असम राज्य ने अपने चाय बागान समुदायों के लिए एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी कदम उठाते हुए एक नई वित्तीय सहायता योजना की घोषणा की है। असम सरकार ने मुख्यमंत्री एति कोली दूती पात योजना (Mukhya Mantrir Eti Koli Duti Paat Scheme) की शुरुआत की है, जिसके तहत राज्य भर के चाय बागान श्रमिकों को एकमुश्त वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह पहल असम की अर्थव्यवस्था में चाय श्रमिकों के ऐतिहासिक योगदान को मान्यता देती है और चाय उत्पादक क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा, सम्मान और समावेशी विकास को मजबूत करने का लक्ष्य रखती है।
योजना की शुरुआत और राजनीतिक नेतृत्व
- इस योजना की शुरुआत मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने तिनसुकिया ज़िले के डूमडूमा में की।
- मुख्यमंत्री ने इस पहल को चाय जनजातियों और स्वदेशी समुदायों के प्रति सम्मान के रूप में बताया, जिनके श्रम ने असम के विश्वप्रसिद्ध चाय उद्योग को जीवित रखा है।
- उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लाभों के सुचारु और समयबद्ध वितरण के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान किए गए हैं।
चाय श्रमिकों के लिए एकमुश्त वित्तीय सहायता
- एति कोली दूती पात योजना के तहत ₹300 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जाएगी।
- इसके अंतर्गत 6 लाख से अधिक चाय बागान श्रमिकों को ₹5,000 की एकमुश्त सहायता दी जाएगी।
- लाभार्थियों में 27 ज़िलों और 73 विधानसभा क्षेत्रों में फैले 836 चाय बागानों में कार्यरत स्थायी और अस्थायी (कैजुअल) दोनों प्रकार के श्रमिक शामिल हैं।
- इस योजना का उद्देश्य तत्काल वित्तीय राहत प्रदान करना और श्रमिक कल्याण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को मजबूत करना है।
बाल देखभाल, स्वास्थ्य और कार्यस्थल की गरिमा से जुड़े उपाय
- योजना के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने चाय बागान क्षेत्रों में मोबाइल क्रेच (शिशु देखभाल केंद्र) और मोबाइल शौचालय सेवाओं का भी उद्घाटन किया।
- इन सुविधाओं का उद्देश्य विशेष रूप से महिला श्रमिकों के लिए बाल देखभाल, स्वच्छता, स्वास्थ्य, सुरक्षा और गरिमा में सुधार करना है।
- सरकार ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कल्याणकारी हस्तक्षेप केवल मजदूरी तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि दैनिक जीवन की परिस्थितियों को भी बेहतर बनाना आवश्यक है ताकि दीर्घकालिक सामाजिक उत्थान सुनिश्चित हो सके।
असम की चाय विरासत के 200 वर्ष
- असम के चाय उद्योग के 200 वर्षों के इतिहास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जहाँ असम की चाय को वैश्विक स्तर पर सराहा जाता है, वहीं इसके पीछे काम करने वाले श्रमिक अक्सर अदृश्य रह जाते हैं।
- उन्होंने कहा कि असम चाय पर गर्व तभी सार्थक है जब चाय बागान श्रमिकों को सम्मान और पहचान दी जाए।
- मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चाय बागानों से लंबे जुड़ाव और चाय समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारने पर उनके ज़ोर का भी उल्लेख किया।
भूमि अधिकार और दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा
- असम सरकार ने घोषणा की है कि चाय बागान श्रमिकों और श्रम लाइनों में रहने वाले स्वदेशी परिवारों को भूमि अधिकार (पट्टा) प्रदान किए जाएंगे।
- भूमि पट्टों के लिए आवेदन फरवरी से शुरू होंगे। शर्त यह होगी कि भूमि कम से कम 10 वर्षों तक लाभार्थियों के पास रहे और इसका हस्तांतरण केवल चाय समुदाय के भीतर ही किया जा सके।
- यह कदम दीर्घकालिक सुरक्षा और संपत्ति के स्वामित्व को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक पहलें
- मुख्यमंत्री ने कई पूरक पहलों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें ओरुनोदोई योजना का विस्तार, चाय बागान क्षेत्रों में मॉडल स्कूलों की स्थापना, एमबीबीएस और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों में आरक्षित सीटें, छात्रवृत्तियाँ, स्वरोज़गार सहायता, मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और गर्भवती श्रमिकों के लिए वेतन क्षतिपूर्ति शामिल हैं।
- सांस्कृतिक पहचान और विरासत को संरक्षित करने के लिए झूमर नृत्य के प्रचार पर भी विशेष ज़ोर दिया गया।
- इसके अतिरिक्त, चाय जनजातियों को ग्रेड-III और ग्रेड-IV सरकारी नौकरियों में ओबीसी के अंतर्गत 3% आरक्षण भी प्रदान किया गया है।
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