विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस 2025: थीम, इतिहास और महत्व

विश्व प्राथमिक उपचार दिवस एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय दिवस है, जिसका उद्देश्य जीवन बचाने और चोटों को रोकने में प्राथमिक उपचार (First Aid) के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना है। इसकी स्थापना अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसाइटी (IFRC) द्वारा की गई थी और इसे हर वर्ष सितंबर के दूसरे शनिवार को मनाया जाता है।

साल 2025 में यह दिवस 13 सितंबर को मनाया जाएगा, जिसकी थीम है – “प्राथमिक उपचार और जलवायु परिवर्तन”। इस वर्ष का फोकस इस तात्कालिक आवश्यकता पर है कि समुदाय जलवायु से जुड़ी आपात स्थितियों—जैसे बाढ़, लू और जंगल की आग—के लिए तैयार रहें, जहाँ प्राथमिक उपचार का ज्ञान जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकता है।

प्राथमिक उपचार क्यों महत्वपूर्ण है?

प्राथमिक उपचार वह त्वरित देखभाल है जो किसी आपात स्थिति में पेशेवर चिकित्सा सहायता पहुँचने से पहले दी जाती है। कई बार यह हस्तक्षेप आपातकालीन स्थिति के नतीजे को तय करता है।

  • जीवन बचाता है – हृदयगति रुकना, दम घुटना और अत्यधिक रक्तस्राव जैसी स्थितियों में।

  • जटिलताओं को रोकता है – जलने, हड्डी टूटने और एलर्जिक प्रतिक्रिया जैसी आपात स्थितियों में।

  • तेज़ रिकवरी में मदद करता है – और चोटों की गंभीरता को कम करता है।

यदि नागरिकों को बुनियादी प्राथमिक उपचार कौशल से सशक्त किया जाए, तो समाज अधिक सुरक्षित और सक्षम बन सकता है, जहाँ लोग गंभीर परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार हों।

विश्व प्राथमिक उपचार दिवस का इतिहास

इस दिवस की जड़ें 19वीं शताब्दी से जुड़ी हैं, जब रेड क्रॉस के संस्थापक हेनरी ड्यूनेन्ट ने सोल्फ़ेरिनो के युद्ध (1859) में घायल सैनिकों की पीड़ा देखकर मानवीय दृष्टि विकसित की। यही भावना आगे चलकर रेड क्रॉस आंदोलन की नींव बनी।
फर्स्ट एड (प्राथमिक उपचार)” शब्द का प्रयोग सबसे पहले 1800 के दशक के अंत में फ़्रेडरिक वॉन एसमार्क, एक जर्मन सैन्य सर्जन, ने किया।
विश्व प्राथमिक उपचार दिवस की शुरुआत वर्ष 2000 में IFRC (International Federation of Red Cross and Red Crescent Societies) ने की थी, ताकि वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाई जा सके। तब से यह दिवस एक वैश्विक अभियान के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें प्रशिक्षण, जागरूकता कार्यक्रम और रेड क्रॉस व रेड क्रीसेंट सोसाइटियों द्वारा प्रदर्शन शामिल हैं।

बुनियादी प्राथमिक उपचार कौशल जो सभी को जानने चाहिए

  • सीपीआर (CPR): हृदयगति रुकने पर जीवन बचाने में अहम।

  • दम घुटने पर राहत: पीठ पर प्रहार (back blows) और पेट पर दबाव (abdominal thrusts)।

  • रक्तस्राव नियंत्रण: सीधे दबाव द्वारा रक्त बहाव रोकना।

  • जलने पर देखभाल: कम से कम 20 मिनट तक बहते पानी से ठंडा करना।

  • रिकवरी पोज़िशन: बेहोश लेकिन सांस ले रहे व्यक्ति को सुरक्षित रखने हेतु।

  • हड्डी टूटने पर सहारा: हिलने-डुलने से रोकना ताकि चोट न बढ़े।

ये कौशल आम लोगों को भी आपातकालीन स्थितियों में जीवन रक्षक बना सकते हैं।

वे परिस्थितियाँ जहाँ प्राथमिक उपचार जीवन बचाता है

  • हृदयगति रुकना → सीपीआर से जीवित रहने की संभावना 3 गुना तक बढ़ जाती है।

  • अत्यधिक रक्तस्राव → तुरंत दबाव देकर जानलेवा खून बहने से रोकना।

  • जलन/झुलसना → शुरुआती ठंडक से ऊतक क्षति कम होती है।

  • दमा या दौरे (seizures) → समय पर सहायता से रोगी को स्थिर रखना।

  • दुर्घटनाएँ → हड्डी को तुरंत सहारा देकर गंभीरता कम करना।

स्कूलों और कार्यस्थलों में प्राथमिक उपचार

  • सुरक्षा और तैयारियों की संस्कृति बनाना।

  • दुर्घटनाओं के असर को कम करना।

  • आत्मविश्वास और लचीलापन बढ़ाना।

  • आपातकाल में तेज़ और संगठित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना।

निदान और निवारक स्वास्थ्य

नियमित स्वास्थ्य जाँच (जैसे हृदय रोग, मधुमेह, एलर्जी) प्राथमिक उपचार की तैयारी को मज़बूत करती है।
निवारक स्वास्थ्य और प्राथमिक उपचार का संयोजन समाज को और अधिक सुरक्षित बनाता है।

विश्व प्राथमिक उपचार दिवस 2025 में भाग लेने के तरीके

  • स्थानीय प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण सत्र में शामिल हों।

  • सोशल मीडिया पर थीम और तकनीकों पर जागरूकता सामग्री साझा करें।

  • समुदाय में डेमो और कार्यशालाएँ आयोजित करें।

  • स्कूलों और दफ़्तरों में ड्रिल्स कराएँ।

  • फ़र्स्ट एड मोबाइल ऐप्स डाउनलोड करें।

  • रेड क्रॉस, रेड क्रीसेंट या एनजीओ के साथ वॉलंटियर बनें।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

आंध्र विश्वविद्यालय में स्वच्छता कर्मी द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर पुस्तक का विमोचन

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एक हृदयस्पर्शी और सामाजिक रूप से अत्यंत सार्थक घटना देखने…

7 mins ago

जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त

भारत की न्यायपालिका में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता को उत्तराखंड…

29 mins ago

2025 में महिलाओं के लिए सबसे अच्छा शहर रहा बेंगलुरु, जानें दूसरे नंबर पर कौन?

देश में महिला सुरक्षा के मामले में बेंगलुरु और चेन्नई सबसे बेहतर शहरों के रूप…

2 hours ago

केयी पन्योर बना भारत का पहला ‘बायो-हैप्पी जिला’

अरुणाचल प्रदेश का नवगठित जिला केयी पन्योर अब भारत का पहला ‘बायो-हैप्पी जिला’ बनने जा…

3 hours ago

तमिलनाडु ने भारत की पहली डीपटेक स्टार्टअप पॉलिसी लॉन्च की

भारत के नवाचार पारितंत्र को बड़ी मजबूती देते हुए तमिलनाडु ने देश की पहली समर्पित…

3 hours ago

पूर्व केंद्रीय मंत्री कबींद्र पुरकायस्थ का 94 साल की उम्र में निधन

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कबींद्र पुरकायस्थ का 07 जनवरी 2026 को…

18 hours ago