भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता भरत कपूर का 27 अप्रैल 2026 को उम्र से जुड़ी दिक्कतों के कारण निधन हो गया। वे 80 साल के थे। वे बीते तीन दिनों से बीमार थे और अस्पताल में भर्ती थे। भरत कपूर के करीबी दोस्त और अभिनेता अवतार गिल ने इस खबर की पुष्टि की है। भरत कपूर ने फिल्मों से लेकर छोटे पर्दे तक अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया। मगर, उनके अभिनय सफर की शुरुआत रंगमंच से हुई थी।
भरत कपूर का जन्म 15 अक्टूबर, 1945 को भारत में हुआ था। कम उम्र से ही उन्होंने अभिनय और प्रदर्शन में गहरी रुचि दिखाई थी। हालाँकि उनकी औपचारिक शिक्षा के बारे में विस्तृत जानकारी सीमित है, लेकिन सिनेमा के प्रति उनके जुनून ने उन्हें अभिनय को एक पूर्णकालिक करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उनके शुरुआती वर्ष समर्पण और कड़ी मेहनत से संवारे गए, जिसने उन्हें भारतीय फिल्म उद्योग में एक मजबूत नींव स्थापित करने में मदद की।
कपूर ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1972 में फ़िल्म ‘जंगल में मंगल’ से की थी। इन वर्षों के दौरान, उन्होंने 150 से अधिक फ़िल्मों में काम किया और कई तरह की भूमिकाएँ निभाईं। उन्हें विशेष रूप से पुलिस अफ़सरों, वकीलों और नकारात्मक किरदारों को बड़ी गहराई से निभाने के लिए जाना जाता था। उनकी कुछ सबसे यादगार फ़िल्मों में ‘नूरी’, ‘लव स्टोरी’, ‘आख़िरी रास्ता’, ‘खुदा गवाह’, ‘साजन चले ससुराल’ और ‘मीनाक्षी: ए टेल ऑफ़ थ्री सिटीज़’ शामिल हैं; इन फ़िल्मों ने उनकी बहुमुखी प्रतिभा को बखूबी दर्शाया है।
अभिनय के मामले में भरत कपूर का छोटे पर्दे पर भी खूब दबदबा रहा। उन्हें कैंपस, परंपरा, राहत, सांस, अमानत, भाग्यविधाता, तारा, चुनौती और चंद्रकांता जैसे टीवी शो में देखा गया। भरत कपूर ने करीब चार दशक तक इंडस्ट्री में काम किया। अभिनय के दम पर छोटी भूमिकाओं से भी बड़ा एक्टर कैसे बना जा सकता है, यह भरत कपूर से सीखा जा सकता है। टेलीविज़न पर निभाई गई उनकी भूमिकाओं ने उन्हें पूरे देश के दर्शकों से जुड़ने में मदद की, खासकर भारतीय टेलीविज़न के ‘सुनहरे दौर’ के दौरान। उनके अभिनय को उसकी यथार्थवादिता और भावनात्मक गहराई के लिए सराहा गया।
अभिनय के अलावा, भरत कपूर ने फ़िल्म-निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रखा। उन्होंने ‘रईसज़ादा’ (1990) और ‘बरसात की रात’ (1998) जैसी फ़िल्मों का निर्देशन भी किया है। एक निर्देशक के तौर पर उनके काम में कहानी कहने की कला और सिनेमा की उनकी गहरी समझ साफ़ झलकती है। इस बात ने उनके करियर को एक नया आयाम दिया है, और कैमरे के आगे और पीछे—दोनों ही जगहों पर उनकी प्रतिभा को साबित किया है।
भारतीय सिनेमा में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे अपनी सशक्त सहायक भूमिकाओं और अपने द्वारा निभाए गए हर किरदार में यथार्थता लाने के लिए जाने जाते थे। फिल्मों और टेलीविजन, दोनों ही क्षेत्रों में उनके काम ने कई उभरते हुए कलाकारों को प्रेरित किया। उनके निधन के बाद भी, उनका अभिनय दर्शकों का मनोरंजन करता रहेगा और हिंदी सिनेमा के समृद्ध इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा।
भरत कपूर की शादी लोपा कपूर से हुई। इनके तीन बच्चे हैं। इनके बेटे राहुल कपूर निर्देशक हैं। बेटी का नाम कविता अरोड़ा है, जिनकी शादी अजय अरोड़ा से हुई है। भरत कपूर का एक बेटा सागर कपूर है।
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