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संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को रेंजलैंड और पशुपालकों के लिए अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया

संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को ‘अंतर्राष्ट्रीय वर्ष चरागाह और पशुपालक (International Year for Rangelands and Pastoralists)’ घोषित किया है, जो दुनिया के कुछ सबसे कम ध्यान दिए जाने वाले, किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्रों पर प्रकाश डालने का एक ऐतिहासिक निर्णय है। यह घोषणा वैश्विक जलवायु कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण असंतुलन को संबोधित करती है: जहाँ वनों को असमान ध्यान और वित्तीय संसाधन प्राप्त होते हैं, वहीं घास के मैदान और सवाना (Grasslands and Savannahs)—जो कार्बन अवशोषण, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु लचीलापन के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं—अंतर्राष्ट्रीय जलवायु वार्ताओं और राष्ट्रीय जलवायु रणनीतियों में अक्सर हाशिये पर रहते हैं। यह संयुक्त राष्ट्र की घोषणा समग्र पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण की दिशा में जलवायु कार्रवाई को संतुलित करने का एक निर्णायक क्षण है, जो यह स्वीकार करती है कि प्रभावी जलवायु शमन केवल वनों तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि सभी भूमि-आवरण (biomes) पर समान ध्यान देना आवश्यक है।

प्रतियोगी परीक्षाओं और करेंट अफेयर्स के लिए मुख्य तथ्य

  • संयुक्त राष्ट्र घोषणा: 2026 को अंतर्राष्ट्रीय वर्ष: चरागाह और पशुपालक घोषित किया गया
  • मुख्य उद्देश्य: कम ध्यान दिए जाने वाले घास के मैदान और सवाना पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रकाश डालना
  • वैज्ञानिक सहमति: घास के मैदान और सवाना कार्बन अवशोषक (Carbon Sink) के रूप में कार्य करते हैं
  • नीति अंतर (Policy Gap): UNFCCC की जलवायु वार्ताएं अक्सर वन-केंद्रित रहती हैं
  • 2022 में वैज्ञानिक पहल: अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने UNFCCC से जलवायु फोकस को विस्तारित करने का आग्रह किया
  • प्रमुख प्रकाशन: “Science” जर्नल में ओपन लेटर प्रकाशित, जिसमें घास के मैदानों की कार्बन अवशोषण क्षमता को उजागर किया गया
  • COP30 स्थान: बेलम, ब्राज़ील (2023)
  • प्रमुख पहल: COP30 में Tropical Forest Forever Facility (TFFF) की शुरुआत
  • मुख्य UN संधि: UNFCCC (UN Framework Convention on Climate Change)
  • संबंधित संधि: UNCCD (UN Convention to Combat Desertification)
  • वैश्विक खतरा: घास के मैदान दुनिया के सबसे अधिक संकटग्रस्त पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल हैं

वैज्ञानिक प्रमाण: घास के मैदान महत्वपूर्ण कार्बन सिंक के रूप में

2022 वैज्ञानिक अपील

साल 2022 में, अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने “Science” पत्रिका में एक ओपन लेटर प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने UNFCCC (UN Framework Convention on Climate Change) के पक्षकारों से आग्रह किया कि जलवायु लक्ष्यों को केवल वनों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि सभी पारिस्थितिकी तंत्र (biomes), विशेष रूप से घास के मैदान और सवाना को शामिल किया जाए। वैज्ञानिकों ने ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए कि सवाना प्रभावी कार्बन सिंक के रूप में कार्य करता है और वनों के समान या उससे भी अधिक दर से वातावरण में मौजूद कार्बन को अवशोषित करने में सक्षम है।

तीन साल बाद: नीति में विलंब

इस वैज्ञानिक सहमति के बावजूद, तीन साल बाद भी UNFCCC की जलवायु वार्ता वनों को प्राथमिकता देती है, जबकि अन्य महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र—विशेष रूप से घास के मैदान, सवाना और चरागाह—मुख्यधारा की जलवायु रणनीतियों और वित्तपोषण तंत्र से अधिकांशतः हाशिए पर हैं। यह लगातार वन-केंद्रित ध्यान वैज्ञानिक प्रमाण और नीति प्राथमिकताओं के बीच मौलिक असंतुलन को दर्शाता है।

COP30: वन-प्रधान एजेंडा का प्रतीक

ब्राज़ील की मेज़बानी और अमेज़न पर फोकस

बेलम, ब्राज़ील में आयोजित UNFCCC COP30 जलवायु वार्ताओं ने इस असंतुलन को स्पष्ट रूप से उजागर किया। ब्राज़ील द्वारा अमेज़न बेसिन की मेज़बानी के कारण वार्ता का एजेंडा वनों पर केंद्रित रहा। इस अवसर पर Tropical Forest Forever Facility (TFFF) की शुरुआत की गई, जिसमें वित्तीय तंत्र और शासन ढांचे के माध्यम से वन संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मल्टी-मिलियन डॉलर की प्रतिबद्धताएँ शामिल थीं।

