संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को लेकर लगाए गए अतिरिक्त 25% शुल्क को हटा दिया है। यह फैसला 7 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते के बाद घोषित किया गया। इस कदम से पिछले कुछ महीनों से जारी व्यापारिक तनाव में कमी आई है और भारत–अमेरिका आर्थिक संबंधों में एक नए सिरे से शुरुआत का संकेत मिला है। साथ ही, ऊर्जा सहयोग, रक्षा साझेदारी और शुल्कों में कटौती को लेकर दोनों देशों की प्रतिबद्धता भी इससे मजबूत हुई है।
अतिरिक्त 25% शुल्क अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत द्वारा रूसी तेल की निरंतर खरीद के जवाब में लगाया गया था। वॉशिंगटन का तर्क था कि ऐसी खरीद से अप्रत्यक्ष रूप से युद्ध को वित्तीय समर्थन मिलता है। इसके चलते अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुओं पर भारी शुल्क लगाया गया, जिससे भारत के निर्यातकों को नुकसान हुआ। अब जारी नए कार्यकारी आदेश के तहत यह अतिरिक्त टैरिफ ईस्टर्न टाइम के अनुसार रात 12:01 बजे से हटा दिया जाएगा, जिससे प्रभावित भारतीय निर्यातों के लिए सामान्य व्यापार स्थितियां बहाल होंगी।
कार्यकारी आदेश के अनुसार, भारत ने रूसी संघ से तेल का आयात सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके बदले अमेरिका ने दंडात्मक 25% शुल्क हटाने पर सहमति दी। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत ने अगले 10 वर्षों में अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने का भी वादा किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं बल्कि व्यापक रणनीतिक साझेदारी को भी दर्शाता है।
अतिरिक्त 25% शुल्क हटाने के अलावा, इस व्यापार समझौते में तथाकथित पारस्परिक टैरिफ में भी कमी शामिल है। भारतीय उत्पादों पर यह शुल्क पहले 25% था, जिसे घटाकर 18% किया जाएगा। इसके लागू होने के बाद भारतीय वस्तुओं पर कुल शुल्क स्तर में बड़ी गिरावट आएगी, जो पिछले वर्ष के अंत में लगभग 50% तक पहुंच गया था। इससे अमेरिकी बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति काफी मजबूत होगी।
इस समझौते की एक बड़ी खासियत यह है कि भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं, तकनीकी वस्तुएं और कोकिंग कोल शामिल हैं। साथ ही, कुछ विमानन और एविएशन कंपोनेंट्स पर शुल्क हटाने का भी प्रावधान है, जिससे दोनों देशों के एयरोस्पेस और ऊर्जा क्षेत्रों को लाभ होगा।
व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, 18% टैरिफ दर भारतीय निर्यातकों को उन क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों पर हल्की बढ़त देती है, जिन पर 19–20% तक शुल्क लगता है। इस फैसले से भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलने, व्यापार प्रवाह के स्थिर होने और कारोबारियों के लिए अनिश्चितता कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच करीबी संबंधों की बहाली का संकेत भी मिलता है, जिससे भारत–अमेरिका द्विपक्षीय रिश्तों में नई गति आने की संभावना है।
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