संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने ईरान में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर हिंसात्मक कार्रवाई की निंदा की है। परिषद ने इस कार्रवाई और विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ किए गए कथित दुर्व्यवहारों की जांच के लिए एक स्वतंत्र तथ्य-खोज मिशन (Independent fact-finding mission ) बनाने की घोषणा की है।
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जिनेवा में संपन्न हुए सत्र में ईरान पर दबाव बनाने का नवीनतम अंतर्राष्ट्रीय प्रयास किया गया है, जो पहले से ही अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों को झेल रहा है। जर्मनी और आइसलैंड द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव को संयुक्त राज्य अमेरिका और कई यूरोपीय, लैटिन अमेरिकी, एशियाई और अफ्रीकी देशों सहित 25 देशों द्वारा समर्थित किया गया है। छह देशों अर्थात चीन, पाकिस्तान, क्यूबा, इरिट्रिया, वेनेजुएला और आर्मेनिया ने इस कदम का विरोध किया, जबकि 16 देशों ने भाग नहीं लिया।
संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवाधिकार अधिकारियों ने पहले ईरान की सरकार से प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई रोकने की अपील की थी। लेकिन देश की “बिगड़ती” हालातों और मानव अधिकारों की स्थिति पर तेहरान के दूत उद्दंड और अडिग थे। उन्होंने इसे को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया।
यह विरोध प्रदर्शन दो महीने से पहले, 22 वर्षीय महसा अमिनी की मौत के बाद शुरू हुआ था, उसकी मौत सख्त इस्लामी ड्रेस कोड का उल्लंघन करने हेतु नैतिकता पुलिस की हिरासत में हुई थी।
जर्मन विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक ने कहा कि स्थिति “हमारे साहस की परीक्षा (a test of our courage)” प्रस्तुत करती है।
आगे उन्होंने कहा कि, “संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हर राज्य की संप्रभुता की रक्षा के लिए की गई थी, लेकिन एक शासन जो इस शक्ति का उपयोग अपने ही लोगों के अधिकारों का उल्लंघन करने के लिए करता है, वह हमारे संयुक्त राष्ट्र के मूल्यों का उल्लंघन कर रहा है।”
ईरान के महिला और परिवार मामलों के विभाग के उपाध्यक्ष खादीजेह करीमी ने इस कार्रवाई की आलोचना की है और कहा कि यह “ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति को विकृत करने के लिए जर्मनी के राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम” है।
करीमी ने कहा, “इस्लामिक गणराज्य ईरान को इस बात का गहरा अफसोस है कि मानवाधिकार परिषद का एक बार फिर कुछ अहंकारी राष्ट्रों द्वारा एक संप्रभु संयुक्त राष्ट्र सदस्य राज्य को विरोध करने के लिए दुरुपयोग किया गया है, जो मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।”
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख, वोल्कर तुर्क ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है और कहा कि, “ईरान की सरकार विश्व समुदाय की बात नहीं सुन रही है।”
उन्होंने आगे कहा कि “ईरान के लोग, जीवन के सभी क्षेत्रों से, सभी जातियों से, उम्र भर, बदलाव की मांग कर रहे हैं। इन विरोधों की जड़ें स्वतंत्रता के लंबे समय से चले आ रहे इनकार, क़ानूनी और संरचनात्मक असमानताओं, सूचना तक पहुंच के अभाव और इंटरनेट शटडाउन में निहित हैं।”
यह संयुक्त राष्ट्र परिषद के भीतर एक अंतर सरकारी निकाय है।
UNHRC ने पूर्व संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की जगह ली।
यह UNGA द्वारा 15 मार्च, 2006 को बनाया गया था, और निकाय का गठन जून, 2006 में अपने पहले सत्र में किया गया था।
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