भारत ने वैश्विक पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गंगा के मैदानों में स्थित एक आर्द्रभूमि और कच्छ के शुष्क भू-भाग में स्थित दूसरी आर्द्रभूमि को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि वैश्विक ढाँचों के तहत आर्द्रभूमि और जैव विविधता संरक्षण के प्रति भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती है।उत्तर प्रदेश के एटा जिले में स्थित पाटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ क्षेत्र में स्थित छरी-ढांड (Chhari-Dhand) को आधिकारिक रूप से रामसर आर्द्रभूमि घोषित किया गया है। इसके साथ ही भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 98 हो गई है।
| शीर्षक | मुख्य बिंदु |
| रामसर स्थल क्या है? | रामसर कन्वेंशन (1971) के तहत घोषित आर्द्रभूमि जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन के लिए अंतरराष्ट्रीय महत्व |
| रामसर कन्वेंशन | 1971 में ईरान के रामसर शहर में अपनाया गया आर्द्रभूमियों के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग हेतु अंतरराष्ट्रीय संधि |
| रामसर स्थलों का महत्व | जैव विविधता और नाज़ुक पारिस्थितिक तंत्र का संरक्षण प्रवासी पक्षियों और संकटग्रस्त प्रजातियों के आवास की रक्षा |
| पारिस्थितिक कार्य | भूजल पुनर्भरण बाढ़ नियंत्रण और तूफान विनियमन जलवायु नियंत्रण और कार्बन भंडारण |
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