जनवरी 2026 के मध्य में लद्दाख के हानले क्षेत्र के ऊपर रात का आसमान अचानक चौंकाने वाला दृश्य बन गया। आमतौर पर गहरे काले और तारों से भरे आकाश के बजाय, इस बार आसमान रक्त-लाल चमक से भर गया। तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुईं और कई लोगों ने इसे “भारत में नॉर्दर्न लाइट्स” कहना शुरू कर दिया। लेकिन वैज्ञानिकों ने जल्द ही स्पष्ट किया कि यह केवल एक सुंदर प्राकृतिक दृश्य नहीं था, बल्कि 2003 के बाद आए सबसे शक्तिशाली सौर तूफानों में से एक का प्रत्यक्ष प्रभाव था। इस घटना ने उपग्रह सुरक्षा, बिजली ग्रिड और अंतरिक्ष मौसम से जुड़ी तैयारियों को लेकर गंभीर चिंताएँ भी पैदा कीं।
| शीर्षक | मुख्य बिंदु |
| ऑरोरा क्या हैं? | पृथ्वी के आकाश में दिखाई देने वाले प्राकृतिक प्रकाश प्रदर्शन मुख्यतः ध्रुवों के पास उच्च अक्षांशीय क्षेत्रों में देखे जाते हैं परदे, चाप, किरणें, सर्पिल या झिलमिलाती रोशनी के रूप में दिखाई देते हैं सूर्य से आए आवेशित कणों और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र व वायुमंडल की परस्पर क्रिया से उत्पन्न |
| अन्य नाम | ऑरोरा बोरेलिस – उत्तरी प्रकाश ऑरोरा ऑस्ट्रेलिस – दक्षिणी प्रकाश |
| घटनास्थल (क्षेत्र) | मुख्यतः आर्कटिक वृत्त और अंटार्कटिक वृत्त के आसपास निम्न अक्षांशों (जैसे भारत) में बहुत कम दिखाई देते हैं |
| ऑरोरा बोरेलिस (Northern Lights) | उत्तरी गोलार्ध में घटित नॉर्वे, स्वीडन, फ़िनलैंड, आइसलैंड, कनाडा और अलास्का में सामान्यतः देखे जाते हैं उत्तर दिशा में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से सौर कणों की क्रिया के कारण |
| ऑरोरा ऑस्ट्रेलिस (Southern Lights) | दक्षिणी गोलार्ध में घटित अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और दक्षिणी दक्षिण अमेरिका में दिखाई देते हैं भौतिक प्रक्रिया वही है, केवल दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में |
| ऑरोरा का स्रोत | सूर्य से उत्पत्ति सूर्य लगातार आवेशित कणों की धारा उत्सर्जित करता है जिसे सौर पवन (Solar Wind) कहते हैं इसमें इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन शामिल होते हैं |
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