पहली बार कब हिंदी में छपा था आम बजट?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्रीय बजट पेश करेंगी, जिसमें केंद्र सरकार के व्यय, राजस्व, और कर प्रस्तावों को शामिल किया जाएगा। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल का दूसरा पूर्ण बजट है। बजट केवल एक आर्थिक दस्तावेज ही नहीं है, बल्कि यह भारत के उपनिवेशवाद और स्वतंत्रता के सफर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस यात्रा में एक अहम कदम हिंदी में केंद्रीय बजट पेश करना था, जिससे इसे आम जनता के लिए सुलभ बनाया जा सके।

बजट क्या है?

बजट सरकार के एक वित्तीय वर्ष के अनुमानित राजस्व और व्यय का विस्तृत विवरण होता है। हालांकि “बजट” शब्द का व्यापक उपयोग होता है, लेकिन यह भारतीय संविधान में नहीं मिलता। इसके बजाय, संविधान के अनुच्छेद 112 (भाग V) में इसे “वार्षिक वित्तीय विवरण” (Annual Financial Statement) के रूप में वर्णित किया गया है, जिसे भारत के राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत करते हैं।

केंद्रीय बजट की तैयारी वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के बजट डिवीजन द्वारा की जाती है। यह जटिल प्रक्रिया नीति आयोग और संबंधित मंत्रालयों के साथ परामर्श के माध्यम से एक व्यापक वित्तीय खाका तैयार करने पर आधारित होती है।

केंद्रीय बजट की भाषा

केंद्रीय बजट दस्तावेज भारतीय संघ की दो आधिकारिक भाषाओं, अंग्रेजी और हिंदी, में तैयार किया जाता है। हालांकि, यह समावेशिता हमेशा से प्रचलित नहीं थी। स्वतंत्र भारत के शुरुआती वर्षों में बजट केवल अंग्रेजी में ही छपता था, जो औपनिवेशिक परंपरा का पालन था।

भारत में पहला बजट 1860 में ब्रिटिश शासन के दौरान जेम्स विल्सन, एक ब्रिटिश सांसद, द्वारा प्रस्तुत किया गया था। यह बजट विशेष रूप से ब्रिटिश नागरिकों और भारतीय अभिजात वर्ग के लिए तैयार किया गया था और केवल अंग्रेजी में था, जिससे व्यापक भारतीय जनता इससे वंचित रही।

बदलाव का क्षण: केंद्रीय बजट में हिंदी का समावेश

समावेशिता की ओर बदलाव 1955 में भारत के तत्कालीन वित्त मंत्री सी.डी. देशमुख के नेतृत्व में आया। देशमुख ने यह महसूस किया कि बजट को भारतीय जनता के लिए सुलभ बनाने की आवश्यकता है और उन्होंने बजट को अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में छपवाने का निर्णय लिया। यह महत्वपूर्ण कदम औपनिवेशिक परंपराओं से भारत की दूरी और अपने नागरिकों से जुड़ाव के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का प्रतीक था।

सी.डी. देशमुख: बदलाव के सूत्रधार

सी.डी. देशमुख, एक दूरदर्शी नेता, ने भारत की आर्थिक नीतियों को आकार देने में अहम भूमिका निभाई। उन्हें 1950 में वित्त मंत्री नियुक्त किया गया और उन्होंने देश की पहली पंचवर्षीय योजना के क्रियान्वयन की निगरानी की। इसके अलावा, उन्होंने योजना आयोग के अध्यक्ष (एक्स-ऑफिशियो) के रूप में भी कार्य किया, जिसे 2015 में नीति आयोग द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।

देशमुख ने भारत में आर्थिक शोध को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने 1956 में नई दिल्ली में नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER), भारत के पहले स्वतंत्र आर्थिक नीति संस्थान, की स्थापना में सहायता की।

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर देशमुख की भूमिका

वित्त मंत्री बनने से पहले, देशमुख 1930 से 1949 तक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने 1944 में ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहां अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की स्थापना हुई। यह उनकी वैश्विक प्रभावशीलता को दर्शाता है।

1955 के बजट में हिंदी छपाई की विरासत

1955 में पहली बार हिंदी में केंद्रीय बजट छापने का निर्णय भारत की समावेशी और सहभागी शासन प्रणाली के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसने सरकारी संचार में भाषाई विविधता को बढ़ावा देने की नींव रखी।

अंग्रेजी के साथ हिंदी में बजट प्रस्तुत करके देशमुख ने यह सुनिश्चित किया कि भारत की बड़ी जनसंख्या देश की वित्तीय नीतियों से जुड़ सके। यह कदम भारत की आत्मनिर्भरता पर जोर देने और औपनिवेशिक विरासत को अस्वीकार करने का प्रतीक भी था।

आधुनिक बजट प्रथाएं

आज, केंद्रीय बजट न केवल अंग्रेजी और हिंदी में छापा जाता है बल्कि व्यापक पहुंच के लिए ऑनलाइन भी उपलब्ध कराया जाता है। वित्त मंत्री द्वारा दिया गया बजट भाषण, सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं और नीतिगत उपायों को समझाने के लिए एक सावधानीपूर्वक तैयार किया गया विवरण होता है।

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vikash

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