भारत ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयोजित गाज़ा पुनर्निर्माण और स्थिरीकरण पर केंद्रित प्रथम “बोर्ड ऑफ पीस” बैठक में एक पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया।वॉशिंगटन डीसी में भारत का प्रतिनिधित्व उप मिशन प्रमुख नामग्या सी खम्पा ने किया। इस बैठक में 40 से अधिक देशों और यूरोपीय संघ ने भाग लिया।
हालांकि भारत बोर्ड का औपचारिक सदस्य नहीं बना, लेकिन उसकी उपस्थिति गाज़ा संघर्ष और क्षेत्रीय शांति प्रयासों से जुड़े विकसित हो रहे कूटनीतिक प्रयासों में उसकी सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है।
ट्रंप का “गाज़ा बोर्ड ऑफ पीस” क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप ने इस बोर्ड का गठन निम्न उद्देश्यों से किया—
- गाज़ा के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना
- एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (Stabilisation Force) को संगठित करना
- संरचित शांति ढांचा (Structured Peace Framework) को बढ़ावा देना
यह बैठक डोनाल्ड जे. ट्रम्प शांति संस्थान में आयोजित की गई, जिसमें यूरोप, एशिया और मध्य-पूर्व के नेता शामिल हुए।
पर्यवेक्षक के रूप में भारत की भूमिका
भारत ने बोर्ड का सदस्य बनने के बजाय पर्यवेक्षक के रूप में भाग लेने का निर्णय लिया। अन्य पर्यवेक्षक देशों में शामिल थे—
- जर्मनी
- इटली
- नॉर्वे
- स्विट्ज़रलैंड
- यूनाइटेड किंगडम
भारत की यह भागीदारी इज़राइल-फिलिस्तीन मुद्दे पर उसकी संतुलित और सावधानीपूर्ण कूटनीतिक नीति को दर्शाती है, जिसमें वह औपचारिक पक्षधरता से बचते हुए संवाद में शामिल रहता है।
भारत-पाकिस्तान युद्धविराम पर ट्रंप की टिप्पणी
- बैठक के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा दोहराया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच पूर्व संघर्ष को व्यापार शुल्क (टैरिफ) की धमकी देकर रुकवाया था।
- उन्होंने कहा कि यदि दोनों देश शत्रुता समाप्त नहीं करते, तो वे 200% टैरिफ लगा सकते थे।
- हालांकि भारत ने आधिकारिक रूप से इस दावे को खारिज किया है। भारत का कहना है कि सैन्य तनाव में कमी दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMOs) के बीच प्रत्यक्ष वार्ता के बाद हुई थी।
पाकिस्तान की भागीदारी
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif इस बैठक में बोर्ड सदस्य के रूप में शामिल हुए।
ट्रंप ने कार्यक्रम के दौरान शरीफ और पाकिस्तान की सैन्य नेतृत्व की सराहना की।
यह दक्षिण एशिया से जुड़ी भू-राजनीतिक संवेदनशीलताओं को भी उजागर करता है।
वैश्विक भागीदारी और गाज़ा पुनर्निर्माण एजेंडा
40 से अधिक देशों और यूरोपीय संघ ने भागीदारी की पुष्टि की। मुख्य एजेंडा बिंदु थे—
- गाज़ा में युद्धोत्तर पुनर्निर्माण
- स्थिरीकरण एवं शांति स्थापना तंत्र
- अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संसाधनों का संकलन
यह पहल गाज़ा में दीर्घकालिक स्थिरता के लिए व्यापक शांति योजना का हिस्सा बताई जा रही है।
गाज़ा पर भारत की कूटनीतिक नीति
भारत परंपरागत रूप से समर्थन करता है—
- दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution)
- शांतिपूर्ण संवाद
- मानवीय सहायता
पर्यवेक्षक के रूप में भाग लेकर भारत ने पश्चिम एशिया की राजनीति में अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए कूटनीतिक संवाद में सक्रिय सहभागिता दिखाई है।


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