का एक महत्वपूर्ण सक्षमकर्ता बनता है।

व्यक्तिगत इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने में केरल सबसे आगे

भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी यात्रा में केरल ने चुपचाप एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। वर्ष 2025 में, केरल ने प्रमुख ईवी राज्यों में व्यक्तिगत चार-पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की सबसे ऊँची हिस्सेदारी दर्ज की। समय पर बनाई गई नीतियों, तेजी से बढ़ते चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत मध्यम वर्ग की भागीदारी के चलते केरल ने कई बड़े और अधिक औद्योगीकृत राज्यों को ईवी पैठ में पीछे छोड़ दिया है।

क्यों चर्चा में?

2025 में केरल ने शीर्ष ईवी-बिक्री वाले राज्यों में व्यक्तिगत चार-पहिया ईवी अपनाने की सबसे अधिक हिस्सेदारी दर्ज की। घरेलू स्तर पर मजबूत मांग और सहायक नीतियों के कारण राज्य ने बड़े औद्योगिक राज्यों को पीछे छोड़ा।

व्यक्तिगत चार-पहिया ईवी में केरल की बढ़त

  • 2025 में केरल के मध्यम वर्गीय परिवारों ने बड़ी संख्या में निजी चार्जिंग बॉक्स लगाए, जिससे इलेक्ट्रिक कारों का स्वामित्व और संचालन आसान हुआ।
  • घरेलू स्तर पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के इस विस्तार ने केरल को शीर्ष दस ईवी राज्यों में व्यक्तिगत चार-पहिया ईवी अपनाने में सबसे आगे पहुंचा दिया।
  • अन्य राज्यों में जहां ईवी वृद्धि मुख्य रूप से फ्लीट या व्यावसायिक वाहनों से प्रेरित है, वहीं केरल की सफलता व्यक्तिगत स्वामित्व पर आधारित है, जो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में उपभोक्ताओं के बढ़ते भरोसे और दीर्घकालिक लागत बचत को दर्शाती है।

प्रारंभिक नीतिगत समर्थन और ईवी इकोसिस्टम

  • केरल 2019 में ईवी नीति घोषित करने वाले शुरुआती भारतीय राज्यों में शामिल था।
  • इस नीति का मुख्य फोकस चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रोत्साहन और जागरूकता पर रहा।
  • समय के साथ इस सक्रिय दृष्टिकोण ने उपभोक्ताओं और निर्माताओं दोनों के लिए एक सहायक ईवी इकोसिस्टम तैयार किया।
  • निरंतर नीतिगत समर्थन से अपनाने की बाधाएं कम हुईं, होम चार्जिंग को बढ़ावा मिला और केरल कई बड़े राज्यों से पहले एक परिपक्व ईवी बाजार के रूप में उभरा।

कुल व्यक्तिगत ईवी अपनाने में प्रदर्शन

  • चार-पहिया वाहनों के अलावा, दो-पहिया और चार-पहिया दोनों को मिलाकर कुल व्यक्तिगत ईवी अपनाने में केरल, कर्नाटक के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष स्थान पर है।
  • पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाहनों की तुलना में ईवी की पैठ देश में सबसे अधिक में से एक है।
  • 2025 में, ईवी-से-आईसीई वाहन अनुपात में केरल दिल्ली के बाद दूसरे स्थान पर रहा, जो उपभोक्ता परिवहन विकल्पों में संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है।

मध्यम वर्ग की भूमिका

केरल की ईवी सफलता का सबसे बड़ा कारण उसका मजबूत और पर्यावरण के प्रति जागरूक मध्यम वर्ग है। बढ़ती ईंधन कीमतें, शहरी घनत्व और उच्च साक्षरता दर ने परिवारों को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
घरेलू चार्जिंग से सार्वजनिक चार्जरों पर निर्भरता घटी, जबकि रोजमर्रा की तय यात्रा आवश्यकताओं ने ईवी स्वामित्व को व्यावहारिक बनाया। यही उपभोक्ता-नेतृत्व वाला बदलाव केरल को उन राज्यों से अलग करता है, जहां ईवी अपनाने की गति मुख्य रूप से व्यावसायिक फ्लीट्स द्वारा संचालित है।

अमेरिका ने इन 75 देशों के लिए अप्रवासी वीज़ा प्रक्रिया स्थगित की

अमेरिका ने आव्रजन नियमों में बड़ी सख्ती करते हुए 75 देशों के नागरिकों के लिए इमिग्रेंट (स्थायी निवास) वीज़ा प्रक्रिया पर अनिश्चितकालीन रोक लगाने की घोषणा की है। यह फैसला ट्रंप प्रशासन द्वारा लिया गया है और इसका कोई तय अंत समय नहीं है। यह कदम अमेरिकी आव्रजन नीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है, जिसके वैश्विक स्तर पर व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं।

क्यों चर्चा में?

