विश्व मलेरिया दिवस 2026 हर साल 25 अप्रैल को मनाया जाएगा, ताकि मलेरिया के बारे में जागरूकता फैलाई जा सके और इसके खिलाफ वैश्विक कार्रवाई को बढ़ावा दिया जा सके। यह दिन पिछले कुछ सालों में हुई प्रगति को दिखाता है और दुनिया को उन चुनौतियों की याद दिलाता है जो अभी भी बनी हुई हैं। कई सरकारें, स्वास्थ्य संगठन और समुदाय रोकथाम, निदान और उपचार प्रणालियों को बेहतर बनाने के लिए एक साथ आए हैं। नई वैक्सीन और बेहतर रणनीतियों के साथ, मलेरिया को खत्म करने का लक्ष्य पहले से कहीं ज़्यादा करीब है; लेकिन मलेरिया-मुक्त दुनिया हासिल करने के लिए लगातार प्रयास और वैश्विक सहयोग ज़रूरी रहेगा।
अब तक की वैश्विक प्रगति
2026 की थीम है ‘मलेरिया खत्म करने का संकल्प: अब हम कर सकते हैं। अब हमें करना ही होगा।’
यह थीम इन बातों पर प्रकाश डालेगी:
यह एक मज़बूत संदेश भी देगी कि यदि देश निर्णायक कदम उठाएँ, तो मलेरिया का उन्मूलन संभव है।
इस दिन, जागरूकता और कार्रवाई को मज़बूत करने के लिए दुनिया भर में कई तरह की पहल की जाती हैं।
कई सरकारें और NGO मीडिया और सामुदायिक पहुँच का इस्तेमाल करके लोगों को लक्षणों, रोकथाम और शुरुआती इलाज के बारे में जानकारी देंगे।
इसके अलावा, जागरूकता बढ़ाने के लिए मुफ़्त मलेरिया जाँच शिविर लगाए जाएँगे, मच्छरदानी बांटी जाएँगी और मलेरिया-रोधी दवाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।
वैश्विक संगठन मलेरिया को पूरी तरह खत्म करने की प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए फंडिंग, नए प्रयोगों और रणनीतियों पर चर्चा करेंगे।
साथ ही, स्थानीय समुदाय रुके हुए पानी को हटाकर और साफ़-सफ़ाई को बढ़ावा देकर मदद करेंगे, जिससे मच्छरों के पनपने की संभावना कम होगी।
मलेरिया एक परजीवी रोग है जो प्लास्मोडियम परजीवियों के कारण होता है, और यह संक्रमित मादा एनाफिलीज़ मच्छरों द्वारा फैलता है।
कारण और फैलाव
लक्षण
टीके और इलाज
मलेरिया के क्षेत्र में हुई प्रगति के बावजूद, यह अभी भी एक प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य चिंता बना हुआ है।
वैश्विक रणनीति
WHO की 2016-2030 की मलेरिया रणनीति का लक्ष्य 2030 तक मलेरिया के मामलों और मौतों में 90% की कमी लाना है।
भारत ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन उसे अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्य उपलब्धियाँ
वर्तमान चुनौतियाँ
‘राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम’ (National Vector Borne Disease Control Program) और ‘मलेरिया उन्मूलन अनुसंधान गठबंधन’ (MERA) इंडिया जैसी सरकारी पहलों ने भारत से इस बीमारी को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इसके साथ ही, भारत ने 2027 तक मलेरिया के स्थानीय मामलों (indigenous cases) को शून्य करने और 2030 तक इस बीमारी का पूर्ण उन्मूलन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
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