लद्दाख में वार्षिक स्पितुक गुस्तोर महोत्सव की शुरुआत हो गई है, जिसने पूरे क्षेत्र को रंग-बिरंगे दृश्य, पवित्र अनुष्ठानों और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया है। यह उत्सव ऐतिहासिक स्पितुक मठ में आयोजित किया जाता है और विश्व शांति व समृद्धि के लिए सप्ताहभर चली प्रार्थनाओं के बाद मनाया जाता है। यह पर्व लद्दाख की कठोर सर्दियों के पहले और सबसे ठंडे चरण के समापन का भी प्रतीक माना जाता है।
क्यों चर्चा में है?
दो दिवसीय स्पितुक गुस्तोर महोत्सव लद्दाख के स्पितुक मठ में आरंभ हुआ है। यह क्षेत्र का वर्ष का पहला मठीय उत्सव है और मौसमी परिवर्तन का संकेत देता है।
स्पितुक गुस्तोर महोत्सव क्या है?
- स्पितुक गुस्तोर लद्दाख के सबसे प्राचीन बौद्ध मठों में से एक, स्पितुक मठ में मनाया जाने वाला पारंपरिक वार्षिक मठीय उत्सव है।
- यह महोत्सव शांति, समृद्धि और नकारात्मक शक्तियों पर विजय की कामना हेतु कई दिनों की विशेष प्रार्थनाओं और अनुष्ठानों के बाद आयोजित किया जाता है।
- इस उत्सव का प्रमुख आकर्षण भिक्षुओं द्वारा किए जाने वाले पवित्र छम (Cham) नृत्य हैं, जिनमें वे रंगीन मुखौटे और पारंपरिक वेशभूषा धारण करते हैं।
- ये अनुष्ठानिक नृत्य नकारात्मक शक्तियों के विनाश का प्रतीक होते हैं और श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक संदेश देते हैं।
सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
- लद्दाख को ‘गोंपा की भूमि’ कहा जाता है और यहाँ के मठीय उत्सव इसकी आध्यात्मिक विरासत को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- स्पितुक गुस्तोर को विशेष महत्व इसलिए प्राप्त है क्योंकि यह वर्ष का पहला मठीय उत्सव होता है।
- यह आने वाले अन्य धार्मिक उत्सवों के लिए आध्यात्मिक वातावरण तैयार करता है।
- उत्सव के दौरान पवित्र देवताओं के दर्शन से श्रद्धालु स्वास्थ्य, सौहार्द और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह आयोजन सामुदायिक एकता को मजबूत करता है और प्राचीन बौद्ध परंपराओं को जीवंत बनाए रखता है।
लद्दाख के मठीय उत्सवों में स्पितुक गुस्तोर
- लद्दाख में वर्षभर लगभग 16 प्रमुख मठीय उत्सव मनाए जाते हैं, जो विभिन्न ऋतुओं और मठों से जुड़े होते हैं।
- प्रत्येक उत्सव की अपनी विशिष्ट परंपराएँ, मुखौटा नृत्य और प्रार्थना विधियाँ होती हैं।
- स्पितुक गुस्तोर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भीषण सर्दियों से धीरे-धीरे होने वाले मौसमी बदलाव का संकेत देता है।
- स्थानीय लोगों के लिए यह नई आशा का प्रतीक है, जबकि पर्यटकों के लिए यह लद्दाख के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जीवन को नज़दीक से देखने का अनोखा अवसर प्रदान करता है।
- यह महोत्सव क्षेत्र में सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा देता है।
स्पितुक गुस्टोर महोत्सव : संक्षिप्त विवरण
| पहलू | विवरण |
| स्पितुक गुस्टोर के बारे में | |
| प्रकार | लद्दाख का वार्षिक शीतकालीन उत्सव |
| स्थान | स्पितुक मठ, लेह के निकट, लद्दाख |
| तिथि (2026) | 16–17 जनवरी |
| ‘गुस्टोर’ का अर्थ | स्थानीय भाषा में ‘29वें दिन का बलिदान’ |
| बौद्ध संप्रदाय | गेलुक-पा (येलो हैट) तिब्बती बौद्ध परंपरा |
| महत्व | |
| आयोजन समय | तिब्बती कैलेंडर के 11वें महीने के 28वें और 29वें दिन |
| प्रतीकात्मक अर्थ | अच्छाई की बुराई पर विजय |
| उद्देश्य | विश्व शांति, सुख-समृद्धि और सभी प्राणियों के कल्याण के लिए प्रार्थना |
| पूर्व तैयारी | उत्सव से पहले सात दिनों तक विशेष प्रार्थनाएँ |
| विशेष अनुष्ठान | बुरी शक्तियों के प्रतीक पुतलों का दहन |
| मुख्य आकर्षण | |
| मुखौटा नृत्य (छम) | बौद्ध पौराणिक कथाओं का नाटकीय प्रस्तुतीकरण |
| पात्र | रक्षक देवता (धर्मपाल) और गेलुक-पा के संरक्षक देवता |
| मुखौटे | मिट्टी और कागज़ से बने, प्राकृतिक रंगों से रंगे, सोना/चाँदी से पॉलिश |
| वेशभूषा | रेशम और ब्रोकेड के वस्त्र |
| संगीत | लंबे तुरही, झांझ, शंख, घंटियाँ आदि |
| मठीय सहभागिता | |
| भाग लेने वाले मठ | स्तोक, संकर, साबू और स्पितुक मठ के भिक्षु |
| विशेष अनुष्ठान | मठ के रक्षक ताबीज (Protective Amulet) का दर्शन |
| श्रद्धालु | विश्वभर से आने वाले तीर्थयात्री, मठ परिसर रहता है अत्यंत जीवंत |


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