आंध्र प्रदेश सरकार 7 फरवरी 2026 को महत्वाकांक्षी अमरावती क्वांटम वैली (AQV) परियोजना की शुरुआत करने जा रही है, जो भारत की क्वांटम प्रौद्योगिकी यात्रा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य आंध्र प्रदेश को क्वांटम अनुसंधान, नवाचार, प्रतिभा विकास और उद्योग–शैक्षणिक सहयोग का वैश्विक केंद्र बनाना है। अमरावती में होने वाले शिलान्यास समारोह के साथ निर्माण कार्य औपचारिक रूप से शुरू होगा, जो अगली पीढ़ी की उन अत्याधुनिक तकनीकों में राज्य की नेतृत्वकारी भूमिका को दर्शाता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
अमरावती क्वांटम वैली परियोजना: दृष्टि और उद्देश्य
अमरावती क्वांटम वैली परियोजना का उद्देश्य एक समग्र क्वांटम इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें अनुसंधान संस्थान, उद्योग जगत, स्टार्टअप्स और कुशल मानव संसाधन एक साथ काम करें। इसका मुख्य फोकस क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार और क्वांटम-सुरक्षित तकनीकों पर है। समर्पित अवसंरचना के निर्माण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देकर यह परियोजना नवाचार को तेज़ करने और शोध को व्यावहारिक अनुप्रयोगों में बदलने का लक्ष्य रखती है। यह पहल उभरती तकनीकों और डिजिटल नेतृत्व की दिशा में भारत के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है।
शिलान्यास समारोह में कौन-कौन होंगे शामिल?
शिलान्यास समारोह में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू शामिल होंगे, जो इस परियोजना के राजनीतिक और रणनीतिक महत्व को दर्शाता है। उनके साथ केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और आंध्र प्रदेश के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री नारा लोकेश भी मौजूद रहेंगे। उनकी उपस्थिति उच्च-स्तरीय तकनीकी पहलों को आगे बढ़ाने में केंद्र और राज्य के बीच मजबूत समन्वय को दर्शाती है।
उद्योग और शैक्षणिक साझेदारियाँ
अमरावती क्वांटम वैली परियोजना की एक प्रमुख विशेषता उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ किए जाने वाले कई समझौते (MoUs) हैं, जिनका उद्देश्य एक सशक्त क्वांटम इकोसिस्टम तैयार करना है। इस अवसर पर AQV का लोगो लॉन्च किया जाएगा और IBM व टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) द्वारा क्वांटम पहलें शुरू की जाएँगी। इन सहयोगों से वैश्विक विशेषज्ञता, उन्नत अवसंरचना और उद्योग-उपयोगी समाधान अमरावती तक पहुँचने की उम्मीद है।
अमरावती क्वांटम वैली के अंतर्गत प्रस्तावित सुविधाएँ
AQV में कई विशेष केंद्र स्थापित किए जाएँगे, जिनमें IBM-TCS क्वांटम इनोवेशन सेंटर (QIC), क्वांटम टैलेंट हब, और SRM विश्वविद्यालय के सहयोग से विकसित क्वांटम रेफरेंस फैसिलिटी शामिल हैं। ये केंद्र अनुसंधान, कौशल विकास और क्वांटम तकनीकों के परीक्षण पर केंद्रित होंगे। इसके अलावा, QClairvoyance Quantum Labs द्वारा विकसित एक क्वांटम-सुरक्षित एप्लिकेशन भी लॉन्च किया जाएगा, जो साइबर सुरक्षा और भविष्य-तैयार डिजिटल प्रणालियों पर परियोजना के जोर को दर्शाता है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी और MoU
राज्य सरकार के अनुसार, इस कार्यक्रम के दौरान नौ प्रमुख कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन (MoUs) पर हस्ताक्षर किए जाएँगे, जो निजी क्षेत्र की मजबूत भागीदारी का संकेत है। यह सहयोग क्वांटम अनुसंधान को व्यावसायिक उत्पादों और सेवाओं में बदलने के लिए आवश्यक है। उद्योग सहभागिता से अकादमिक शोध और वास्तविक-दुनिया के अनुप्रयोगों के बीच की खाई भी कम होगी, जिससे अमरावती से निकलने वाले क्वांटम नवाचार वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और व्यावसायिक रूप से सक्षम बन सकेंगे।
भारत में क्वांटम तकनीक को बढ़ावा
क्वांटम तकनीक भारत के लिए एक रणनीतिक क्षेत्र है, जिसके उपयोग रक्षा, सुरक्षित संचार, स्वास्थ्य, वित्त और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में हैं। केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर क्वांटम मिशन, अनुसंधान केंद्रों और कौशल विकास में निवेश किया जा रहा है। अमरावती क्वांटम वैली इन राष्ट्रीय प्रयासों का पूरक बनते हुए एक क्षेत्रीय नवाचार क्लस्टर तैयार करती है, जो वैश्विक क्वांटम हब्स की तर्ज पर है और भारत की दीर्घकालिक तकनीकी संप्रभुता को मजबूत करती है।


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