वायु प्रदूषण से निपटने के लिए यूपी में विश्व बैंक और भारत का संयुक्त कार्यक्रम

विश्व बैंक, भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल को “उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोग्राम” कहा जाता है, जिसमें 299.66 मिलियन डॉलर का निवेश शामिल है। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित उपायों के माध्यम से बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करना है।

उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोग्राम: परिचय

  • यह कार्यक्रम परिवहन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने पर केंद्रित है, जो उत्तर प्रदेश में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं।
  • इस योजना के तहत राज्यभर में लगभग 200 नए वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जो उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Uttar Pradesh Pollution Control Board) के माध्यम से रियल-टाइम डेटा उपलब्ध कराएंगे।

कार्यक्रम में विश्व बैंक की भूमिका

  • विश्व बैंक का यह प्रोजेक्ट भारत के साथ पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के व्यापक सहयोग का हिस्सा है।
  • इसके तहत लगभग 150 मिलियन डॉलर का निजी निवेश भी आकर्षित होने की उम्मीद है, जो इलेक्ट्रिक बसों, ई-रिक्शा (तीन पहिया वाहन) और उत्सर्जन निगरानी प्रणालियों को बढ़ावा देगा।
  • यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के संतुलन का उदाहरण है।

स्वच्छ परिवहन और औद्योगिक उत्सर्जन में कमी

  • इस कार्यक्रम का एक प्रमुख लक्ष्य परिवहन और उद्योगों से होने वाले प्रदूषण को कम करना है।
  • शहरी क्षेत्रों में परिवहन प्रदूषण एक बड़ी समस्या है, जिसे कम करने के लिए इलेक्ट्रिक बसों और इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • ये वाहन पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाते हैं।

ईंट भट्टों में स्वच्छ तकनीक का उपयोग

  • उत्तर भारत में ईंट भट्टे वायु प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत हैं।
  • नई योजना के तहत 700 से अधिक ईंट भट्टों को स्वच्छ और ऊर्जा-कुशल तकनीकों में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे प्रदूषण कम होगा और ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी।

इंडो-गंगेटिक प्लेन्स में क्षेत्रीय पहल

  • यह कार्यक्रम क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन कार्यक्रम (Regional Air Quality Management Program) का हिस्सा है, जो इंडो-गंगेटिक मैदान और हिमालयी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सुधार पर केंद्रित है।
  • इंडो-गंगेटिक क्षेत्र विश्व के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में से एक माना जाता है, इसलिए इस पहल का प्रभाव पड़ोसी राज्यों तक भी पहुंचेगा।

परियोजना अवधि और वित्तीय संरचना

  • यह कार्यक्रम कुल 10 वर्षों तक चलेगा, जिसमें 2 वर्ष की ग्रेस अवधि शामिल है।
  • इसे ऊर्जा क्षेत्र प्रबंधन सहायता कार्यक्रम (ESMAP) से तकनीकी और वित्तीय सहायता भी मिलेगी, जो एक वैश्विक बहु-दाता पहल है।
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vikash

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