भारत का बहुप्रतीक्षित मानव अंतरिक्ष उड़ान सपना अब अपने सबसे निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। सुरक्षा और विश्वसनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) गगनयान मिशन की तैयारियों को तेज़ कर रहा है। भारतीय अंतरिक्ष यात्री 2027 में अंतरिक्ष यात्रा पर जाएंगे, उससे पहले कई मानवरहित (Uncrewed) परीक्षण मिशन किए जाएंगे। ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन के अनुसार, गगनयान का पहला मानवरहित मिशन G1 मार्च 2026 में प्रस्तावित है।
गगनयान मिशन क्या है?
- गगनयान भारत का प्रमुख मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका नेतृत्व ISRO कर रहा है।
- इसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों, जिन्हें गगनयात्री कहा जाता है, को निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में भेजना और सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना है।
- इस मिशन की सफलता के साथ भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद स्वतंत्र रूप से मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता हासिल करने वाला चौथा देश बनेगा।
मानव उड़ान से पहले मानवरहित मिशन
- अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले ISRO ने तीन मानवरहित मिशनों की योजना बनाई है, ताकि मिशन की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
- इनमें पहला मिशन G1 है, जो लगभग 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है।
- अब तक 8,000 से अधिक ग्राउंड और संरचनात्मक परीक्षण किए जा चुके हैं।
- इनमें संरचनात्मक मजबूती, एवियोनिक्स, प्रोपल्शन और मिशन सॉफ्टवेयर की जाँच शामिल है।
- इन मिशनों का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर प्रणाली सुरक्षा के पैमाने पर “100 में से 100” अंक प्राप्त करे।
व्योममित्रा और प्रमुख प्रणालियों का परीक्षण
- G1 मिशन (मार्च 2026) में ISRO का ह्यूमनॉइड रोबोट व्योममित्रा भेजा जाएगा।
- व्योममित्रा जीवन-समर्थन प्रणालियों, क्रू मॉड्यूल के अंदर के वातावरण, पुनःप्रवेश (री-एंट्री) व्यवहार और रिकवरी प्रक्रियाओं की जाँच में मदद करेगा।
- ये परीक्षण मानव उपस्थिति का अनुकरण करेंगे और यह आकलन करेंगे कि लॉन्च, कक्षा और वापसी के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा।
अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
- ISRO ने स्पष्ट किया है कि अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा गगनयान कार्यक्रम की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
- चुने गए चार गगनयात्री — शुभांशु शुक्ला, प्रशांत बालकृष्णन नायर, अजीत कृष्णन और अंगद प्रताप — कठोर प्रशिक्षण से गुजर रहे हैं।
- इसके साथ ही रॉकेट, क्रू मॉड्यूल और आपातकालीन एस्केप प्रणालियों पर समानांतर परीक्षण जारी हैं।
- ग्राउंड परीक्षणों के बाद पर्यावरणीय सत्यापन और सॉफ्टवेयर सिमुलेशन किए जाएंगे।
प्रक्षेपण यान और मिशन प्रोफ़ाइल
- अंतरिक्ष यात्रियों को मानव-रेटेड LVM3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा।
- यह रॉकेट क्रू मॉड्यूल को लगभग 400 किमी ऊँची निम्न पृथ्वी कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है।
- प्रस्तावित मानव मिशन की अवधि लगभग तीन दिन होगी।
- इसके बाद क्रू मॉड्यूल पृथ्वी के वायुमंडल में पुनःप्रवेश करेगा और पैराशूट व रिकवरी प्रणालियों की मदद से भारतीय समुद्री क्षेत्र में सुरक्षित लैंडिंग करेगा।
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