पूंजी बाजार नियामक सेबी ‘अकाउंट एग्रीगेटर’ ढांचे का हिस्सा बन गया जिससे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमन वाले वित्तीय आंकड़ों को साझा करने वाली प्रणाली को मजबूती मिलेगी। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के खाता एग्रीगेटर ढांचे में शामिल होने से उपभोक्ताओं को अपने म्यूचुअल फंड एवं स्टॉक होल्डिंग के बारे में जानकारी वित्तीय सेवा प्रदाताओं के साथ साझा करने में सहूलियत होगी।
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मुख्य बिंदु
- खाता एग्रीगेटर (एए) आरबीआई से विनियमित एक गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी है जो एक उपभोक्ता से उसकी सहमति के आधार पर वित्तीय सूचना प्रदाताओं से जानकारियां जुटाने को मुमकिन बनाता है।
- इस ढांचे के तहत प्रतिभूति बाजार के वित्तीय सेवाप्रदाता (एफआईपी) मसलन डिपॉजिटरी एवं परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) अपने रजिस्ट्रार एवं अंतरण एजेंट (आरटीए) के जरिये उपभोक्ताओं को प्रतिभूति बाजार से जुड़ी वित्तीय जानकारियां दे पाएंगे।
- जानकारों का कहना है कि इस कदम से प्रतिभूति कारोबार, डिपॉजिटरी और म्यूचुअल फंड की समूची प्रणाली खाता मंच पारिस्थितिकी पर ‘लाइव’ हो सकेगी।
- नए निर्देशों के तहत प्रतिभूति बाजार में सक्रिय एफआईपी को खाता एग्रीगेटरों के साथ एक अनुबंध करना होगा जिसमें दोनों पक्षों के अधिकारों एवं विवाद निपटान व्यवस्था का भी जिक्र होगा।
- बता दें उपभोक्ता से सहमति लेने के बाद ही खाता एग्रीगेटर के जरिये हासिल वित्तीय सूचना को एफआईपी साझा कर पाएंगे।
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