21 जनवरी 2026 से अमेरिका ने 75 देशों के नागरिकों के लिए इमिग्रेंट वीज़ा प्रोसेसिंग को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया है। यह निर्णय ट्रंप प्रशासन की कड़ी आव्रजन नीति का हिस्सा है।

अमेरिकी फैसले के बारे में

  • ट्रंप प्रशासन ने स्थायी रूप से अमेरिका में रहने और काम करने के इच्छुक लोगों के लिए जारी किए जाने वाले इमिग्रेंट वीज़ा पर रोक लगाई है।
  • यह निलंबन व्यक्तिगत मामलों पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीयता के आधार पर लागू किया गया है।
  • यह फैसला अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका, मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप के कई देशों को प्रभावित करता है।
  • पर्यटक, व्यापार, छात्र और अस्थायी कार्य वीज़ा इस फैसले के दायरे में नहीं आते—यानी रोक केवल स्थायी निवास मार्गों पर है।

वीज़ा निलंबन के पीछे कारण

  • अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह फैसला उस कानूनी प्रावधान पर आधारित है जिसके तहत ऐसे आवेदकों को वीज़ा देने से इनकार किया जा सकता है, जो भविष्य में सरकारी कल्याण योजनाओं पर निर्भर हो सकते हैं।
  • हालांकि, पहली बार इस अधिकार का उपयोग राष्ट्रीयता-आधारित सामूहिक प्रतिबंध के रूप में किया गया है।
  • विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि यह कदम “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत आव्रजन प्रणाली के दुरुपयोग को रोकने और सार्वजनिक संसाधनों की रक्षा के लिए उठाया गया है।

किन देशों पर असर पड़ेगा?

  • इस निलंबन में 75 देश शामिल हैं, जिनमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, ईरान, रूस, नाइजीरिया, ब्राज़ील, थाईलैंड, सोमालिया और नेपाल जैसे देश शामिल हैं।
  • ये देश कई महाद्वीपों में फैले हैं, जिससे यह नीति हाल के वर्षों की सबसे व्यापक राष्ट्रीयता-आधारित आव्रजन पाबंदियों में से एक बन जाती है।
  • इससे अमेरिका की ओर होने वाले वैश्विक प्रवासन प्रवाह पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है।

किन पर असर नहीं पड़ेगा?

  • यह प्रतिबंध पर्यटक, व्यापार, छात्र और अस्थायी कार्य वीज़ा पर लागू नहीं होता, जिनमें खेल आयोजनों से जुड़ी यात्राएँ (जैसे आगामी फीफा वर्ल्ड कप) भी शामिल हैं।
  • दोहरे नागरिकता वाले व्यक्तियों को छूट मिल सकती है, यदि उनके पास किसी गैर-सूचीबद्ध देश का पासपोर्ट हो।
  • यदि किसी यात्रा को अमेरिकी राष्ट्रीय हित में माना जाता है, तो अपवाद संभव हैं।
  • हालांकि, जिन इमिग्रेंट वीज़ा को मंज़ूरी मिल चुकी है लेकिन अभी प्रिंट नहीं हुए हैं, उन्हें भी नए निर्देशों के तहत अस्वीकार करना अनिवार्य होगा।

यहाँ पूरी लिस्ट है

अफ्रीका

  • अल्जीरिया
  • कैमरून
  • केप वर्डे
  • कोटे डी आइवर
  • डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो
  • मिस्र
  • इरिट्रिया
  • इथियोपिया
  • गाम्बिया
  • घाना
  • गिनी
  • हैती
  • लाइबेरिया
  • लीबिया
  • मोरक्को
  • नाइजीरिया
  • रिपब्लिक ऑफ द कांगो
  • रवांडा
  • सेनेगल
  • सिएरा लियोन
  • सोमालिया
  • दक्षिण सूडान
  • सूडान
  • तंजानिया
  • टोगो
  • ट्यूनीशिया
  • युगांडा

