राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान (NIN), पुणे ने वट अमावस्या के अवसर पर आयुष मंत्रालय की हरित योग पहल के साथ एक अनूठा कार्यक्रम आयोजित किया, जो अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2025 की तैयारी का हिस्सा था। इस आयोजन ने वट वृक्ष (बरगद) के सांकेतिक और पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करते हुए योग की पारिस्थितिक संतुलन में भूमिका को भी उजागर किया।
यह कार्यक्रम पारंपरिक भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को आधुनिक पर्यावरणीय लक्ष्यों से जोड़ने की अभिनव पहल के कारण चर्चा में रहा। इसमें आयुष मंत्रालय की “हरित योग” पहल को आगे बढ़ाते हुए “योग फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ” थीम के तहत IDY 2025 की तैयारी को दर्शाया गया।
अवसर: वट अमावस्या — दीर्घायु और वैवाहिक सुख का प्रतीक पर्व
आयोजक: राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान (NIN), पुणे
संबद्ध पहल: हरित योग (आयुष मंत्रालय द्वारा) और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025
थीम (IDY 2025): “योग फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ”
मुख्य अतिथि: श्री अनंत बिरादार, अध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संगठन
सांस्कृतिक भूमिका: हिंदू परंपराओं में वट वृक्ष को दीर्घायु, ज्ञान और शरण का प्रतीक माना जाता है
पारिस्थितिक भूमिका: यह वायु को शुद्ध करता है, जीव-जंतुओं को आश्रय देता है, तापमान नियंत्रित करता है, और मिट्टी को स्थिरता प्रदान करता है
पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आधुनिक पर्यावरणीय चेतना के साथ जोड़ना
हरित योग को बढ़ावा देना और योग में पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को शामिल करना
स्थायी जीवनशैली के प्रति जागरूकता फैलाना
प्रतीकात्मक अनुष्ठान: प्रतिभागियों ने वट वृक्ष के चारों ओर धागे बांधकर संरक्षण और श्रद्धा का संदेश दिया
मानसून का आनंद: कार्यक्रम के दौरान पुणे में दक्षिण-पश्चिम मानसून की पहली बारिश ने वातावरण को और भी मनोरम बना दिया
समापन प्रसाद: वट वृक्ष की छाया में आम का रस परोसा गया
वट अमावस्या: महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए यह पर्व मनाती हैं
हरित योग: आयुष मंत्रालय की पहल, जिसमें योग के साथ पर्यावरण-जागरूकता को जोड़ा गया है
IDY 2025: 21 जून 2025 को 11वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आयोजित किया जाएगा
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