एशिया एक विशाल महाद्वीप है, जो अपनी ऊँची पर्वत श्रृंखलाओं, गहरी घाटियों और अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहाँ कुछ पर्वत इतने ऊँचे हैं कि वे पूरे वर्ष बर्फ से ढके रहते हैं। ये पर्वत जलवायु, नदियों और मानव जीवन को कई तरीकों से प्रभावित करते हैं। इन्हीं में से एक पर्वत अपनी अत्यधिक ऊँचाई, भव्य स्वरूप और विश्व-प्रसिद्ध पहचान के कारण सबसे अलग और विशेष माना जाता है।
माउंट एवरेस्ट को एशिया का “भव्य शिखर (Majestic Peak of Asia)” कहा जाता है, क्योंकि यह पृथ्वी का सबसे ऊँचा पर्वत है। इसकी अत्यधिक ऊँचाई, चमकदार बर्फ से ढका शिखर और शक्तिशाली उपस्थिति इसे दुनिया के सबसे अद्भुत प्राकृतिक अजूबों में शामिल करती है। सदियों से यह पर्वत पर्वतारोहियों, खोजकर्ताओं और वैज्ञानिकों को आकर्षित करता रहा है और आज भी एशिया की प्राकृतिक शक्ति और सुंदरता का प्रतीक बना हुआ है।
माउंट एवरेस्ट को यह उपाधि उसकी अद्वितीय ऊँचाई और प्रभुत्व के कारण मिली है। यह आसपास के सभी पर्वतों से बहुत ऊँचा है और समुद्र तल से इसकी ऊँचाई 8,848.86 मीटर है, जो इसे पृथ्वी का सर्वोच्च बिंदु बनाती है। इसका विशाल आकार, तीखी ढलानें और स्थायी हिमावरण इसे एक राजसी और भव्य रूप प्रदान करते हैं, जो “मैजेस्टिक” शब्द को पूरी तरह सही ठहराता है।
माउंट एवरेस्ट हिमालय पर्वत श्रृंखला में स्थित है और यह नेपाल तथा चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की सीमा पर पड़ता है। यह महलांगुर हिमाल उप-श्रेणी का हिस्सा है, जो दुनिया के कई सबसे ऊँचे पर्वतों का घर है। अत्यधिक ऊँचाई और कठिन भू-भाग के कारण इस क्षेत्र को अक्सर “दुनिया की छत” कहा जाता है।
माउंट एवरेस्ट का निर्माण लाखों वर्ष पहले तब हुआ, जब भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट आपस में टकराईं। इस विशाल टक्कर के कारण पृथ्वी की सतह ऊपर उठी और हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ। आज भी ये प्लेटें धीरे-धीरे खिसक रही हैं, जिसके कारण माउंट एवरेस्ट हर साल कुछ मिलीमीटर और ऊँचा हो रहा है।
माउंट एवरेस्ट को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। नेपाल में इसे “सागरमाथा” कहा जाता है, जिसका अर्थ है “आकाश का मस्तक”। तिब्बत में इसे “चोमोलुंगमा” कहा जाता है, जिसका अर्थ है “विश्व की माता देवी”। ये नाम इस पर्वत के प्रति स्थानीय लोगों की गहरी श्रद्धा और आध्यात्मिक सम्मान को दर्शाते हैं।
माउंट एवरेस्ट पर मौसम अत्यंत कठोर होता है। शिखर के पास तापमान –60°C से भी नीचे चला जाता है और हवाओं की गति 160 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक हो सकती है। ऊँचाई पर हवा में ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम होती है, जिससे साँस लेना कठिन हो जाता है। ये परिस्थितियाँ एवरेस्ट को पृथ्वी के सबसे कठिन प्राकृतिक वातावरणों में से एक बनाती हैं।
माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई को पर्वतारोहण की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना जाता है। पर्वतारोहियों को हिमस्खलन, बर्फीले झरने (आइस फॉल), गहरी दरारें और अचानक बदलने वाले मौसम जैसे खतरों का सामना करना पड़ता है। इन सभी जोखिमों के बावजूद, हर वर्ष अनेक लोग दुनिया के सबसे ऊँचे शिखर पर पहुँचने का सपना लेकर यहाँ आते हैं।
एशिया दुनिया की सबसे ऊँची पर्वत श्रृंखला हिमालय का घर है। माउंट एवरेस्ट के साथ-साथ इसमें K2, कंचनजंघा, ल्होत्से, मकालू और चो-ओयू जैसे प्रसिद्ध पर्वत भी शामिल हैं। ये सभी पर्वत मिलकर एशिया को पृथ्वी के सबसे ऊँचे शिखरों वाला महाद्वीप बनाते हैं।
माउंट एवरेस्ट पृथ्वी का सबसे ऊँचा प्राकृतिक बिंदु है और साहस व रोमांच का प्रतीक माना जाता है। टेक्टोनिक गतिविधियों के कारण यह आज भी धीरे-धीरे ऊँचा हो रहा है। समय के साथ यह पर्वत साहस, दृढ़ संकल्प और मानव की अन्वेषण-भावना का वैश्विक प्रतीक बन चुका है।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]केंद्रीय बजट 2026-27 में भारतीय रेलवे को अब तक का सबसे अधिक वित्तीय समर्थन मिला…
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 01 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश कर दिया…
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश कर दिया है। यह…
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 01 फरवरी 2026 को आज बजट 2026 पेश किया है।…
एलेना रिबाकिना ने मेलबर्न में खेले गए ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 के महिला एकल फाइनल में…
एक शोध दल ने बताया है कि उन्होंने प्रयोगशाला में चूहों में अग्नाशय कैंसर (Pancreatic…