एशिया

  • अफगानिस्तान
  • आर्मेनिया
  • अज़रबैजान
  • बांग्लादेश
  • भूटान
  • म्यांमार
  • कंबोडिया
  • फिजी
  • जॉर्जिया
  • ईरान
  • इराक
  • जॉर्डन
  • कजाकिस्तान
  • किर्गिस्तान
  • लाओस
  • लेबनान
  • मंगोलिया
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • सीरिया
  • थाईलैंड
  • उज़्बेकिस्तान
  • यमन

यूरोप (पूर्वी और बाल्कन राज्यों सहित)

  • अल्बानिया
  • बेलारूस
  • बोस्निया और हर्जेगोविना
  • कोसोवो
  • मोल्दोवा
  • मोंटेनेग्रो
  • उत्तरी मैसेडोनिया
  • रूस

लैटिन अमेरिका और कैरिबियन

  • एंटीगुआ और बारबुडा
  • बहामास
  • बारबाडोस
  • बेलीज
  • ब्राजील
  • कोलंबिया
  • क्यूबा
  • डोमिनिका
  • ग्रेनाडा
  • ग्वाटेमाला
  • जमैका
  • निकारागुआ
  • सेंट किट्स और नेविस
  • सेंट लूसिया
  • सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस
  • उरुग्वे

मध्य पूर्व

  • ईरान
  • इराक
  • कुवैत
  • लेबनान
  • लीबिया
  • सीरिया
  • यमन

CSIR-NIScPR ने अपना पाँचवाँ स्थापना दिवस मनाया

CSIR–NIScPR ने जनवरी 2026 में अपना पाँचवाँ स्थापना दिवस (14 जनवरी 2026) मनाया। इस अवसर पर संस्थान ने विज्ञान संचार, साक्ष्य-आधारित नीति अनुसंधान तथा पारंपरिक ज्ञान के सत्यापन में अपनी बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि किस प्रकार संस्थान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), बहुभाषी पहुँच और वैश्विक सहभागिता के माध्यम से भारत के विकसित होते विज्ञान-नीति परिदृश्य को सशक्त बना रहा है।

क्यों चर्चा में?

CSIR-NIScPR ने अपना 5वाँ स्थापना दिवस मनाया, जिसमें विज्ञान संचार, AI एकीकरण, पारंपरिक ज्ञान के सत्यापन और नीति अनुसंधान से जुड़ी पहलों को प्रदर्शित किया गया। साथ ही SVASTIK वेब पोर्टल का शुभारंभ भी किया गया।

CSIR-NIScPR के बारे में

  • CSIR–National Institute of Science Communication and Policy Research परिषद्-ए-वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान (CSIR) के अंतर्गत एक प्रमुख संस्थान है।
  • यह विज्ञान संचार, विज्ञान नीति अनुसंधान और पारंपरिक ज्ञान के सत्यापन पर कार्य करता है।
  • संस्थान वैज्ञानिक अनुसंधान, नीति-निर्माताओं और समाज के बीच सेतु (ब्रिज) की भूमिका निभाता है।

विज्ञान संचार की दृष्टि और AI का एकीकरण

  • निदेशक गीता वाणी रायसम ने अपने संबोधन में संस्थान की विज्ञान संचार में विरासत और भविष्य-उन्मुख दृष्टि को रेखांकित किया।
  • उन्होंने वैश्विक संस्थानों के साथ सहयोग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर बल दिया, विशेषकर भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञान संचार को सशक्त बनाने के लिए, ताकि समावेशिता और सामाजिक प्रभाव बढ़ाया जा सके।

पारंपरिक ज्ञान और नीति अनुसंधान की मजबूती

  • कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL) रहा।
  • विश्वजननी जे. सत्तीगेरी, प्रमुख, CSIR-TKDL इकाई, ने TKDL को भारत के पारंपरिक ज्ञान के सत्यापन की एक अद्वितीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य प्रणाली बताया।
  • TKDL के पूर्ण डिजिटलीकरण के बाद, CSIR-NIScPR उन्नत अनुसंधान उपकरणों का उपयोग कर साक्ष्य-आधारित नीति अनुसंधान को और सुदृढ़ करने की स्थिति में है।

