उत्तराखंड राज्य ने अपने नागरिक कानून ढांचे में एक और महत्वपूर्ण सुधार करते हुए समान नागरिक संहिता (UCC) को नए संशोधनों के माध्यम से और सुदृढ़ किया है। इस कदम का उद्देश्य कानून को अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाना है, साथ ही राज्य में नागरिक मामलों में समानता और डिजिटल शासन को मजबूत करना है।
उत्तराखंड सरकार ने राज्यपाल की मंजूरी के बाद समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 लागू किया है। इस अध्यादेश के जरिए UCC की प्रभावशीलता और स्पष्टता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं।
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को 27 जनवरी 2025 को लागू किया गया था, जो भारत के कानूनी इतिहास में एक ऐतिहासिक कदम माना जाता है। इसके तहत विवाह, तलाक और लिव-इन संबंधों से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल और डिजिटल बनाया गया तथा सभी समुदायों के लिए समान नागरिक कानून सुनिश्चित किए गए। एक वर्ष पूरा होने पर राज्य में “UCC दिवस” मनाया जा रहा है, जो इस सुधार के सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव को रेखांकित करता है।
यह अध्यादेश भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल द्वारा जारी किया गया है, जिससे इसे तत्काल कानूनी प्रभाव मिला। इसमें UCC अधिनियम, 2024 के अंतर्गत प्रक्रियात्मक, प्रशासनिक और दंडात्मक सुधार किए गए हैं। इसका उद्देश्य अस्पष्टताओं को दूर करना, नए आपराधिक कानूनों के अनुरूप दंड प्रावधानों को संरेखित करना और कानून के सुचारु क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है। साथ ही पंजीकरण से जुड़े अधिकारों को मजबूत किया गया है और अपीलीय व्यवस्था में सुधार किया गया है।
इन संशोधनों का फोकस महिलाओं के सशक्तिकरण, बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और नागरिक कानूनों में समानता पर है। प्रक्रियाओं को सरल बनाकर देरी कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, ये बदलाव कानून को अधिक सुलभ और पालन में आसान बनाकर जन-विश्वास बढ़ाने तथा प्रवर्तन में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए किए गए हैं।
UCC का सबसे स्पष्ट प्रभाव विवाह पंजीकरण के डिजिटलीकरण में दिखता है। UCC से पहले यह प्रक्रिया उत्तराखंड अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम, 2010 के तहत होती थी, जिसमें उप-पंजीयक कार्यालय में शारीरिक उपस्थिति आवश्यक थी। UCC के तहत अब लगभग 100% विवाह पंजीकरण ऑनलाइन हो रहे हैं। दंपति और गवाह दस्तावेज़ अपलोड कर तथा वीडियो बयान रिकॉर्ड कर दूर से ही आवेदन कर सकते हैं। एक वर्ष में पाँच लाख से अधिक विवाह पंजीकरण हुए हैं और औसतन पाँच दिनों में प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं।
यह अध्यादेश UCC से जुड़े दंड प्रावधानों को नए भारतीय आपराधिक कानूनों के अनुरूप बनाता है, जिससे कानूनी सामंजस्य सुनिश्चित होता है। साथ ही प्रशासनिक स्पष्टता और प्रवर्तन शक्तियों को बढ़ाकर प्रक्रियागत भ्रम को कम किया गया है। जिलों में UCC दिवस के अवसर पर जागरूकता और जन-संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जो इस सुधार को सामाजिक स्वीकार्यता दिलाने के सरकार के प्रयासों को दर्शाते हैं।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]प्रत्येक वर्ष 8 मई को दुनिया-भर में World Red Cross Day के रूम में मनाया जाता…
दुनिया में अगर कोई रिश्ता बिना किसी शर्त के साथ खड़ा रहता है, तो वह…
दुनिया भर में एक बार फिर एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक वायरस चर्चा में आ गया…
भारत की न्यायपालिका में कई ऐसे कानूनी शब्द हैं जो आम लोगों के लिए जटिल…
भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनकर उन्हें कानून बनाने का…
World Most Polluted Cities 2026: बढ़ते AQI ने बढ़ाई चिंता साल 2026 में वायु प्रदूषण…