भारत की बेरोज़गारी दर जनवरी 2026 में बढ़कर 5 प्रतिशत हो गई, जो पिछले तीन महीनों का उच्चतम स्तर है। यह जानकारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी नवीनतम आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) में दी गई है। इस वृद्धि का मुख्य कारण ग्रामीण श्रम बाज़ारों में मौसमी कमजोरी और फसल कटाई के बाद आने वाली मंदी को माना जा रहा है। हालांकि बेरोज़गारी दर में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन श्रम बल भागीदारी दर में भी कमी देखी गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस अवधि में कम लोग सक्रिय रूप से रोजगार की तलाश कर रहे थे। यह आंकड़े करंट वीकली स्टेटस (CWS) पद्धति के आधार पर तैयार किए गए हैं।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के अनुसार:
शहरी बेरोज़गारी में वृद्धि शहरों के रोजगार बाज़ार में हल्के दबाव का संकेत देती है, जबकि ग्रामीण बेरोज़गारी में बढ़ोतरी कृषि फसल कटाई के बाद होने वाले मौसमी बदलावों को दर्शाती है।
जनवरी में बेरोज़गारी दर बढ़ने के प्रमुख कारण हैं:
ग्रामीण रोजगार आमतौर पर फसल चक्र पर निर्भर करता है। कृषि के व्यस्त मौसम के बाद श्रम की मांग घट जाती है, जिससे अल्पकालिक रूप से बेरोज़गारी दर बढ़ सकती है।
बेरोज़गारी दर का आकलन करंट वीकली स्टेटस (CWS) पद्धति के तहत किया जाता है।
CWS के अनुसार:
यह पद्धति अल्पकालिक रोजगार में होने वाले उतार-चढ़ाव को दर्शाती है और मासिक श्रम बाज़ार रुझानों को समझने में सहायक है।
5% की बेरोज़गारी दर वैश्विक मानकों की तुलना में अभी भी मध्यम स्तर पर है, लेकिन इसमें हुई वृद्धि सावधानी का संकेत देती है।
मुख्य प्रभाव:
हालांकि, मौसमी रुझान अक्सर आने वाले महीनों में बदल जाते हैं, जब कृषि और निर्माण गतिविधियाँ फिर से तेज़ हो जाती हैं।
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