ANRF का दृष्टिकोण और वैश्विक आकांक्षाएँ

  • मुख्य अतिथि शिवकुमार कल्याणरमन, सीईओ, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) ने भारत को वैश्विक अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में NIScPR की भूमिका की सराहना की।
  • उन्होंने संस्थान को “वैश्विक सोच” अपनाने, तथा वैज्ञानिकों, अभियंताओं और AI विशेषज्ञों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
  • साथ ही, उन्होंने अनुसंधान निष्कर्षों को सरल बनाने और सार्वजनिक प्रभाव बढ़ाने हेतु ANRF के Saral AI टूल के उपयोग का सुझाव दिया।

SVASTIK का शुभारंभ और ज्ञान प्रसार

  • इस अवसर पर SVASTIK वेब पोर्टल का औपचारिक शुभारंभ किया गया।
  • CSIR-NIScPR द्वारा क्रियान्वित SVASTIK एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक रूप से सत्यापित पारंपरिक ज्ञान का प्रसार करना है।
  • यह पोर्टल अंग्रेज़ी, 19 भारतीय भाषाओं और 5 विदेशी भाषाओं में सामग्री उपलब्ध कराता है, जिससे पहुंच, समावेशिता और अंतरराष्ट्रीय पहुँच में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

यमन के प्रधानमंत्री ने इस्तीफा दिया, विदेश मंत्री को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया

यमन में जनवरी 2026 में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है। देश की सऊदी अरब समर्थित नेतृत्व व्यवस्था ने प्रधानमंत्री के इस्तीफे को स्वीकार करते हुए तुरंत नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति की है। यह नेतृत्व परिवर्तन ऐसे समय में हुआ है जब यमन लंबे गृहयुद्ध, क्षेत्रीय तनाव और खाड़ी देशों की भू-राजनीति से जुड़ी अस्थिरता का सामना कर रहा है।

क्यों चर्चा में?

यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (Presidential Leadership Council – PLC) ने प्रधानमंत्री सलेम बिन ब्रेक का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और देश के विदेश मंत्री शाया मोहसेन ज़िंदानी को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया है।

यमन के राजनीतिक नेतृत्व में बदलाव

  • सरकारी मीडिया के अनुसार, सऊदी समर्थित नेतृत्व परिषद ने इस सप्ताह की शुरुआत में दिए गए सलेम बिन ब्रेक के इस्तीफे को औपचारिक रूप से मंजूरी दी।
  • इसके बाद विदेश मंत्री रहे शाया मोहसेन ज़िंदानी को नया मंत्रिमंडल गठित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
  • यह कदम राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों के बीच शासन में निरंतरता बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल की भूमिका

  • वर्तमान में यमन का शासन प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल द्वारा किया जा रहा है, जिसका गठन सऊदी अरब के समर्थन से हूती विरोधी राजनीतिक शक्तियों को एकजुट करने के लिए किया गया था।
  • इस परिषद के पास कार्यकारी अधिकार हैं, जिनमें प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल की नियुक्ति शामिल है।
  • इस्तीफे की स्वीकृति और त्वरित नई नियुक्ति, चल रहे आंतरिक विभाजनों और बाहरी दबावों के बावजूद राजनीतिक स्थिरता का संदेश देने का प्रयास है।

क्षेत्रीय तनाव: सऊदी अरब और यूएई

  • हाल के महीनों में यमन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच बढ़ते तनाव का केंद्र बन गया है।
  • दिसंबर में सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) — जो यूएई समर्थित अलगाववादी समूह है — ने दक्षिणी और पूर्वी यमन के कई इलाकों पर नियंत्रण कर लिया।
  • सऊदी सीमा के पास STC की बढ़त ने रियाद की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।

पृष्ठभूमि: यमन का गृहयुद्ध

  • सऊदी अरब और यूएई पहले ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक साझा गठबंधन में शामिल थे, जो यमन के उत्तरी हिस्सों के बड़े क्षेत्र पर नियंत्रण रखते हैं।
  • 2015 में शुरू हुए इस संघर्ष ने दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक को जन्म दिया है, जिसमें खाद्य असुरक्षा, बड़े पैमाने पर विस्थापन और बुनियादी सेवाओं का पतन शामिल है।
  • भले ही बड़े पैमाने की लड़ाई की तीव्रता कुछ कम हुई हो, लेकिन राजनीतिक विखंडन और क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता अब भी देश को अस्थिर बनाए हुए हैं।

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