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शहीद दिवस क्या है और इसे 30 जनवरी को क्यों मनाया जाता है?

हर वर्ष 30 जनवरी को भारत अपने स्वतंत्रता संग्राम के लिए दिए गए अमूल्य बलिदानों को स्मरण करता है। शहीद दिवस 2026 विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है, जिनका जीवन और विचार भारत के अहिंसक स्वतंत्रता आंदोलन की आधारशिला बने और आज भी राष्ट्र को प्रेरणा देते हैं। शहीद दिवस, जिसे मार्टर्स डे (Martyrs’ Day) भी कहा जाता है, इसलिए अनोखा है क्योंकि इसे दो महत्वपूर्ण तिथियों पर मनाया जाता है—30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या की स्मृति में तथा 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदान की याद में, जिन्हें ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार ने फांसी दी थी।

शहीद दिवस का इतिहास

शहीद दिवस, जिसे शहीद दिवस (Shaheed Diwas) भी कहा जाता है, 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या की स्मृति में मनाया जाता है। गांधीजी को दिल्ली के बिड़ला भवन में प्रार्थना सभा के लिए जाते समय नाथूराम गोडसे ने गोली मार दी थी। यह घटना स्वतंत्र भारत के इतिहास का एक निर्णायक क्षण थी, क्योंकि यह आज़ादी मिलने के कुछ ही महीनों बाद घटित हुई। तभी से यह दिन न केवल महात्मा गांधी, बल्कि उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करने के लिए समर्पित है जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए।

शहीद दिवस का महत्व

शहीद दिवस का पालन यह याद दिलाता है कि भारत की स्वतंत्रता भारी मानवीय बलिदानों की कीमत पर प्राप्त हुई। यह दिन अहिंसा, सत्य, साहस और देशभक्ति जैसे मूल्यों को सुदृढ़ करता है, जिनका प्रतिनिधित्व गांधीजी करते थे। शहीदों को सम्मान देकर राष्ट्र अपनी नैतिक जिम्मेदारियों पर विचार करता है और लोकतांत्रिक आदर्शों को बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। साथ ही, यह दिवस विशेषकर युवाओं को स्वतंत्रता का मूल्य समझने और समाज में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित करता है।

शहीद दिवस कैसे मनाया जाता है

30 जनवरी को दिल्ली में राजघाट—महात्मा गांधी के समाधि स्थल—पर प्रार्थना सभाएँ और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। राष्ट्रीय नेता, सरकारी अधिकारी और नागरिक पुष्पांजलि अर्पित करते हैं और मौन धारण करते हैं। देशभर में विद्यालयों और संस्थानों द्वारा स्मरण कार्यक्रम, भाषण और चर्चाएँ आयोजित की जाती हैं, ताकि विद्यार्थियों को स्वतंत्रता संग्राम और गांधीजी के आदर्शों से परिचित कराया जा सके।

महात्मा गांधी की स्थायी विरासत

महात्मा गांधी ने अहिंसा और सविनय अवज्ञा के माध्यम से भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया, जिससे विश्वभर के नेताओं और आंदोलनों को प्रेरणा मिली। उनका दर्शन राजनीति से आगे बढ़कर सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता और नैतिक जीवन पर केंद्रित था। दशकों बाद भी, संघर्ष समाधान, सामाजिक न्याय और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व जैसे मुद्दों में गांधीजी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

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