अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान (Iran) के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की बात को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि ‘वह ईरान के खिलाफ युद्ध में परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करेंगे।’ वाइट हाउस में पत्रकारों ने जब ट्रंप से पूछा कि क्या वह ऐसे हथियार का इस्तेमाल करेंगे तो उन्होंने कहा “मैं परमाणु हथियार का इस्तेमाल क्यों करूंगा? हमने इसके बिना ही पूरी तरह से पारंपरिक तरीके से उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि नहीं, मैं इसका इस्तेमाल नहीं करूगा। किसी को भी परमाणु हथियार का इस्तेमाल करने की इजाजत कभी नहीं दी जानी चाहिए।
राष्ट्रपति ने एक बार फिर दोहराया कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु बम बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने तकनीकी शब्दों के बजाय सरल भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अमेरिका ईरान से ‘न्यूक्लियर डस्ट’ (संवर्धित यूरेनियम) को बाहर निकालने के लिए किसी भी हद तक जाएगा। ट्रंप का मानना है कि परमाणु हथियारों से लैस ईरान पूरी दुनिया के लिए खतरा है।
युद्ध की स्थिति के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने इस हफ्ते की शुरुआत में ईरान के साथ अनिश्चितकालीन युद्धविराम की घोषणा की थी। यह फैसला दो हफ्ते के पिछले युद्धविराम के खत्म होने से ठीक एक दिन पहले लिया गया। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कार्रवाई जल्दी इसलिए रोक दी क्योंकि दूसरी तरफ से शांति की अपील की गई थी, लेकिन अमेरिका ने 100 प्रतिशत प्रभावी ‘नाकाबंदी’ कर रखी है जिससे उनका सारा व्यापार ठप हो गया है।
ट्रंप ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत है और तेल का पर्याप्त भंडार है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने के प्रयासों के तहत, कई जहाज अब होर्मुज जलडमरूमध्य के बजाय अमेरिका की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था अविश्वसनीय है… मैंने जेडी, मार्को, हॉवर्ड और स्कॉट को फोन किया और उनसे कहा कि मुझे यह बताते हुए दुख हो रहा है, लेकिन हमें थोड़ा सा रास्ता बदलना होगा। हमें ईरान जाकर यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके पास परमाणु हथियार न हों।
अमेरिकी सेना के अनुसार, उसने हिंद महासागर में तेल तस्करी से जुड़ा एक और ईरानी टैंकर जब्त किया है, जिससे तनाव और बढ़ गया है। इससे पहले, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन मालवाहक जहाजों पर हमला किया था। अमेरिका और ईरान के बीच यह तनाव इस अहम समुद्री मार्ग से तेल व्यापार को लगभग पूरी तरह से रोक चुका है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ रहा है।
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