वैश्विक मंच पर भारतीय कॉफी का उदय

भारत की कॉफी यात्रा 1600 के दशक में शुरू हुई, जब सूफी संत बाबा बुद्धान यमन के मोचा बंदरगाह से सात कॉफी के बीज छुपाकर भारत लाए और उन्हें कर्नाटक के बाबा बुद्धान गिरी पहाड़ियों में रोप दिया। एक छोटे से प्रयोग के रूप में शुरू हुई यह खेती धीरे-धीरे एक मजबूत और टिकाऊ उद्योग में बदल गई, जो आज 20 लाख से अधिक लोगों की आजीविका का आधार है। वर्तमान में कॉफी लगभग 4.91 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उगाई जाती है, मुख्यतः पश्चिमी और पूर्वी घाटों में, जहाँ इसे छायादार और पर्यावरण-अनुकूल प्रणाली के तहत उगाया जाता है। आज भारत विश्व में उत्पादन के मामले में सातवें स्थान पर है, वैश्विक कॉफी उत्पादन में 3.5% का योगदान करता है, और इसकी लगभग 70% कॉफी 128 देशों को निर्यात की जाती है।

भारत का कॉफी परिदृश्य: प्रमुख राज्य और किस्में

भारत में कॉफी की खेती मुख्य रूप से कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में केंद्रित है, जो कुल उत्पादन का लगभग 96% हिस्सा देते हैं। वर्ष 2025–26 में कर्नाटक ने 2.8 लाख मीट्रिक टन से अधिक उत्पादन के साथ शीर्ष स्थान बनाए रखा। शेष उत्पादन आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर भारत जैसे गैर-पारंपरिक क्षेत्रों से आता है, जहाँ कॉफी आदिवासी आजीविका और पर्यावरण संरक्षण का नया साधन बन रही है।

भारत की विविध भौगोलिक स्थितियाँ विभिन्न प्रकार की कॉफी को जन्म देती हैं—

  • अरेबिका: ठंडे पहाड़ी इलाकों में उगती है।

  • रोबस्टा: गर्म, आर्द्र क्षेत्रों में पनपती है और वैश्विक बाजार में उच्च प्रीमियम प्राप्त करती है।

स्पेशलिटी और GI-टैग्ड कॉफी: वैश्विक पहचान

भारत को पाँच क्षेत्रीय और दो विशेष कॉफी प्रकारों के लिए भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त हैं, जिससे इनकी बाजार कीमत बढ़ती है। इनमें शामिल हैं—

  • कूर्ग, चिकमगलूर व बाबा-बुढ़नगिरि अरेबिका कॉफी

  • वायनाड रोबस्टा कॉफी

  • अराकू वैली अरेबिका कॉफी

  • विशेष कॉफी: मॉनसून्ड मालाबार रोबस्टा, मैसूर नगेट्स एक्स्ट्रा बोल्ड, रोबस्टा कापी रॉयल

इन कॉफियों को उनकी सुगंध, कम अम्लता और जटिल स्वाद प्रोफाइल के लिए वैश्विक स्तर पर सराहा जाता है।

कॉफी बोर्ड: भारतीय कॉफी क्षेत्र की रीढ़

1942 के कॉफी एक्ट के तहत गठित कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया अनुसंधान, गुणवत्ता सुधार और निर्यात प्रोत्साहन का प्रमुख संस्थान है। यह इंटीग्रेटेड कॉफी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (ICDP) के माध्यम से बुनियादी ढाँचे के विकास का समन्वय करता है, जिसके मुख्य लक्ष्य हैं—

  • छोटे किसानों को सहायता

  • वैश्विक व्यापार मेलों में भागीदारी

  • भारतीय ब्रांडों को विदेशों में बढ़ावा

  • निर्यात प्रोत्साहन योजना के तहत माल ढुलाई सब्सिडी

बोर्ड का CCRI अनुसंधान केंद्र उच्च-उपज, कीट-प्रतिरोधी किस्में विकसित करता है और बेहतर खेती तकनीकें तैयार करता है।

