अमेरिकी टैरिफ वृद्धि: भारतीय निर्यात के सबसे अधिक प्रभावित होने वाले प्रमुख क्षेत्र

अमेरिका ने कई प्रमुख भारतीय वस्तुओं पर 50% का भारी शुल्क लगाकर भारतीय निर्यातकों को बड़ा झटका दिया है। यह कदम रूस के साथ नई दिल्ली के निरंतर तेल व्यापार के बाद उठाया गया है, जिस पर वाशिंगटन की तीखी प्रतिक्रिया हुई है। इस अचानक और एकतरफा फैसले ने कपड़ा, रत्न एवं आभूषण, रसायन और समुद्री खाद्य जैसे प्रमुख भारतीय निर्यात क्षेत्रों को झकझोर दिया है। उद्योग जगत के नेताओं को डर है कि इससे अमेरिका को होने वाले निर्यात में लगभग आधी कमी आ सकती है, जिससे राजस्व और दीर्घकालिक व्यापार संबंध दोनों प्रभावित होंगे।

अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ क्यों लगाया गया?

अमेरिका ने मौजूदा 25% शुल्क के ऊपर अतिरिक्त 25% ड्यूटी लगाने का निर्णय इसलिए लिया है क्योंकि भारत ने भू-राजनीतिक तनाव के बीच रूस से तेल आयात बंद करने से इनकार कर दिया। जबकि चीन और तुर्की जैसे अन्य देश भी रूस के साथ इसी तरह का व्यापार जारी रखे हुए हैं, फिर भी उन्हें ऐसी सज़ा का सामना नहीं करना पड़ा। इस वजह से वॉशिंगटन की चयनात्मक कार्रवाई की आलोचना हो रही है। यह टैरिफ 31 जुलाई 2025 को घोषित किया गया था और इसे दो चरणों में लागू किया जाएगा — पहला 7 अगस्त से और दूसरा 27 अगस्त से।

सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले प्रमुख निर्यात क्षेत्र

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, नए टैरिफ से अमेरिकी बाज़ार में भारतीय वस्तुओं की लागत काफी बढ़ जाएगी, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता घटेगी। प्रमुख प्रभावित क्षेत्र इस प्रकार हैं —

  1. वस्त्र और परिधान 

    • भारत का अमेरिकी निर्यात: 10.3 अरब डॉलर

    • टैरिफ: करीब 60–64% बुनाई और निटेड दोनों प्रकार के परिधानों पर

    • CITI ने इसे पहले से संघर्ष कर रहे क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका बताया।

  2. रत्न और आभूषण 

    • भारत का अमेरिकी निर्यात: 12 अरब डॉलर

    • टैरिफ: लगभग 52%

    • लागत प्रतिस्पर्धा में भारी गिरावट की आशंका।

  3. रसायन और जैविक उत्पाद 

    • भारत का अमेरिकी निर्यात: 2.34 अरब डॉलर

    • टैरिफ: 54%

  4. झींगा और समुद्री भोजन 

    • भारत का अमेरिकी निर्यात: 2.24 अरब डॉलर

    • पहले से ही कम मार्जिन पर काम कर रहे निर्यातकों के लिए खरीदार खोने का खतरा।

  5. चमड़ा और जूते 

    • भारत का अमेरिकी निर्यात: 1.18 अरब डॉलर

    • टैरिफ: 50% से अधिक

  6. मशीनरी और यांत्रिक उपकरण 

    • भारत का अमेरिकी निर्यात: करीब 9 अरब डॉलर

    • टैरिफ: 51.3%

  7. फर्नीचर और कालीन 

    • कालीन: 52.9%

    • फर्नीचर: 52.3%

उद्योग और विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएँ

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (FIEO)
अध्यक्ष एस. सी. रल्हन ने इसे “गंभीर झटका” बताया, जिससे अमेरिकी बाज़ार में भारत की 55% शिपमेंट प्रभावित होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि भारतीय निर्यातक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में 30–35% नुकसान में रहेंगे, जिससे ऑर्डर रद्द और ग्राहक खोने की स्थिति बनेगी।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI)
संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने सुझाव दिया कि सिर्फ़ अमेरिका को खुश करने के लिए भारत को रूसी तेल छोड़ना नहीं चाहिए। उन्होंने धैर्य रखने, तत्काल प्रतिशोध से बचने और रूस व चीन जैसे अन्य वैश्विक साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने पर जोर दिया।

भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार झलक

  • कुल व्यापार (2024–25): 131.8 अरब डॉलर

  • भारत से निर्यात: 86.5 अरब डॉलर

  • अमेरिका से आयात: 45.3 अरब डॉलर

  • नए टैरिफ के बाद भारत और ब्राज़ील, अमेरिका द्वारा लगाए गए सबसे अधिक शुल्क झेलने वाले देशों की सूची में शीर्ष पर हैं।

आगे की राह

फिलहाल भारतीय निर्यातकों के लिए स्थिति कठिन दिख रही है। ऊँचे टैरिफ से प्रतिस्पर्धात्मकता घटेगी, खासकर MSME सेक्टर के लिए, जो कई निर्यात क्षेत्रों की रीढ़ है। अगर यह मामला कूटनीतिक स्तर पर सुलझा नहीं, तो भारत अमेरिकी बाज़ार में अपना पुराना हिस्सा खो सकता है।

हालाँकि, यह परिस्थिति भारत के लिए नए निर्यात बाज़ार खोजने और अपनी रणनीतिक व्यापार प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार का अवसर भी है। विश्लेषक शांतिपूर्ण कूटनीति के साथ-साथ घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए बैकअप योजनाएँ तैयार करने की सलाह दे रहे हैं।

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vikash

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