महाराष्ट्र विधानसभा ने ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’ पारित कर दिया है। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में जबरन धार्मिक धर्मांतरण को रोकना है। यह बिल वॉइस वोट से पारित हुआ और इसमें जबरन, धोखे, लालच या विवाह के माध्यम से किए जाने वाले धर्मांतरण पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कानून किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि अवैध धर्मांतरण को रोकने और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है।
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य धार्मिक धर्मांतरण को नियंत्रित करना और अवैध तरीकों को रोकना है।
यह सुनिश्चित करता है कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से हो, न कि किसी दबाव, प्रलोभन या धोखे के कारण।
सरकार ने कहा कि—
महाराष्ट्र के इस कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है, ताकि यह एक प्रभावी रोकथाम का साधन बन सके।
मुख्य दंड प्रावधान:
इस कानून में नाबालिगों, महिलाओं और अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों के लिए विशेष सुरक्षा दी गई है।
इन वर्गों को अधिक संवेदनशील माना गया है, इसलिए इनके मामलों में सख्त दंड का प्रावधान किया गया है।
इसका उद्देश्य—
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