कॉफी निर्यात: बढ़ती वैश्विक मांग

भारत कॉफी निर्यात में विश्व में पाँचवें स्थान पर है और वैश्विक निर्यात में लगभग 5% का योगदान देता है। FY 2024–25 में भारत के कॉफी निर्यात 1.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गए, जिनमें से 38% हिस्सा इंस्टेंट कॉफी उत्पादों का था।

मुख्य निर्यात बाज़ार—

  • इटली (18.09%)

  • जर्मनी (11.01%)

  • बेल्जियम, रूस, यूएई

निर्यात में यह सफल वृद्धि किसानों की आय बढ़ाती है और भारत की ब्रांड पहचान को मजबूत करती है।

मुख्य व्यापार सुधार और समझौते

GST सुधार

कॉफी एक्सट्रैक्ट्स और इंस्टेंट कॉफी पर GST 18% से घटाकर 5% करने से कीमतें लगभग 12% कम हुईं और खपत तथा प्रतिस्पर्धा दोनों में बढ़ोतरी हुई।

भारत–यूके CETA

इस समझौते ने भारतीय इंस्टेंट और रोस्टेड कॉफी को ड्यूटी-फ्री पहुंच प्रदान की, जिससे यूरोपीय आपूर्तिकर्ताओं के मुकाबले प्रतिस्पर्धा बढ़ी।

भारत–EFTA TEPA

अक्टूबर 2025 से लागू यह समझौता स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे और आइसलैंड में भारतीय कॉफी पर आयात शुल्क समाप्त करता है, जिससे उच्च मूल्य वाले बाजार खुलते हैं।

कोरापुट कॉफी और TDCCOL: आदिवासी सशक्तिकरण

ओडिशा का कोरापुट जिला उच्च गुणवत्ता वाली अरेबिका कॉफी के लिए नया उभरता केंद्र है। TDCCOL (राज्य की आदिवासी सहकारी संस्था) के सहयोग से—

  • किसानों के घर-घर से खरीद और उचित मूल्य सुनिश्चित

  • 2019 में “कोरापुट कॉफी” ब्रांड लॉन्च

  • आदिवासी कॉफी संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु 8 कैफ़े स्थापित

  • 2024 में दो फाइन कप अवार्ड प्राप्त

इन पहलों ने आदिवासी किसानों को सशक्त बनाया, पलायन कम किया और स्थानीय रोजगार बढ़ाया।

आगे का रास्ता: भारत की कॉफी का भविष्य

भारत का कॉफी बाजार 2028 तक 8.9% CAGR से बढ़ने की संभावना है। आउट-ऑफ-होम कैफ़े उद्योग 15–20% की वृद्धि के साथ $2.6–3.2 बिलियन तक पहुँच सकता है। कॉफी बोर्ड का लक्ष्य 2047 तक उत्पादन को 9 लाख टन तक तीन गुना करना है—जो उच्च गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर आधारित महत्वाकांक्षी भविष्य का संकेत है।

स्टैटिक GK पॉइंट्स

  • कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया: 1942 में कॉफी एक्ट VII के तहत गठन

  • बाबा बुद्धान: 1600 के दशक में यमन से कॉफी भारत लाए

  • GI-टैग्ड कॉफी: कूर्ग अरेबिका, वायनाड रोबस्टा, चिकमगलूर अरेबिका, अराकू वैली अरेबिका, बाबा-बुढ़नगिरि अरेबिका

  • स्पेशलिटी कॉफी: मॉनसून्ड मालाबार, मैसूर नगेट्स एक्स्ट्रा बोल्ड, रोबस्टा कापी रॉयल

  • भारत की रैंक: उत्पादन में 7वां, निर्यात में 5वां

  • शीर्ष उत्पादक राज्य: कर्नाटक

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vikash

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