विश्व सिकल सेल दिवस हर साल 19 जून को मनाया जाता है। विश्व भर में व्यक्तियों, परिवारों और समुदायों पर सिकल सेल रोग (SCD) के प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 22 दिसंबर, 2008 को सिकल सेल रोग को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में मान्यता देने के लिए एक प्रस्ताव अपनाया।
सिकल सेल रोग (SCD) या सिकल सेल एनीमिया (रक्ताल्पता) लाल रक्त कोशिकाओं से जुडी एक प्रमुख वंशानुगत विकार है जिसमें इन लाल रक्त कोशिकाओं का आकार अर्द्धचंद्र/हंसिया (Sickle) जैसा हो जाता है। ये असामान्य आकार की लाल रक्त कोशिकाएँ (Red Blood Cells- RBCs) कठोर तथा चिपचिपी हो जाती हैं और रक्त वाहिकाओं में फँस जाती हैं, जिससे शरीर के कई हिस्सों में रक्त एवं ऑक्सीजन का प्रवाह या तो कम हो जाता है या रुक जाता है। यह आसामान्य आकार RBCs के जीवनकाल को भी कम करता है तथा एनीमिया (रक्ताल्पता) का कारण बनता है, जिसे सिकल सेल एनीमिया के नाम से जाना जाता है।
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इसकी उत्पत्ति 22 दिसंबर, 2008 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव से हुई थी। संकल्प ने सिकल सेल रोग को वैश्विक स्वास्थ्य चिंता के रूप में मान्यता दी। यह रोग मुख्य रूप से अफ्रीकी, भूमध्यसागरीय, मध्य पूर्वी और दक्षिण एशियाई मूल के लोगों को प्रभावित करता है।
यह दिवस सिकल सेल रोग, इसके उपचार के उपायों के बारे में जागरूकता बढाने तथा विश्व भर में इस रोग पर प्रभावी नियंत्रण प्राप्त करने के लिये मनाया जाता है। प्रथम विश्व सिकल सेल दिवस वर्ष 2009 में मनाया गया था। सिकल सेल दिवस के अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्रालय, फिक्की, अपोलो हॉस्पिटल्स, नोवर्टिस और ग्लोबल अलायंस ऑफ सिकल सेल डिज़ीज़ आर्गेनाईज़ेशन द्वारा नेशनल सिकल सेल कॉन्क्लेव नामक वेबिनार का आयोजन किया गया।
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