घास के मैदान पीछे छूट गए

फिर भी COP30 का समापन घास के मैदान और चरागाह के लिए किसी ठोस जलवायु रोडमैप के बिना हुआ, जिससे यह पुष्टि होती है कि ये पारिस्थितिकी तंत्र मुख्यधारा की जलवायु रणनीतियों से बाहर बने हुए हैं, जबकि उनका पारिस्थितिक महत्व अत्यधिक है। इस उपेक्षा के कारण घास के मैदानों को वन संरक्षण पहलों की तुलना में कम वित्तीय, तकनीकी समर्थन और नीति मान्यता प्राप्त होती है।

घास के मैदान: बहुप्रकार के खतरों का सामना

पारिस्थितिकी तंत्र के क्षरण के प्रमुख कारण

विश्वभर में घास के मैदान अत्यधिक दबावों का सामना कर रहे हैं, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:

  • कृषि में रूपांतरण (Agricultural Conversion): घास के मैदानों को कृषि भूमि और वृक्षारोपण में बदलना, मूल घास के मैदानों के आवास को नष्ट कर देता है।
  • आक्रामक प्रजातियाँ (Invasive Species): विदेशी प्रजातियाँ स्थानीय वनस्पतियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती हैं और प्राकृतिक आग (fire) की घटनाओं के पैटर्न को बदल देती हैं।
  • जीवाश्म ईंधन निष्कर्षण (Fossil Fuel Extraction): खनन और ऊर्जा विकास से घास के मैदान टूटते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र में विभाजन उत्पन्न होता है।
  • आग दमन नीतियाँ (Fire Suppression Policies): अच्छी मंशा से लागू की गई आग रोकने वाली नीतियाँ कभी-कभी विनाशकारी जंगल आग के जोखिम को बढ़ा देती हैं, क्योंकि खतरनाक ईंधन (fuel) जमा हो जाता है।

स्थानीय ज्ञान का हाशिये पर होना 

स्थानीय और आदिवासी भूमि प्रबंधन प्रथाएँ—जैसे नियंत्रित आग और अनुकूल चराई रणनीतियाँ—राज्य द्वारा लागू की गई आग दमन नीतियों और संरक्षण मॉडलों के कारण सिस्टमेटिक रूप से हाशिये पर चली गई हैं। इस उपेक्षा के परिणामस्वरूप जंगली आग की तीव्रता और कार्बन उत्सर्जन बढ़ गए हैं, क्योंकि खतरनाक ईंधन जमा हो जाता है और पारंपरिक प्रथाओं के माध्यम से प्रबंधित नहीं होता।

क्षेत्रीय अध्ययन: वैश्विक घास के मैदानों की संकटपूर्ण स्थिति

ऑस्ट्रेलियाई रेगिस्तानी घास के मैदान (Australian Desert Grasslands)

ऑस्ट्रेलियाई रेगिस्तानी घास के मैदान, जिनका प्रबंधन स्थानीय और आदिवासी समुदायों द्वारा किया जाता है, जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • गंभीर सूखा (Severe Droughts)
  • विनाशकारी अचानक बाढ़ (Destructive Flash Floods)

आक्रामक बफेल घास (Invasive Buffel Grass), जो स्थानीय प्रजातियों की तुलना में अधिक तीव्रता से जलती है

ब्राज़ील का सेराडो सवाना 

ब्राज़ील का सेराडो सवाना, जो कई प्रमुख नदी प्रणालियों का समर्थन करता है, पर भूमि उपयोग का दबाव अमेज़न की तुलना में अधिक है। यह महत्वपूर्ण, लेकिन कम सराहा गया पारिस्थितिकी तंत्र, अमेज़न वन संरक्षण प्रयासों की तुलना में अल्प सुरक्षा प्राप्त करता है।

नीति और वैश्विक निहितार्थ

घास के मैदानों को जलवायु ढांचे में शामिल करना

वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं ने आग्रह किया है कि घास के मैदानों को राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं और पेरिस समझौते के राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDCs) में शामिल किया जाए। इस समावेशन से यह सुनिश्चित होगा कि घास के मैदानों का संरक्षण वन संरक्षण के समान नीतिगत प्राथमिकता और वित्तीय समर्थन प्राप्त करे।

भारत का अवसर और चुनौती

भारत में घास के मैदान कई मंत्रालयों के अंतर्गत आते हैं जिनके विरोधाभासी आदेश और जिम्मेदारियाँ शासन में विखंडन (fragmentation) पैदा करती हैं। हालांकि, यदि भारत अपने NDC ढांचे में घास के मैदानों को कार्बन सिंक के रूप में मान्यता देता है, तो यह जलवायु शमन को मजबूत करने के साथ-साथ पशुपालक समुदायों के आजीविका समर्थन में भी योगदान देगा—इस प्रकार जलवायु और सामाजिक दोनों उद्देश्यों को पूरा किया जा सकता है।

समन्वित वैश्विक कार्रवाई

विशेषज्ञों ने जोर दिया है कि UN संधियों (विशेषकर UNFCCC और UNCCD) और राष्ट्रीय संस्थाओं के बीच समन्वित कार्रवाई आवश्यक है, ताकि घास के मैदानों का संरक्षण वैश्विक मुख्यधारा में शामिल हो और जलवायु कार्रवाई केवल वन-केंद्रित पूर्वाग्रह पर आधारित न रहकर वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुरूप हो।

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