Monday, 27 June 2022

27 जून: अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस, देखें इतिहास और महत्व

27 जून: अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस, देखें इतिहास और महत्व

 


प्रत्येक वर्ष 27 जून को सतत् विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals- SDGs) के कार्यान्वयन में सूक्ष्म, लघु और मध्यम आकार के उद्यमों के योगदान को मान्यता देने हेतु सूक्ष्म, लघु और मध्यम आकार के उद्यम (Micro, Small and Medium-sized Enterprises (MSMEs) दिवस का आयोजन किया जाता है।


इस दिन का उद्देश्य वैश्विक आर्थिक विकास और सतत विकास में एमएसएमई के योगदान के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना है। एमएसएमई या सूक्ष्म-लघु और मध्यम आकार के उद्यम किसी देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। ये ऐसे उद्यम हैं जो आमतौर पर 250 से अधिक कर्मचारियों को रोजगार नहीं देते हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर दो-तिहाई से अधिक नौकरियों के सृजन के लिए जिम्मेदार हैं।



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इतिहास:


  • अप्रैल 2017 में संयुक्त राष्ट्र (United Nations- UN) ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित एक प्रस्ताव के माध्यम से 27 जून को सूक्ष्म, लघु और मध्यम आकार के उद्यम दिवस के रूप में नामित किया।
  • मई 2017 में ‘एनहेनसिंग नेशनल केपेसिटीज़ फॉर अनलेशिंग फुल पोटेंशियल्स ऑफ  एमएसएमई इन अचीविंग द एसडीजीज़ इन डेवलपिंग कंट्रीज़' (Enhancing National Capacities for Unleashing Full Potentials of MSMEs in Achieving the SDGs in Developing Countries') नामक एक कार्यक्रम शुरू किया गया ।
  • इसे संयुक्त राष्ट्र शांति और विकास कोष (United Nations Peace and Development Fund) के सतत् विकास उप-निधि के लिये 2030 एजेंडा द्वारा वित्तपोषित किया गया है।



महत्त्व:


  • संयुक्त राष्ट्र चाहता है कि देशों द्वारा सतत् विकास लक्ष्यों की पहचान की जाए और उनके बारे में जागरूकता उत्पन्न की जाए।
  • 136 देशों के व्यवसायों के मध्य कोविड -19 के पड़ने वाले प्रभाव पर किये गए एक अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केंद्र सर्वेक्षण से पता चला है कि लगभग 62% महिला-नेतृत्व वाले छोटे व्यवसाय कोविड-19 संकट से प्रभावित हुए हैं, जबकि पुरुष-नेतृत्त्व वाले व्यवसायों के बीच यह संख्या आधे से भी कम है, वहीं महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसायों की महामारी से न बच पाने की संभावना 27 प्रतिशत अधिक है।
  •  औपचारिक और अनौपचारिक सभी फर्मों में MSMEs की भागीदारी 90% से अधिक है तथा कुल रोज़गार में औसतन 70% और सकल घरेलू उत्पाद में  50% हिस्सेदारी है जिस कारण से वे ग्रीन रिकवरी (Green Recovery) की स्थिति प्राप्त करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


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