भारत ने वैश्विक विमानन निर्माण केंद्र बनने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अडानी समूह और ब्राज़ील की विमान निर्माता कंपनी एम्ब्रेयर (Embraer) के बीच भारत में विमान निर्माण को लेकर एक अहम समझौता हुआ है। यह साझेदारी न केवल अडानी समूह के लिए वाणिज्यिक विमान निर्माण क्षेत्र में प्रवेश का संकेत है, बल्कि भारत के एयरोस्पेस वैल्यू चेन में स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने के दीर्घकालिक लक्ष्य के अनुरूप भी है।
खबर में क्यों?
अडानी समूह और एम्ब्रेयर ने भारत में विमान निर्माण, सप्लाई चेन, प्रशिक्षण और रखरखाव सेवाओं में सहयोग की संभावनाओं को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
अडानी–एम्ब्रेयर समझौते का उद्देश्य क्या है?
इस समझौते का मुख्य फोकस भारत में एक क्षेत्रीय परिवहन विमान (Regional Transport Aircraft) परियोजना स्थापित करने पर है, जिसमें विमान निर्माण, कलपुर्ज़ों का उत्पादन, आफ्टरमार्केट सेवाएँ और पायलट प्रशिक्षण शामिल हैं। हालांकि वित्तीय विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन यह साझेदारी विमान उत्पादन के स्थानीयकरण की दिशा में एक रणनीतिक कदम मानी जा रही है।
अडानी समूह के लिए यह वाणिज्यिक विमान निर्माण में औपचारिक प्रवेश है, जो हवाई अड्डों, रक्षा और एयरोस्पेस में उसकी मौजूदा मौजूदगी को और मजबूत करेगा। वहीं एम्ब्रेयर के लिए भारत एक तेज़ी से बढ़ता विमानन बाज़ार और मज़बूत औद्योगिक आधार प्रदान करता है।
एम्ब्रेयर कौन है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
एम्ब्रेयर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी विमान निर्माता कंपनी है, जो एयरबस और बोइंग के बाद आती है। यह मुख्य रूप से 70 से 140 यात्रियों की क्षमता वाले क्षेत्रीय जेट विमानों के लिए जानी जाती है, खासकर अपनी E2 सीरीज़ के लिए।
ये विमान कम और मध्यम दूरी की उड़ानों के लिए उपयुक्त हैं और भारत की क्षेत्रीय संपर्क आवश्यकताओं के लिहाज़ से बेहद उपयोगी माने जाते हैं। एम्ब्रेयर के विमान एयरबस A220 से प्रतिस्पर्धा करते हैं, लेकिन बड़े वाइड-बॉडी विमानों से उनका टकराव नहीं होता।
भारत इस साझेदारी के लिए रणनीतिक क्यों है?
भारत दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते विमानन बाज़ारों में शामिल है। उड़ान (UDAN) जैसी योजनाओं के तहत क्षेत्रीय हवाई संपर्क की मांग लगातार बढ़ रही है। सरकार भी चाहती है कि भारत केवल विमान असेंबली तक सीमित न रहे, बल्कि कलपुर्ज़ों और प्रणालियों के पूर्ण पैमाने पर निर्माण में भी वैश्विक भूमिका निभाए। इससे पहले एम्ब्रेयर ने महिंद्रा के साथ C-390 सैन्य परिवहन विमान परियोजना में साझेदारी की थी, जो भारत के प्रति उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती
अडानी–एम्ब्रेयर साझेदारी ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों को मज़बूती देती है। विमान निर्माण जैसे उच्च तकनीक वाले क्षेत्र में निवेश से कुशल रोज़गार सृजित होंगे, तकनीकी हस्तांतरण होगा और एमएसएमई आधारित सप्लाई चेन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, इससे नागरिक विमानन और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए भारत की आयात पर निर्भरता भी कम होगी।


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